नेपाल-भारत बॉर्डर के सिर्फ एक चेकप्वाइंट पर फंसे 600 कंटेनर! भारतीय सामान पर टैक्स लगा कैसे फंसी बालेन सरकार

Nepal New customs duty Law: भारत की सीमा के पास रहने वाले लोगों और व्यापारियों के विरोध को देखते हुए नेपाल सरकार ने भारतीय सामान पर टैक्स लगाने के नियम में थोड़ी ढील दे दी है. यहां विस्तार से जानिए.ms duty Law:

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Nepal New customs duty Law: भारतीय सामान पर टैक्स लगाना नेपाल सरकार के लिए कर गया बैकफायर
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  • नेपाल सरकार ने भारत से लाए गए 100 नेपाली रुपए से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम ड्यूटी देना अनिवार्य किया है
  • नया नियम लागू होने के बाद वीरगंज के प्रमुख सीमा पार चेकप्वाइंट पर 600 से अधिक कंटेनर फंसे हुए हैं
  • सरकार ने लोगों और व्यापारियों के विरोध के बाद कस्टम चेकप्वाइंट पर खुद से एमआरपी की घोषणा की सुविधा दी है
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Nepal New customs duty Law: नेपाल की नई-नवेली पीएम बालेन शाह की सरकार ने अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए नया नियम बनाया. लेकिन उसका यह दांव पूरी तरह बैकफायर कर गया है. सरकार ने नया कस्टम नियम बनाया है कि अगर नेपाल का कोई आदमी भारत से 100 नेपाली रुपए (एनपीआर) से ज्यादा का सामान खरीदकर साथ ला रहे हैं तो उसे कस्टम ड्यूटी देना पड़ेगा. इसके लिए अनिवार्य किया गया कि हर सामान पर उसकी कीमत (MRP) लिखी हो. लेकिन यहीं पर सरकार फंस गई है. भारत में जाने और आने के लिए बीरगंज नेपाल का सबसे प्रमुख भूमि क्रॉसिंग पॉइंट है और केवल यहीं पर 600 कंटेनर फंसे हुए हैं. यह रिपोर्ट नेपाली न्यूज साइट रातोपाटी ने छापी है.

इस रिपोर्ट के अनुसार बालेन सरकार द्वारा भन्सार बिंदुओं (कस्टम चेकप्वाइंट) पर MRP नियम अनिवार्य करने के बाद से कस्टम चेक की प्रक्रिया प्रभावित हो गई है. कस्टम ड्यूटी चेकप्वाइंट वह स्थान है, जहां विदेश से आने वाले या जाने वाले यात्रियों और उनके सामान की जांच की जाती है.

रातोपाटी की रिपोर्ट के अनुसार वीरगंज भन्सार में ही 600 से अधिक कंटेनर फंसे हुए हैं, जिससे यहां जमा होने वाले राजस्व (टैक्स) पर बुरा असर पड़ रहा है. भन्सार विभाग ने गोदाम में लेबल लगाने की छूट देने का प्रस्ताव रखा था, जिसे प्रधानमंत्री कार्यालय ने अस्वीकार कर दिया है.

कुछ हद तक पीछे हटी बालेन सरकार

नेपाल सरकार ने भारतीय सामान पर टैक्स लगाने के फैसले में थोड़ी ढील दे दी है. बालेन सरकार ने इस नियम के तहत विदेश से लाकर नेपाल में बेचे जाने वाले सभी सामान के पैकेट्स पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) लिखना जरूरी बना दिया है. लेकिन सीमा के पास रहने वाले स्थानी लोगों और व्यापारियों के विरोध- समस्याओं को देखते हुए सरकार ने थोड़ी राहत दी है. पहला कि यह तय किया गया है कि नई व्यवस्था के तहत सामान लेकर आने वाले लोग अब कस्टम चेकप्वाइंट पहुंचने पर वस्तुओं की MRP को लेकर खुद घोषणा कर सकेंगे और क्लियरेंस हासिल कर सकेंगे. दूसरा कि कुछ समय के लिए उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे मटीरियल और जल्द खराब होने वाली वस्तुओं, जैसे जैसे कि फल, सब्जी वगैरा के मामले में एमआरपी नियम में ढील दी जा रही है.

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