हर पाकिस्तानी पर 3.33 लाख कर्ज, मुनीर सेना की मौज... शाहबाज ने खुद खोली 'कटोरा सरकार' की कलई

पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने संसद में पेश रिपोर्ट में खुद मान लिया है कि उसकी इकोनॉमी अब केवल कर्ज का ब्याज चुकाने के लिए जिंदा है.

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  • पाकिस्तानी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, देश का कुल कर्ज उसकी GDP के 70.7 प्रतिशत तक पहुंच चुका है
  • संसद में पेश रिपोर्ट में बताया गया कि हर पाकिस्तानी के सिर पर अब 3 लाख 33 हजार रुपये का कर्ज हो चुका है
  • पाकिस्तान ने सैन्य बजट से 103 प्रतिशत ज्यादा सेना पर खर्च कर दिए, जबकि विकास कार्यों के लिए पैसे कम पड़ गए
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पड़ोसी देश पाकिस्तान कर्ज के मामले में नित नई ऊंचाइयां छू रहा है. भारत जहां दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की तरफ बढ़ रहा है, वहीं पाकिस्तान की हालत नंगा नहाएगा क्या और निचोड़ेगा क्या वाली हो चुकी है. नई सरकारी रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान का कुल कर्ज अब उसकी जीडीपी के 70.7 प्रतिशत तक पहुंच चुका है और उसके हर नागरिक के सिर पर अब 3 लाख 33 हजार रुपये का कर्ज है. यानी पाकिस्तान में पैदा होने वाला हर बच्चा कर्जदार बनकर ही जन्म ले रहा है.

कर्ज चुकाने के लिए जिंदा है अर्थव्यवस्था 

पाकिस्तानी वित्त मंत्रालय ने खुद मान लिया है कि उसकी इकोनॉमी अब केवल कर्ज का ब्याज चुकाने के लिए जिंदा है. पाकिस्तानी संसद में पेश फिस्कल पॉलिसी स्टेटमेंट में सरकार ने बताया है कि उसका बजट घाटा तय लिमिट 3 लाख करोड़ रुपये से भी ऊपर निकल चुका है. भारत जहां इन्फ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल क्रांति पर पैसा लगा रहा है, वहीं पाकिस्तान अपने विकास कार्यों के बजट पर भारी कैंची चलाने पर मजबूर है. जनता के लिए बनाई गई योजनाओं का पैसा या तो कर्ज का ब्याज चुकाने में खप रहा है या फिर सैन्य हुक्मरानों की ख्वाहिश पूर्ति में झोंका जा रहा है.

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सेना पर बजट से 103% ज्यादा लुटा दिया

आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस पाकिस्तान के पास अपने कर्ज की किस्त चुकाने तक के पैसे नहीं हैं, वो अपनी सेना पर मिलिट्री बजट से 103 फीसदी ज्यादा पैसा लुटा रहा है. पाकिस्तान सरकार ने डिफेंस के लिए 2.1 खरब रुपये का बजट रखा था, लेकिन खर्च कर दिए 2.2 खरब रुपये. यानी पाकिस्तान की सेना पर तय बजट से भी 103 फीसदी ज्यादा खर्च कर डाला. रिपोर्ट ये भी दिखाती है कि पाकिस्तान की सरकार सेना की जरूरतें पूरा करने के लिए किस तरह अपनी फटी जेब से पाई-पाई निकालकर खर्च करती है. 

विकास कार्यों के लिए कम पड़ गए पैसे

अप्रैल 2024 में प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने वाले शहबाज शरीफ ने अपने पहले वित्त वर्ष 2024-25 में पाकिस्तानी सेना पर आम जनता का पैसा किस कदर लुटाया, इसका सबूत खुद वित्त मंत्रालय की इस रिपोर्ट में पेश किया है. इसमें बताया गया है कि डेवलपमेंट के लिए 1.7 खरब रुपये का बजट रखा गया था, लेकिन खर्च सिर्फ 1.4 खरब रुपये ही हो पाए. यानी जनता की भलाई के लिए खर्च करने को पैसे कम पड़ गए. जितना सोचा था, उसका महज 84 प्रतिशत ही खर्च हो पाया. ये कुछ वैसा ही है जैसे घर में नहीं हैं दाने, पाकिस्तान चला डराने.

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एक साल में 9 लाख करोड़ बढ़ गया कर्ज

वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से कराची के अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट में बताया गया है कि जून 2024 से लेकर जून 2025 के बीच पाकिस्तान की जनता पर कुल कर्ज 71.2 ट्रिलियन रुपये से बढ़कर 80.5 ट्रिलियन हो गया. इसकी बड़ी वजह उधार की रकम रही. उसका ब्याज पाकिस्तान चुका नहीं पाया. ब्याज चुकाने के लिए उधार का कटोरा फैलाना पड़ा, जिससे और भी ज्यादा कर्ज चढ़ गया. वित्त मंत्रालय खुद मानता है कि बढ़ता कर्ज उसके लिए सबसे बड़ी चिंता है.

आमदनी चवन्नी, खर्चा रूपैया

पाकिस्तान सरकार का हाल उस फिजूलखर्च मेहमान जैसा हो गया है, जो दूसरों के कर्ज पर पलते हुए भी अपनी शान दिखाने से बाज नहीं आता. संसद ने तय किया था कि कमाई और खर्च के बीच का अंतर (राजकोषीय घाटा) जीडीपी के 3.5 प्रतिशत से ऊपर नहीं जाना चाहिए, लेकिन शाहबाज सरकार ने इस लक्ष्मण रेखा को ऐसे लांघा कि 3.1 लाख करोड़ रुपये यानी 2.7 प्रतिशत ज्यादा फूंक डाले. ये वैसा ही है जैसे घर की छत टपक रही हो और साहब उधार लेकर नया सोफा और चमचमाती कारें घर ला रहे हों. 

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कंगाली में भी नवाबी फिजूलखर्ची

पाकिस्तान की दिखावे वाली कंजूसी का आलम यह है कि एक तरफ प्रधानमंत्री किफायत बरतने का भाषण देते हैं, वहीं दूसरी तरफ मंत्रियों के लिए चमचमाती गाड़ियां और दफ्तरों के लिए लग्जरी फर्नीचर खरीदा जाता है. वित्त मंत्रालय की ये रिपोर्ट पाकिस्तान के उस कड़वे सच को उजागर करती है जहां सरकार और सेना की जुगलबंदी ने देश को दिवालियेपन के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है. अब देखना ये है कि पाकिस्तान की डूबती नैया कब तक उधार के चप्पू के सहारे चलती है.

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