- ईरान ने युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल व्यापार प्रभावित हुआ है
- इस रास्ते के बंद होने से मिडिल ईस्ट से भारत आने वाला कच्चा तेल और गैस की सप्लाई रुक गई है
- ईरान ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका, इजरायल और यूरोप के जहाजों के लिए बंद किया गया है
अमेरिका-इजरायल के साथ जंग के बीच ईरान ने समुद्री व्यापार के दुनिया के सबसे व्यस्त मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद कर रखा है. इसकी वजह से अन्य देशों के साथ-साथ भारत में भी तेल और गैस की सप्लाई रुक गई है. हालांकि ईरान के ताजा बयान को भारत के लिए राहत के संकेत की तरह देखा जा रहा है. उम्मीद जताई जा रही है कि इस रास्ते से भारत के लिए तेल-गैस की सप्लाई शुरू हो सकती है.
युद्ध के बीच अटके हैं सैकड़ों जहाज
गौरतलब है कि हॉर्मुज स्ट्रेट को दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी की तरह माना जाता है क्योंकि वैश्विक स्तर पर समुद्र के रास्ते होने वाले कुल तेल व्यापार का पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. ये पहली बार है, जब मालवाहक जहाजों के लिए इस रास्ते को पूरी तरह ठप कर दिया गया है. बड़ी संख्या में तेल और गैस लदे जहाज दुबई और कुवैत के पास समुद्र में खड़े हैं और ईरान के रास्ता खोलने का इंतजार कर रहे हैं.
IRGC के बयान से जगी उम्मीदें
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने ताजा बयान में कहा है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के आने-जाने को कंट्रोल करने का ईरान के पास अधिकार है. अंतरराष्ट्रीय कानून और संबंधित नियमों के तहत युद्धकाल में ये अधिकार हमें दिया गया है. आईआरजीसी ने कहा कि इस रास्ते को केवल अमेरिका, इजरायल, यूरोप और उनके सहयोगियों के लिए बंद किया गया है.
'US-यूरोप का जहाज दिखा तो करेंगे हमला'
ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका या उसके समर्थकों का कोई भी जहाज इस जलमार्ग में नजर आया तो उसे निश्चित रूप से निशाना बनाया जाएगा. ईरान ने इससे पहले सिर्फ चीन के झंडे वाले जहाजों को ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आने-जाने की इजाजत देने की बात कही थी, लेकिन अब इस नए बयान से भारत जैसे देशों के लिए भी उम्मीदें बढ़ गई हैं.
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भारत में गहरा रहा तेल-गैस का संकट
भारत के लिए यह इसलिए भी अहम है क्योंकि वह अपनी जरूरत का 40 फीसदी कच्चा तेल और लगभग 85-90 पर्सेंट एलपीजी इसी रास्ते के जरिए मिडिल ईस्ट से इंपोर्ट करता है. हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से भारत को तेल और गैस की सप्लाई में भारी कमी आई है. ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बंद किए जाने के बाद कतर ने गैस का उत्पादन रोक दिया है. बहुत से जहाज रास्ते में अटके हुए हैं. भारत के पास वैसे तो तेल और गैस का रिजर्व कोटा है, लेकिन गैस का संकट गहरा सकता है.
अमेरिका-रूस जैसे विकल्पों पर विचार
भारत गैस की 195 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर पर डे (mmscmd) गैस की खपत आयात के जरिए ही पूरा करता है. अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने और कतर के उत्पादन रोकने से 60 mmscmd गैस का संकट खड़ा हो गया है. भारत की मंगलौर रिफाइनरी को अपनी कई यूनिटें बंद करनी पड़ी हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत ने तेल के अन्य विकल्पों पर काम शुरू कर दिया है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी लगातार अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी और ओपेक देशों के संपर्क में हैं. भारत ने अमेरिका से तेल और कुकिंग गैस का इंपोर्ट बढ़ाया है. रूस जैसे अन्य देशों से आयात बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है. इसके अलावा खाड़ी देशों से आने वाले जहाजों की समुद्री सुरक्षा और इंश्योरेंस के लिए अमेरिका से भी बातचीत चल रही है.












