नेपाल में बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ से तबाही जारी है. विशेषज्ञ इसे बारिश या बादल फटने की वजह से आई बाढ़ नहीं मान रहे हैं. शुरुआती आकलन में बाढ़ की वजह एवलांच और भूकंप को माना जा रहा है. फिलहाल भोटेकोशी नदी से निकली बाढ़ लगातार आगे बढ़ रही है और एक-एक करके नेपाल के कई हिस्से इसकी चपेट में आ रहे हैं. नेपाल से सटे बिहार में भी अलर्ट है और अगल 24 से 48 घंटे काफी अहम माने जा रहे हैं.
अचानक आई बाढ़ में कम से कम 16 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है. पुलिस के मुताबिक, रसुवा में 1, नुवाकोट में 9 और धाडिंग में 6 शव मिले हैं.
नेपाल की जिस भोटेकोशी नदी में उफान आया है, वह असल में तिब्बत से निकलती है जहां उसे ल्हेंडे नदी कहते हैं. यही भोटेकोशी नदी आगे जाकर त्रिशूली नदी में मिलती है. सहायक नदियों के जरिए भोटेकोशी नदी गंडक नदी में भी मिलती है जो बिहार से भारत में आती है.
अचानक आई इस बाढ़ ने किस हद तक तबाही मचाई है? इसकी गवाही वहां से आ रही तस्वीरें और वीडियो दे रहे हैं. लेकिन भोटेकोशी नदी से शुरू हुआ ये जलप्रलय कैसे-कैसे आगे बढ़ता गया? समझते हैं.
23 मिनट में मची तबाही!
सुबह 8:37 बजे भूकंप: यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, तिब्बती इलाके में बुधवार सुबह 8 बजकर 37 मिनट पर 4.4 तीव्रता का एक भूकंप आया. भूकंप का केंद्र गोसाईकुंड से 47 किलोमीटर दूर था.
- सुबह 9:00 बजे तबाही: यह वह समय था जब भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई. न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, इस समय नदी का पानी गांव, सड़क और हाइड्रोपावर इन्फ्रास्ट्रक्चर को बहाने लगी.
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भूकंप का कनेक्शन क्या?
नेपाल में बुधवार को आई तबाही की अब तक कोई ठोस वजह पता नहीं चली है. हालांकि, शुरुआती आकलन में भूकंप और एवलांच को इसकी वजह माना जा रहा है.
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बुधवार को संसद में बताया कि शुरुआती रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि इलाके में आए भूकंप से एवलांच हो सकता है और बाढ़ आ सकती है.
काठमांडू स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट से जुड़े कियांगगोंग झांग ने रॉयटर्स से कहा कि नेपाली हिस्से में ल्हेंडे खोला नदी में बर्फ और चट्टानों का एवलांच इसकी वजह थी, लेकिन इसका कारण अभी भी कन्फर्म नहीं है.
क्लाइमेट रिसर्च ग्रुप के स्पेशलिस्ट शाश्वत सान्याल ने AP से कहा, 'ल्हेंडे खोला में चौदह महीनों में दो बार बाढ़ आई है. इस बार बाढ़ की वजह नेपाल की तरफ एक ग्लेशियर से हुआ बर्फ़ और चट्टानों का एवलांच था, जिसने नदी का रास्ता रोक दिया और फिर अचानक पानी का तेज बहाव नीचे की तरफ आया.'
काठमांडू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और क्लाइमेट रिसर्चर रिजन भक्त कायस्थ ने भी कंतिपुर से बात करते हुए कहा कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि एक एवलांच ने ल्हेंडे नदी का रास्ता रोक दिया, जिससे भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई.
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कैसे आगे बढ़ती गई तबाही?
सुबह करीब 9 बजे भोटेकोशी नदी में उफान आया और उसके बाद पानी का सैलाब आगे बढ़ता गया. सबसे पहले तबाही रसुवा जिले में आई. यहां के तिमुरे और स्याप्रुबेसी में सबसे ज्यादा तबाही मची. दोनों चीन-नेपाल सीमा के करीब है.
रसुवा में हेल्थ वर्कर तुला बहादुर बीके ने रॉयटर्स को बताया, 'हम जहां भी देखते हैं, तबाही ही नजर आती है. नदी के किनारे बसे इलाके पूरी तरह बह गए हैं. मेरे अपने ही पांच रिश्तेदार लापता हैं.'
इसके बाद भोटेकोशी नदी का सैलाब त्रिशूली नदी में भी बाढ़ लाया. भोटेकोशी नदी आगे जाकर त्रिशूली नदी में मिलती है. त्रिशूली नदी में बाढ़ के कारण सबसे ज्यादा तबाही नुवाकोट जिले में मची.
नुवाकोट में दर्जनों बहुमंजिला इमारतें, ट्रक और वैन भारी मात्रा में कीचड़ के नीचे दब गए. अधिकारियों ने नेपाल के कई जिलों में रहने वाले लोगों को चेतावनी दी और उन्हें भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदियों के किनारों से दूर रहने की अपील की है.
द हिमालयन टाइम्स के मुताबिक, बाढ़ ने नुवाकोट में त्रिशूली बाजार के पास लगभग 60 घरों को बहा दिया है और दो पुलों को भी नुकसान पहुंचा है.
नेपाल में अचानक आई इस बाढ़ की चपेट में अब तक कई जिले आ चुके हैं. सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा, धाडिंग और नुवाकोट है. इनके अलावा गोरखा, चितवा और तनाहुन में भी नदी किनारों और निचले इलाकों में खतरा बना हुआ है.
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नेपाल के सभी जिलों में हाई अलर्ट
नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिविजन ने सभी 28 जिलों को हाई अलर्ट पर रखा है. हालांकि, अभी कोशी, नारायणी, बागमती, करनाली और महाकाली जैसी प्रमुख नदियों में पानी का स्तर अभी भी खतरे के निशान से नीचे है.
लेकिन हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग से संकेत मिलता है कि अगले तीन दिनों में कोशी और नारायणी नदी बेसिन में पानी के बहाव में लगातार और काफी बढ़ोतरी होगी. गंडकी और लुंबिनी प्रांतों की छोटी नदियों में कल और परसों पानी के स्तर में अचानक और तेजी से बढ़ोतरी होने की संभावना है.
अधिकारियों का कहना है कि पानी के अचानक बहाव से स्थानीय स्तर पर बाढ़ आ सकती है और शहरों में जल-जमाव हो सकता है, खासकर छोटी सहायक नदियों के पास निचले इलाकों में.
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