साल 1963 में जब पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने फैमिली प्लानिंग पर जोर दिया तो कट्टरपंथियों ने इसका पुरजोर विरोध किया. इस्लामिक नेताओं ने फैमिली प्लानिंग को इस्लाम में 'हराम' बताया. मजहब की आड़ में पाकिस्तान में आबादी कंट्रोल करने के साथ नियम-कायदों का विरोध हुआ.
लेकिन अब इसी पाकिस्तान में बढ़ती आबादी एक बड़ा 'संकट' बन गई है. इस संकट से निपटने के लिए पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को जिम्मेदारी दी गई है.
पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, तीन साल से ज्यादा समय तक आबादी बढ़ने की रफ्तार को रोकने में नाकाम रहने के बाद अब पाकिस्तान की सरकार को फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से उम्मीद है कि वह बढ़ती आबादी को रोकने में कुछ मदद कर सकते हैं.
क्या है सरकार का प्लान?
'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री सैयद मुस्तफा कमाल ने पिछले हफ्ते एक बैठक की थी. इस बैठक के बाद में उन्होंने बताया था कि बेकाबू होती आबादी को रोकने के लिए एक कमेटी बनाई जा रही है. इस कमेटी में फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी होंगे.
उन्होंने कहा कि सरकार बढ़ती आबादी के मुद्दे को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रही है और हर स्तर पर जरूरी नीतिगत फैसले लिए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि आबादी को काबू में करने के लिए सरकार और जनता की भागीदारी की जरूरत है.
उन्होंने यह भी कहा कि अभी नेशनल फाइनेंस कमीशन (NFC) के फॉर्मूले के तहत 82% फंड का बंटवारा आबादी के आधार पर होता है, इसलिए कुछ प्रांत आबादी बढ़ाने पर जोर देते हैं. उन्होंने सुझाव दिया कि NFC फॉर्मूले के तहत सिर्फ 50% हिस्सा ही आबादी के आधार पर बंटना चाहिए.
सैयद मुस्तफा ने कहा कि ज्यादा आबादी एक वजह कॉन्ट्रासेप्टिव की सीमित पहुंच रही है. उन्होंने बताया कि कॉन्ट्रासेप्टिव प्रोडक्ट्स पर टैक्स में छूट दी गई है. उनका कहना है कि पाकिस्तान में हर साल 67 लाख बच्चे पैदा होते हैं और अनुमान है कि फैमिली प्लानिंग तक बेहतर पहुंच से सालाना आबादी की बढ़कर को लगभग 15 लाख तक कम किया जा सकता है.
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फैमिली प्लानिंग को तो 'हराम' मानते हैं?
पाकिस्तान आज दुनिया में 5वां सबसे ज्यादा आबादी वाला मुल्क है. पाकिस्तान में आबादी बढ़ने की एक बड़ी वजह कट्टरपंथी इस्लाम भी है. वहां फैमिली प्लानिंग को 'हराम' माना जाता है.
1963 में जब तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने फैमिली प्लानिंग प्रोग्राम शुरू किया था तो कट्टरपंथी पार्टी जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम के नेता मुफ्ती महमूद ने 'गैर-इस्लामी' बताकर इसका विरोध किया था और देशभर में प्रदर्शन किए थे. और तो और जमात-ए-इस्लामी के संस्थापक अबुल आला मौदूदी ने तो बाकायदा एक किताब लिखी और मजहबी किताबों के आधार पर फैमिली प्लानिंग को खारिज कर दिया था.
2016 में आई 'Impact of fundamentalist discourses on family planning practices in Pakistan' रिपोर्ट में कहा गया था, 'कई मुसलमान कॉन्ट्रासेप्टिव के इस्तेमाल का विरोध इस आधार पर करते हैं कि प्रेग्नेंसी को रोकने वाला कोई भी तरीका हत्या के बराबर है जो गैर-इस्लामी है और कुरान में इसका मना किया गया है.'
