सिंधु जल संधि पर फिर रोया पाकिस्तान, कहा- पानी रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं

अप्रैल 2025 में कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था. पाकिस्तान रह-रहकर इसपर रोता रहता है.

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सिंधु जल संधि पर फिर रोया पाकिस्तान
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  • भारत ने पहलगाम अटैक के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित किया था और पाकिस्तान इसपर बार-बार रो रहा है
  • पाकिस्तान का कहना है कि भारत के पास सिंधु जल संधि के स्थगन का कोई अंतरराष्ट्रीय कानूनी आधार नहीं है
  • भारत ने हाल ही में चिनाब नदी पर दुलहस्ती चरण-दो जलविद्युत परियोजना को मंजूरी दी है, जिससे पाकिस्तान बौखलाया है
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आतंकवाद को पालने- पोसने वाले पाकिस्तान को भारत ने एक साथ दो चोट दी थी- पहला ऑपरेशन सिंदूर चलाकर उसके आतंकी ढांचों को नेस्तनाबूद किया था तो वहीं सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था. तबसे भारत से जाने वाली नदियों में पानी की कमी से पाकिस्तान में संकट की स्थिति बन गई है और वह आए दिन इसपर रोता है. आतंकवाद पर कोई कदम नहीं उठाने वाले पाकिस्तान को अब नैतिकता और कानूनी अधिकार का ख्याल आ रहा है. अब सिंधु जल के लिए पाकिस्तान के कमिश्नर सैयद मुहम्मद मेहर अली शाह ने रविवार, 4 जनवरी को कहा कि सिंधु जल संधि (IWT) को "स्थगित" रखने के भारत के दावे का कोई कानूनी आधार नहीं है और यह संधि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पूरी तरह से लागू है.

बता दें कि अप्रैल 2025 में कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था. खीज में पाकिस्तान ने जल बंटवारे को निलंबित करने के किसी भी प्रयास को "युद्ध की कार्रवाई" करार दिया. लेकिन भारत ने साफ साफ कह दिया है कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकता. हाल ही में कश्मीर में चिनाब नदी पर स्थित 260 मेगावाट की दुलहस्ती चरण-दो जलविद्युत परियोजना को भारत ने हरी झंडी दिखा दी है और पाकिस्तान इससे बौखलाया हुआ है.

पाकिस्तानी चैनल, जियो न्यूज के कार्यक्रम 'जिरगा' में बोलते हुए, सैयद मुहम्मद मेहर शाह ने कहा: "जहां तक ​​संधि को स्थगित रखने का सवाल है, 'स्थगन' शब्द को अंतरराष्ट्रीय संधि कानून के तहत मान्यता नहीं है. यह एक गढ़ा हुआ शब्द है, क्योंकि हमारा मानना ​​है कि भारत यह समझता है कि वह संधि को निलंबित, भंग या समाप्त नहीं कर सकता है. इसलिए उसने यह शब्द गढ़ा है."

उन्होंने कहा, "इससे निपटने के लिए पाकिस्तान सावधानीपूर्वक प्रयास कर रहा है और जो भी कदम उठाए जा रहे हैं वे औपचारिक हैं." भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की पाकिस्तान के हिस्से के पानी के प्रवाह को रोकने की धमकी के बारे में, शाह ने कहा: "पाकिस्तान के पानी को रोकने या आंशिक रूप से रोकने के लिए कोई जगह नहीं है. यह नैतिक मानकों के भी खिलाफ है."

शाह ने कहा है, "अब तक, चिनाब, झेलम और सिंधु को प्राकृतिक पैटर्न में पानी मिल रहा है. लेकिन 24 अप्रैल, 2025 के बाद से, भारत ने तीन ऐसे एपिसोड बनाए हैं, जिन्हें हमने उठाया - दो बार मई में और एक बार दिसंबर में - जब उन्होंने पानी का प्रवाह बढ़ाया और फिर कुछ दिनों के लिए इसे कम कर दिया."

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