Pakistan Lockdown: अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली संभावित शांति वार्ता ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को एक 'पिंजरे' में तब्दील कर दिया है. कहने को तो यहां दुनिया की किस्मत का फैसला होना है, लेकिन इस फैसले के इंतजार में इस्लामाबाद के आम नागरिक अपनी ही गलियों में कैदी बन गए हैं. खाली सड़कें, बंद दुकानें और चप्पे-चप्पे पर तैनात फौज इस्लामाबाद का यह नजारा कोरोना महामारी के उन खौफनाक दिनों की याद दिला रहा है जब पूरी दुनिया थम गई थी. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार दुश्मन कोई वायरस नहीं, बल्कि वो कड़ा सुरक्षा घेरा है जो अमेरिका और ईरानी मेहमानों की अगवानी के लिए बिछाया गया है.
रोजी-रोटी पर संकट
पिछले कई दिनों से इस्लामाबाद और रावलपिंडी शहर में चक्का जाम है. पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, दफ्तर जाने वालों को वर्क फ्रॉम होम की हिदायत दी गई है, लेकिन असली मार उन दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ी है जिनकी रसोई हर रोज की कमाई से जलती है. सार्वजनिक परिवहन ठप होने और बाजारों में सन्नाटा पसरा होने के कारण हजारों लोग बेरोजगार बैठे हैं. टैक्सी चालकों की कमाई आधी रह गई है और रेस्तरां पूरी तरह बंद हैं.
ईरान-अमेरिका तनाव की मार झेल रही पाक जनता
यह पूरी कवायद अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को रोकने के लिए की जा रही है. फरवरी के अंत से शुरू हुई इस जंग ने पाकिस्तान की कमर पहले ही तोड़ दी है. ईरान द्वारा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को बंद किए जाने से दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है.पाकिस्तान उन देशों में शामिल है जो इस ऊर्जा संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. द गार्जियन से बात करते हुए एक शख्स ने कहा, "हमें ऐसा लगता है कि किसी पिंजरे में कैद दिए गए हैं. यहां हालात बेहद खराब हैं."
अनिश्चितता का माहौल
हैरानी की बात यह है कि इतनी पाबंदियों के बावजूद अभी तक यह साफ नहीं है कि वार्ता कब शुरू होगी. बुधवार सुबह अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उनकी टीम के आने की उम्मीद थी, लेकिन व्हाइट हाउस ने ऐन वक्त पर प्लान बदल दिया. दूसरी तरफ, ईरान के प्रतिनिधिमंडल ने भी फिलहाल इस्लामाबाद आने पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया है.
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