ये रिपोर्ट बताती है कि जब अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिक मौजूद थे, पाकिस्तान में मौलानाओं ने इस बात को खूब प्रचारित किया कि मुस्लिम आबादी को कम करने के लिए फैमिली प्लानिंग विदेशियों की 'चाल' है. इतना ही नहीं, अफगानिस्तान से सटे इलाकों में फैमिली प्लानिंग में शामिल सरकारी कर्मियों के खिलाफ मौलवी अक्सर फतवा जारी कर देते थे. मौलाना खुलकर ऐसे लोगों की हत्या करने की बातें मस्जिदों से कहते थे.
कुल मिलाकर, पाकिस्तान में फैमिली प्लानिंग को 'गैर-इस्लामी' बताया गया और आबादी को काबू करने के हर तरीके को आजमाने से रोका गया.
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सांकेतिक तस्वीर. (IANS)
पाकिस्तान में कितनी बढ़ रही आबादी?
फैमिली प्लानिंग पर जोर नहीं देने के कारण पाकिस्तान में आबादी बढ़ती गई और अब एक बड़ा 'संकट' बन गई. पाकिस्तान अभी 5वां सबसे ज्यादा आबादी वाला मुल्क है और 2030 तक इसके चौथे नंबर पर आने का अनुमान है.
पाकिस्तानी सरकार के मुताबिक, पाकिस्तान की आबादी लगभग 26 करोड़ है और हस साल करीब 2.55 फीसदी की दर से बढ़ रही है. अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो अगले 5 साल में इसकी आबादी 30 करोड़ से ज्यादा हो सकती है और 2050 तक 40 करोड़ के करीब पहुंच जाएगी.
अनुमान है कि पाकिस्तान में हर साल लगभग 67 लाख बच्चों का जन्म होता है और अगर लोग फैमिली प्लानिंग करते हैं तो हर साल आबादी में 15 लाख तक की कमी आ सकती है. आबादी कम बढ़ेगी तो सरकारी सेवाओं पर दबाव कम होगा और मां-बच्चे की सेहत में सुधार होगा.
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सांकेतिक तस्वीर. (IANS)
अब यही आबादी बनी 'संकट'
पाकिस्तान में प्रजनन दर दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा है. पाकिस्तान में प्रजनन दर 3.6 है. यानी, हर पाकिस्तानी महिला अपने जीवनकाल में औसतन 3 या 4 बच्चों को जन्म दे रही है. लेकिन दिक्कत ये है कि ज्यादा आबादी के कारण 5 साल से कम उम्र के लगभग 40 फीसदी बच्चे ठिगने हैं और 29 फीसदी बच्चों का वजन कम था. हर साल प्रेग्नेंसी से जुड़ी समस्याओं के कारण हर साल 11 हजार महिलाओं की मौत हो रही है, जबकि 1.40 लाख से ज्यादा बच्चों की मौत एक साल की उम्र से पहले ही हो जा रही है.
'डॉन' की रिपोर्ट बताती है कि हेल्थ एक्सपर्ट का अनुमान है कि फैमिली प्लानिंग तक बेहतर पहुंच से हजारों माओं और बच्चों की जान बचाई जा सकती है.
पाकिस्तानी सरकार का कहना है कि ज्यादा आबादी अब 'संकट' बन गई है. सरकार का कहना है कि 'आबादी में हर 10 लाख लोगों को बढ़ने का मतलब है कि लोगों के लिए ज्यादा पानी, ज्यादा खाना, घर, स्कूल, अस्पताल, ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार की जरूरत है. ऐसे समय में जब क्लाइमेट चेंज के कारण पानी कम है और इकोसिस्टम खराब हो रहे हैं, तब बेतहाशा बढ़ती आबादी पाकिस्तान के लिए जलवायु से जुड़े खतरों को कई गुना बढ़ा देती है और विकास में बाधा डालती है.'
पॉपुलेशन काउंसिल का अनुमान है कि अगर इसी तरह आबादी बढ़ती रही तो 2050 तक पाकिस्तान को 57 हजार प्राइमरी स्कूल, 1.55 करोड़ घर और लगभग 10 करोड़ से ज्यादा नौकरियों की जरूरत होगी.
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