परमाणु हथियारों वाले पाक पर भारी तालिबान! गुरिल्ला युद्ध में माहिर लड़ाकों से क्यों थर्राती है मुनीर की फौज

Pakistan- Afghanistan War: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने महीनों के संघर्ष के बाद अफगानिस्तान के खिलाफ "खुले युद्ध" की घोषणा कर दी है. दोनों एक दूसरे पर हमला कर रहे हैं.

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Pakistan- Afghanistan War: पाकिस्तान और अफगानिस्तान में फिर छिड़ी जंग
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  • अफगानिस्तान के तालिबान ने डूरंड रेखा पर जवाबी कार्रवाई में 55 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया है
  • पाकिस्तान ने तालिबानी हमलों के जवाब में काबुल और कंधार को निशाना बनाकर ऑपरेशन गजब लिल-हक चलाया है
  • तालिबान की मुख्य ताकत गुरिल्ला युद्ध रणनीति और स्थानीय भूगोल की गहरी समझ में निहित है
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Pakistan- Afghanistan War: अफगानिस्तान और तालिबान के बीच एकबार फिर जंग शुरू हो गई है. अफगानिस्तान को चलाने वाली तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि डूरंड रेखा पर की गई जवाबी कार्रवाई में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए. जबकि पाकिस्तान ने कहा है कि दोनों देशों के बीच खुली जंग शुरू हो गई है. उसने तालिबानी हमले के जबाव में ऑपरेशन 'गजब लिल-हक' चलाया है और इस हवाई हमले में उसने काबुल और कंधार को निशाना बनाया है. पिछले कुछ महीनों में दोनों पड़ोसी देशों के रिश्ते बहुत खराब हो गए हैं. अक्टूबर में हुई लड़ाई में दोनों तरफ 70 से ज्यादा लोग मारे गए थे. उसके बाद से ज्यादातर जमीनी सीमा रास्ते बंद हैं.

सवाल है कि एक तरफ परमाणु हथियार से लैस पाकिस्तान की सेना है तो दूसरी तरफ मामूली रक्षा बजट वाले तालिबान के लड़ाके- सैन्य ताकत में इतना फासला होने के बावजूद तालिबान ने मुनीर की सेना को चोट कैसे दे देता है. पाकिस्तान उसे चाहकर भी कंट्रोल क्यों नहीं कर पाता? चलिए समझते हैं 

असल में, ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2025 के मुताबिक तालिबान के नियंत्रण वाले अफगानिस्तान की सैन्य ताकत विश्व रैंकिंग में 118वें स्थान पर है. 1990 के दशक में धार्मिक छात्रों के एक छोटे से समूह के तौर पर उभरा तालिबान, 2021 में काबुल पर कब्जा करने के बाद अब एक संगठित सेना के रूप में बदल चुका है. कुछ रिपोर्टों के अनुसार, तालिबान शासित अफगानिस्तान के पास लगभग 1.10 से 1.50 लाख सक्रिय सैनिक, करीब 1 लाख रिजर्व फोर्स, लगभग 14,000 करोड़ रुपये का रक्षा बजट, हल्के हथियार, रॉकेट, तोपखाना और कुछ अमेरिकी हथियारों का भंडार मौजूद है. हालांकि, लड़ाकू विमान और नौसेना का अभाव इसकी सबसे बड़ी कमजोरी माना जाता है, जबकि गुरिल्ला युद्ध इसकी प्रमुख ताकत है.

गुरिल्ला वॉर में माहिर तालिबान के लड़ाके

तालिबान के पास अत्याधुनिक हथियार सीमित हैं, लेकिन उनकी असली शक्ति गुरिल्ला रणनीति में छिपी है. इस पद्धति के तहत वे छोटे-छोटे समूहों में छिपकर अचानक हमला करते हैं. पहाड़ी क्षेत्रों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का लाभ उठाकर वे विरोधी को चौंकाने में सक्षम होते हैं. इसलिए, भले ही उनकी सैन्य ताकत आकार में पाकिस्तान की सेना से छोटी हो, लेकिन स्थानीय भूगोल की गहरी समझ और गुरिल्ला युद्ध कौशल के कारण वे कड़ी चुनौती दे सकते हैं. सीमा क्षेत्रों में रहने वाला पश्तून समुदाय भी उन्हें रसद और अन्य सहयोग प्रदान करता है. जरूरत पड़ने पर उनकी रिजर्व फोर्स तेजी से सक्रिय हो जाती है.

ग्लोबल फायरपावर 2025 में पाकिस्तान की सेना 12वें स्थान पर है, जबकि अफगानिस्तान काफी पीछे है. इसके बावजूद, सीमा पर जारी टकराव ने दोनों देशों के रिश्तों में तनाव को खतरनाक स्तर तक पहुंचा दिया है. यह संघर्ष डूरंड लाइन के आसपास केंद्रित है, जो दोनों देशों के बीच विवादित सीमा मानी जाती है. विशेषज्ञों का आकलन है कि यदि स्थिति पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ सकता है.

डूरंड लाइन अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच लगभग 2,640 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है. इसकी स्थापना 1893 में ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव मोर्टिमर डूरंड और अफगान शासक अब्दुर रहमान खान के बीच हुए एक समझौते के तहत की गई थी.

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