- H-1B वीजा के लिए शुक्रवार से 'रैंडम लॉटरी' खत्म करके 'वेटेड सिलेक्शन' सिस्टम लागू हो रहा है
- नए नियमों से सीनियर और मोटी सैलरी वाले प्रोफेशनल्स को एच-1बी वीजा में तवज्जो दी जाएगी
- वीजा में बदलाव का ज्यादा असर उन फ्रेशर्स पर होगा जो करियर की शुरुआत में अमेरिका जाना चाहते हैं
अमेरिका जाकर नौकरी करने का सपना देख रहे भारतीयों को तगड़ा झटका लगने वाला है. H-1B वीजा नियमों में आमूलचूल बदलाव शुक्रवार 27 फरवरी 2026 से लागू हो रहे हैं. इससे दशकों से चला आ रहा अमेरिका का 'रैंडम लॉटरी' सिस्टम खत्म हो जाएगा और उसकी जगह 'वेटेड सिलेक्शन' आ जाएगा. आसान भाषा में बताएं तो अब अमेरिका का वीजा किस्मत से नहीं बल्कि मोटी सैलरी से तय होगा. इसका सीधा असर एंट्री लेवल के या कम सैलरी वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियरों और आईटी प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा. H-1B में होने जा रहे बदलाव पर एक नजर डालते हैं.
ट्रंप प्रशासन जारी कर चुका फाइनल रूल
पिछले साल 29 दिसंबर को अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने एच-1बी वीजा कैप सिलेक्शन प्रोसेस को लेकर फाइनल रूल जारी किए थे. कहा गया था कि वित्त वर्ष 2027 के ये नियम 27 फरवरी 2026 से लागू होंगे. एच-1बी वीजा अमेरिकी कंपनियों को टेक्निकल या कुछ खास क्षेत्रों में कुशल विदेशी प्रोफेशनल्स को यूएस ले जाकर नौकरी पर रखने की अनुमति देता है. एच-1बी वीजा का बड़ा हिस्सा भारतीयों को मिलता रहा है.
कम सैलरी वालों की राह मुश्किल
एच-1बी वीजा लॉटरी सिस्टम में बदलाव का सबसे गहरा असर उन युवाओं और फ्रेशर्स पर पड़ेगा, जो करियर की शुरुआत में अमेरिका जाने का सपना देखते हैं. एच-1बी वीजा के नए नियमों के मुताबिक, लेवल-1 यानी एंट्री लेवल या कम सैलरी और कम अनुभव वाले प्रोफशनल्स को चयन प्रक्रिया में कम प्राथमिकता मिलेगी, जबकि लेवल-3 और 4 यानी अनुभवी और उच्च वेतन वाले प्रोफेशनल्स को वीजा मिलने की संभावना ज्यादा होगी.
स्टार्टअप्स पर भी पड़ेगा असर
इसका असर छोटे स्टार्टअप्स पर भी पड़ेगा क्योंकि वो अक्सर छोटे कर्मचारियों को बहुत अधिक सैलरी नहीं दे पाते. अब उनके लिए विदेशी प्रतिभाओं को अमेरिका में नौकरी देना महंगा और अनिश्चित हो जाएगा. फ्रेशर्स की एंट्री की संभावना कम हो जाएगी. अमेरिका फिलहाल 65 हजार एच-1बी वीजा हर साल जारी करता है. अमेरिकी संस्थानों से उच्च शिक्षा हासिल करने वालों के लिए 20 हजार वीजा का अतिरिक्त प्रावधान है.
एक लाख डॉलर की फीस का नियम लागू
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उद्घोषणा के तहत लागू किए गए नियमों में चौंकाने वाली बात एक लाख डॉलर (करीब 83 लाख रुपये) का अतिरिक्त शुल्क भी है. नए आवेदनों के लिए यह अनिवार्य फीस कंपनियों की जेब पर भारी बोझ डालेगी. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की रक्षा और देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है.
किन्हें नहीं देनी होगी 1 लाख डॉलर फीस?
12 फरवरी 2026 को भारत सरकार के विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने राज्यसभा में इसे लेकर जानकारी दी थी. उन्होंने बताया था कि किन लोगों को एक लाख डॉलर का शुल्क नहीं देना होगा.
- जिनके पास पहले से एच-1बी वीजा है, उन पर एक लाख डॉलर की फीस नहीं लगेगी.
- जिन्होंने 21 सितंबर 2025, पूर्वी डेलाइट समय 12:01 बजे से पहले एच-1बी याचिकाएं दायर की हैं.
- जिन्होंने एच-1बी वीजा रिन्यू कराने के लिए आवेदन कर रखा है.
- जिनके पास एच-1बी वीज़ा है और वह अमेरिका में और बाहर यात्रा कर रहे हैं.
- एफ-1 छात्र जो अमेरिका में पहले से रह रहे हैं और स्थिति परिवर्तन के कारण एच-1बी स्टेटस में जा रहे हैं.
भारतीय आईटी कंपनियां हर साल हजारों की संख्या में एंट्री लेवल प्रोफेशनल्स को अमेरिका भेजती हैं. ऐसे में ट्रंप प्रशासन के नए फैसले से सबसे ज्यादा वही प्रभावित होंगी. भारी फीस और मोटी सैलरी की शर्तों के कारण इन कंपनियों के लिए भर्ती के अपने पुराने मॉडल पर काम करना मुश्किल हो जाएगा.













