अमेरिका से आए इसी मैसेज के कारण गई थी पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार? सामने आ गई सीक्रेट फाइल

Pakistan cypher controversy: पाकिस्तान से 3 पन्नों का वह खुफिया मैसेज या साइफर सामने आ गया है, जिसके दम पर इमरान खान ने दावा किया था कि उनकी सरकार गिराने के पीछे विदेशी दबाव था.

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Pakistan cypher controversy: इमरान खान ने डोनाल्ड ट्रंप की सरकार पर ही तख्तापलट के दबाव का आरोप लगाया था
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  • पाकिस्तान के तत्कालीन राजदूत और अमेरिकी अधिकारी डोनाल्ड लू के बीच हुई बातचीत का सीक्रेट साइफर सामने आया है
  • साइफर में कहा गया कि अमेरिका को इमरान खान की मॉस्को यात्रा पर नाराजगी थी और सरकार गिराने का दबाव था
  • बातचीत में अफगानिस्तान के मुद्दे और अमेरिका के भारत-पाकिस्तान भेदभाव पर भी चर्चा हुई- दावा
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Pakistan cypher controversy: पाकिस्तान की राजनीति में सालों से चर्चा में रहा एक खुफिया मैसेज यानी “साइफर” अब फिर सुर्खियों में है. अब इस कथित सीक्रेट दस्तावेज की तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें पाकिस्तान के तत्कालीन अमेरिका में राजदूत असद मजीद खान और अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डोनाल्ड लू की बातचीत दर्ज दिखाई दे रही है. यही वह साइफर है जिसे लेकर इमरान खान ने दावा किया था कि उनकी सरकार गिराने के पीछे विदेशी दबाव था. इस साइफर को अमेरिकी न्यूज वेबसाइट- ड्राप साइट ने रिलीज किया है. चलिए आपको इस साइफर की 10 सबसे बड़ी बात बताते हैं.

  1. इस “सीक्रेट साइफर” में पाकिस्तान के अमेरिका में तत्कालीन राजदूत असद मजीद खान की अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी डोनाल्ड लू से हुई मुलाकात का रिकॉर्ड है. डोनाल्ड लू उस समय अमेरिका के “असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर साउथ एंड सेंट्रल एशिया” थे. मुलाकात 7 मार्च 2022 को हुई थी और इसका संदेश पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय इस्लामाबाद भेजा गया. इसी सीक्रेट मैसेज को साइफर कहा गया.
  2. बातचीत की शुरुआत में डोनाल्ड लू ने रूस-यूक्रेन संकट पर पाकिस्तान की नीति पर सवाल उठाए. साइफर के अनुसार उन्होंने कहा कि “अमेरिका और यूरोप में लोग समझ नहीं पा रहे कि पाकिस्तान इतना आक्रामक तटस्थ रुख क्यों अपना रहा है.” उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी प्रशासन को लग रहा है कि यह नीति सीधे प्रधानमंत्री इमरान खान की है.
  3. साइफर में लिखा है कि डोनाल्ड लू ने पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि इमरान खान की नीति इस्लामाबाद की मौजूदा राजनीतिक स्थिति से जुड़ी हुई है और प्रधानमंत्री “पब्लिक फेस” दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. इसके जवाब में पाकिस्तानी राजदूत असद मजीद खान ने कहा कि पाकिस्तान की यूक्रेन नीति कई सरकारी संस्थाओं के बीच सलाह-मशविरे के बाद तय हुई थी.
  4. असद मजीद खान ने डोनाल्ड लू से पूछा कि क्या अमेरिका की नाराजगी संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पाकिस्तान के वोटिंग से दूर रहने की वजह से है. इस पर डोनाल्ड लू ने साफ कहा कि असली वजह प्रधानमंत्री इमरान खान की मॉस्को (रूस की राजधानी) यात्रा है. उन्होंने कहा, “अगर प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सफल हो जाता है तो वॉशिंगटन में सब माफ कर दिया जाएगा, वरना आगे मुश्किलें बढ़ सकती हैं.” इसी बात के दम पर इमरान खान ने आरोप लगाए थे कि उनकी सरकार को गिराने के लिए अमेरिका का दबाव था.
  5. साइफर के अनुसार डोनाल्ड लू ने यह भी कहा कि अगर इमरान खान सत्ता में बने रहते हैं तो अमेरिका और यूरोप दोनों में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का “अलगाव” बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि मॉस्को यात्रा को वॉशिंगटन में एक व्यक्तिगत राजनीतिक फैसला माना जा रहा है.
  6. पाकिस्तानी राजदूत असद मजीद खान ने जवाब में कहा कि इमरान खान की रूस यात्रा कई सालों से योजना में थी और जब प्रधानमंत्री मॉस्को जा रहे थे, तब तक रूस ने यूक्रेन पर हमला शुरू नहीं किया था. उन्होंने कहा कि यह यात्रा सिर्फ द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के लिए थी और इसे रूस के समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. ध्यान रहे कि फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण शुरू करने के ठीक समय पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान मॉस्को के दौरे पर थे. इसी बात से अमेरिका नाराज था.
  7. साइफर के अनुसार इस बातचीत में अफगानिस्तान का मुद्दा भी उठा. असद मजीद खान ने कहा कि पाकिस्तान को डर है कि यूक्रेन संकट की वजह से अफगानिस्तान का मुद्दा पीछे चला जाएगा. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अफगान संघर्ष की भारी कीमत चुकाई है और वहां शांति बनाए रखने के लिए रूस समेत सभी बड़ी शक्तियों के साथ संपर्क जरूरी है.
  8. साइफर में पाकिस्तान की अमेरिका से नाराजगी भी दिखाई देती है. असद मजीद खान ने कहा कि पिछले एक साल से पाकिस्तान को लग रहा था कि अमेरिकी नेतृत्व उनसे दूरी बना रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान से हर मुद्दे पर समर्थन चाहता है, लेकिन कश्मीर जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान की चिंताओं को उतनी अहमियत नहीं देता.
  9. कथित दस्तावेज में भारत का भी जिक्र है. इसके अनुसार असद मजीद खान ने डोनाल्ड लू से कहा कि अमेरिका भारत और पाकिस्तान के साथ अलग-अलग व्यवहार कर रहा है. जवाब में डोनाल्ड लू ने कहा कि अमेरिका-भारत संबंधों को चीन के नजरिये से देखा जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि यूक्रेन से भारतीय छात्रों के निकलने के बाद भारत की रूस नीति में बदलाव आ सकता है.
  10. साइफर का आखिरी हिस्सा आकलन या Assessment है. इस हिस्से में पाकिस्तानी राजदूत असद मजीद खान ने लिखा कि डोनाल्ड लू इतनी कड़ी चेतावनी अमेरिकी सरकार की मंजूरी के बिना नहीं दे सकते थे. उन्होंने कहा कि डोनाल्ड लू ने पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति पर खुलकर बात की, इसलिए पाकिस्तान को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास के सामने औपचारिक विरोध दर्ज कराने पर सोचना चाहिए.

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