- नेपाल के रसुवा और धाडिंग जिलों में भोटेकोशी नदी की बाढ़ से भारी तबाही और 16 लोगों की मौत हुई है
- नेपाल सेना ने सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं
- नेपाल में आई बाढ़ के कारण 384 पर्यटक लापता है, जिनमें 105 भारतीय भी हैं
नेपाल में बुधवार की सुबह अपने साथ एक जबरदस्त बाढ़ लेकर आई. तिब्बत से आए जलसैलाब ने नेपाल के दो जिलों- रसुवा और धाडिंग में जमकर तबाही मचाई. गाड़ियां, सड़कें, पुल, टॉवर... पानी सबको बहा ले गया. अधिकारियों ने बताया कि तिब्बत की ओर से आई बाढ़ सुबह करीब 9 बजे भोटे कोशी नदी में उफान के साथ आई. इससे रसुवा और धाडिंग के साथ-साथ काठमांडू के पास का नुवाकोट जिला भी प्रभावित हुआ है.
अचानक आए इस जलसैलाब के बाद सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के लिए नेपाल की सेना ने 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं. त्रिशूली में मिलिट्री सेंटर को अस्थाई अस्पताल बनाया गया है.
अचानक यह कैसे हुआ? अभी तक इसके बारे में साफ-साफ तो कुछ सामने नहीं आया है. हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि रसुवा में बारिश के कारण तो बाढ़ नहीं आई. उनका मानना है कि तिब्बत की ओर भारी बारिश या एवलांच के कारण ऐसा हुआ है.
नेपाल में बुधवार की सुबह हुआ क्या?
तिब्बत से निकलने वाली भोटेकोशी नदी का पानी सुबह 9 बजे अचानक बढ़ने लगा. देखते-देखते ये सैलाब में बदल गया. एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक सैलाब आता हुआ नजर आ रहा है और अपने साथ सबकुछ बहाता हुआ ले जा रहा है.
सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा है, जो काठमांडू से लगभग 125 किलोमीटर दूर है. बागमती प्रांत के पुलिस प्रवक्ता एसएसपी राजेंद्र प्रसाद धमाला ने 16 शव मिलने की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि रसुवा में 1, नुवाकोट में 9 और धाडिंग में 6 शव मिले हैं.
उत्तरी रसुवा में एक बॉर्डर पोस्ट पर तैनात सेना के 4 जवान लापता हो गए हैं. रसुवा कस्टम ऑफिस के 14 कर्मचारी भी संपर्क के बाहर हैं. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेपाल पुलिस के 32 जवानों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है.
द हिमालयन टाइम्स के मुताबिक, बाढ़ ने नुवाकोट में त्रिशूली बाजार के पास लगभग 60 घरों को बहा दिया है और दो पुलों को भी नुकसान पहुंचा है.
नेपाल टूरिज्म बोर्ड (NTB) ने बताया कि कुल 384 पर्यटक लापता हैं, जिनमें 291 विदेशी हैं. लापता लोगों में 105 भारतीय भी शामिल है.
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आगे ही बढ़ता जा रहा जलप्रलय
बाढ़ भोटेकोशी नदी में आई. यह नदी तिब्बत से निकलती है. नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिविजन ने बताया कि बाढ़ तिब्बत की ओर से सीमा पार कर भोटेकोशी नदी में आ गई और बुधवार दोपहर तक धाडिंग जिले के गल्छी इलाके तक पहुंच गई.
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बाढ़ का पानी निचले इलाकों में रहने वालों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है, क्योंकि भोटेकोशी नदी आगे जाकर त्रिशूली नदी में मिलती है और मध्य नेपाल के कई जिलों तक बढ़ती है.
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अधिकारियों ने त्रिशूली नदी के किनारे रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे खतरे वाले इलाकों और बाजारों को छोड़कर ऊंची जगहों पर चले जाएं.
न बारिश, न बादल फटा.. फिर कैसे?
नेपाल में न तो बारिश हुई, न बादल फटा तो फिर अचानक इतनी बड़ा सैलाब कैसे आ गया? इसका जवाब मिलना बाकी है. लेकिन विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि बाढ़ नेपाल में भारी बारिश के कारण नहीं, बल्कि तिब्बत में ग्लेशियर फटने के कारण आई है.
काठमांडू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और क्लाइमेट रिसर्चर रिजन भक्त कायस्थ ने कंतिपुर से बात करते हुए कहा कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि एक एवलांच ने ल्हेंडे नदी का रास्ता रोक दिया, जिससे भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई.
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कायस्थ ने कहा, 'ऐसी जानकारी है कि नेपाल की तरफ से आए एवलांच ने ल्हेंडे नदी का रास्ता रोक दिया था. उसी समय तिब्बत की तरफ भूकंप भी आया था.
US जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, सुबह 8:37 बजे तिब्बत के इलाके में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया, जो गोसाईंकुंड से लगभग 47 किलोमीटर उत्तर में था.
कायस्थ ने कहा कि यह पता लगाने में कई दिन लग सकते हैं कि क्या कोई ग्लेशियल झील भी फटी थी, क्योंकि अतीत में इसी इलाके में ग्लेशियल झीलें फटी हैं. 8 जुलाई, 2025 को भोटेकोशी नदी में इसी तरह की अचानक बाढ़ आई थी. यह बाढ़ ल्हेंडे नदी में ग्लेशियल झील के फटने के कारण आई.
उन्होंने भारी बारिश को मुख्य कारण मानने से इनकार करते हुए कहा कि बाढ़ के अचानक आने से संकेत मिलता है कि नदी के ऊपरी हिस्से में किसी रुकावट के अचानक टूटने से पानी का बहाव तेजी से बढ़ा. उन्होंने कहा, 'यह कोई सामान्य बाढ़ नहीं थी. बाढ़ के स्वरूप को देखते हुए ऐसा लगता है कि पानी का बहाव अचानक तेजी से बढ़ा.'
हाइड्रोलॉजी और मौसम विभाग ने भी कहा कि नेपाल या तिब्बत में कहीं ग्लेशियल झील के फटने की घटना हो सकती है.
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क्या भारत पर भी है खतरा?
तिब्बत से भोटेकोशी नदी निकलती है. वहां इसे ल्हेंडे नदी कहा जाता है. आगे चलकर ये नदी त्रिशूली नदी में मिलती है. सहायक नदियों के जरिए भोटेकोशी आगे चलकर गंडक नदी से भी मिलती है जो आगे बिहार में आती है. इसलिए बिहार में भी भारी अलर्ट है.
बाढ़ के खतरे को देखते हुए बिहार सरकार ने अधिकारियों को अलर्ट रहने और नदियों के जलस्तर पर नजर रखने को कहा है. प्रशासन को कहा गया है कि पानी बढ़ने की स्थिति में लोगों को समय पर जानकारी दी जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जाए.
बिहार में इस समय पहले से ही कई नदियों का पानी बढ़ा हुआ है. गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक और घाघरा जैसी नदियों के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है. ऐसे में नेपाल से आने वाला अतिरिक्त पानी चिंता बढ़ा सकता है. खासकर उत्तर बिहार के उन जिलों पर नजर है जहां नेपाल से निकलने वाली नदियां सीधे पहुंचती हैं.
फिलहाल घबराने जैसी बात नहीं है, लेकिन अगले 24 से 48 घंटे काफी अहम हैं. अगर नेपाल से आने वाले पानी से गंडक और दूसरी नदियों में पानी बढ़ता है तो बिहार के सीमाई इलाकों में बाढ़ का खतरा हो सकता है.
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