- पाकिस्तान पुलिस ने बलूच यकजेहती कमेटी की सदस्य फोजिया बलोच को कराची प्रेस क्लब से हिरासत में लिया है
- फोजिया के भाई दादशाह बलोच को 21 अप्रैल को कथित रूप से जबरन गायब किया गया था और उनकी कोई जानकारी नहीं है
- पुलिस ने दादशाह की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करने से परिवार को मना कर दिया है
कई प्रमुख मानवाधिकार संगठनों ने शनिवार को पाकिस्तान पुलिस द्वारा बलूच कार्यकर्ता फोजिया बलोच की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की. फोजिया बलोच बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की सदस्य हैं.फोजिया की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब उनके भाई दादशाह बलोच के कथित तौर पर जबरन गायब किए जाने का मामला सामने आया है. आरोप है कि 21 अप्रैल को पाकिस्तानी सुरक्षा बल उन्हें उनके घर से उठा ले गए थे. तब से उनका कोई पता नहीं है. परिवार ने पुलिस में मामला दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने शिकायत लेने से इनकार कर दिया.
प्रेस क्लब से उठा ले गई पुलिस
बीवाईसी के मुताबिक, फोजिया अपने परिवार के सदस्यों के साथ शनिवार को कराची प्रेस क्लब पहुंची थीं, जहां वे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने भाई की गुमशुदगी का मुद्दा उठाना चाहती थीं. इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर अज्ञात स्थान पर भेज दिया.
बलूच यकजेहती कमेटी ने पाकिस्तान सरकार से फोजिया और उनके भाई को तुरंत रिहा करने की मांग की है. संगठन ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से भी पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की अपील की. बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ‘पांक' ने इस घटना को पीड़ित परिवारों की आवाज दबाने और न्याय तक पहुंच रोकने की व्यापक नीति का हिस्सा बताया.
बलूच महिलाओं को कर रहा गायब
बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने कहा कि पाकिस्तान में असहमति के लिए सार्वजनिक जगह तेजी से कम होती जा रही है. जो परिवार अपने लापता परिजनों के बारे में जवाब मांगते हैं, उन्हें डराया-धमकाया जाता है और उनके बुनियादी अधिकार छीने जा रहे हैं.
इससे पहले गुरुवार को बलूच स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन आजाद ने भी आरोप लगाया था कि पाकिस्तानी अधिकारी बलूच महिलाओं के जबरन गायब किए जाने की घटनाओं को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं. संगठन के प्रवक्ता शोलन बलोच ने दावा किया कि इस साल अब तक करीब दो दर्जन बलूच महिलाओं को क्वेटा, कराची, खुजदार, केच, आवारान और अन्य इलाकों से जबरन उठाया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं को प्रताड़ित किया जा रहा है और झूठे नैरेटिव के जरिए बलूचिस्तान के आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है.
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