'हमारी उंगलियां अभी भी ट्रिगर पर हैं', लेबनान पर हुए हवाई हमले के बाद ईरान के राष्ट्रपति की चेतावनी

ईरान का रुख तब से ही बदलने लगा था जब अमेरिका से सीजफायर होने के बाद ही ईरान की रिफाइनरी पर हमला किया गया था. इस हमले के बाद ईरान ने यूएई और कुवैत पर भी जवाबी हमला बोला था. इसके बाद ही ईरान की नेवी ने कहा था कि होर्मजु में जो भी जहाज खड़े हैं वो बगैर हमारी अनुमति के यहां से नहीं जा सकते.

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ईरान के राष्ट्रपति ने फिर दी चेतावनी
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  • ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने लेबनान पर हमलों को लेकर अपनी निरंतर समर्थन की प्रतिबद्धता दोहराई है
  • ईरान ने होर्मुज जलसंधि में जहाजों को बिना अनुमति गुजरने पर गंभीर कार्रवाई की चेतावनी दी है
  • इजरायल ने लेबनान में संघर्षविराम के 24 घंटे के भीतर सबसे भीषण हमले में 254 लोगों को मार डाला
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ईरान ने लेबनान पर हमला करने वाले देशों को एक बार फिर चेतावनी दी है. ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने कहा है कि ईरान अपने लेबनानी भाई-बहनों को कभी नहीं छोड़ेगा. लेबनान में इज़रायल का फिर से घुसपैठ करना, शुरुआती संघर्ष-विराम समझौते का खुला उल्लंघन है. यह धोखेबाज़ी और संभावित समझौतों के प्रति प्रतिबद्धता की कमी का एक खतरनाक संकेत है. इन हरकतों का जारी रहना बातचीत को बेमानी बना देगा. हम ये एक बार फिर बता देना चाहते हैं कि अभी भी हमारी उंगलियाँ ट्रिगर पर ही हैं.

ईरान का रुख तब से ही बदलने लगा था जब अमेरिका से सीजफायर होने के बाद ही ईरान की रिफाइनरी पर हमला किया गया था. इस हमले के बाद ईरान ने यूएई और कुवैत पर भी जवाबी हमला बोला था. इसके बाद ही ईरान की नेवी ने कहा था कि होर्मजु में जो भी जहाज खड़े हैं वो बगैर हमारी अनुमति के यहां से नहीं जा सकते. अगर किसी ऐसा किया तो हम उसे वहीं उड़ा देंगे. ईरान की ये धमकी उस वक्त आई थी जब अमेरिका के साथ सीजफायर के 12 घंटे का ही वक्त बीता था.अमेरिकी अखबार ने ईरान की इन धमकियों की बात ही है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कहा था कि ईरान की नेवी ने होर्मुज में फंसे जहाजों से कहा है कि यहां से गुजरने के लिए उन्हें अभी भी ईरान से इजाजत लेने की जरूरत है. इन जहाजों को रेडियो के जरिये ये मैसेज दिया गया है.

30 साल में सबसे भीषण हमला

आपको बता दें कि अमेरिका और ईरान में संघर्षविराम के बीच लेबनान में इजरायल ने सबसे बड़ा हमला बोला है. संघर्षविराम के 24 घंटों के भीतर इस हमले में 254 लोग मारे गए हैं और 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. यह इजरायल का लेबनान में 30 साल का सबसे भीषण हमला है. इजरायल का दावा है कि वो लेबनान में ईरान समर्थित लड़ाकों के ठिकानों को निशाना बना रहा है.  NDTV ने लेबनान से ग्राउंड रिपोर्ट में वहां के भयावह हालात बयां किए हैं. 

इजरायली सेना ने 10 मिनट के भीतर 100 से अधिक हवाई हमले किए.बेरूत और दक्षिण लेबनान के अस्पतालों में सैकड़ों घायल इलाज के लिए जूझ रहे हैं. सिविल सिक्योरिटी के अनुसार, हमलों में 250 से ज्यादा लोगों की मौत और 1100 से अधिक घायल हैं. मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है.कई लोग अभी भी गंभीर हालत में हैं.बचाव दल अभी भी लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं. ध्वस्त हुईं इमारतों के मलबे के नीचे फंसे लोगों तक पहुंचने में बचाव दल जुटे हैं. संघर्षविराम के बीच लेबनान में सबसे पहले बड़ा हमला साइदा शहर में हुआ, जहां आठ लोग मारे गए और 22 लोग घायल हुए. बालबेक शहर में जनाजे को टारगेट किया गया, जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई.

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आवासीय इलाकों में ज्यादा नुकसान

लेबनान में अधिकांश हमले घनी आबादी वाले इलाकों को निशाना बनाकर किए गए हैं, जिससे भारी नुकसान हुआ और कई लोगों की जान गई. ऊंची इमारतों के मलबे में दबी जिंदगियों को खोजना मुश्किल हो रहा है. कई स्थानों पर बचाव दल और नागरिक सुरक्षा दल को घायलों तक पहुंचने के लिए मलबा हटाने का काम कर रहे हैं. इजरायली सेना ने कहा कि इस अभियान में 50 लड़ाकू विमानों ने भाग लिया और हिजबुल्ला के ठिकानों पर 100 से अधिक हमले किए गए. बेरूत का वो इलाका भी भीषण विस्फोटों से हिल गया, जहां पारंपरिक रूप से हिजबुल्ला की पैठ नहीं रही है.

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