चांद का चक्कर लगाकर लौट रहे आर्टेमिस-2 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी की एक ऐसी तस्वीर साझा की है जिसने पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध कर दिया है. यह तस्वीर है 'अर्थसेट' की है. जिस तरह हम धरती से सूर्य को ढलते हुए देखते हैं या चांद को ढलते हुए देखते हैं, वैसे ही चांद से पृथ्वी को भी ढलते हुए देखा जा सकता है, इसे ही अर्थसेट कहते हैं.
नासा क्रू की ओर से शेयर की गई तस्वीर में पृथ्वी चंद्रमा के ऊबड़-खाबड़ क्षितिज के पीछे डूबता हुआ दिखाई दे रहा है. ठीक वैसा ही, जैसे हम धरती से सूर्यास्त देखते हैं. यह ऐतिहासिक तस्वीर 1968 के मशहूर 'अर्थराइज' यानी उगती हुई पृथ्वी की फोटो की याद दिलाती है.
नासा में खुशी से नाचने लगे लोग
मंगलवार को जब ये चारों अंतरिक्ष यात्री रीड वाइसमैन, क्रिस्टीना कोच, विक्टर ग्लोवर और जेरेमी हैनसेन धरती की ओर वापस बढ़ रहे थे, तब उन्होंने ह्यूस्टन स्थित मिशन कंट्रोल में वैज्ञानिकों के साथ अपने अनुभव शेयर किए.
करीब सात घंटे तक चंद्रमा का बारीकी से अध्ययन करने के बाद क्रू ने जो कुछ देखा, उसने वैज्ञानिकों को भी झूमने पर मजबूर कर दिया. मिशन की लूनर साइंस लीड केल्सी यंग ने बताया कि जब अंतरिक्ष यात्री अपनी आंखों देखी बता रहे थे तो नासा के इवैल्यूएशन रूम में खुशी की लहर दौड़ गई थी.
क्रू ने बताया कि उन्होंने चांद की सतह पर उल्कापिंडों के टकराने से होने वाली रोशनी की चमक (फ्लैश) देखी और एक दुर्लभ सूर्य ग्रहण के भी गवाह बने. विक्टर ग्लोवर ने अपने अनुभव को लेकर कहा, "शायद इंसानी आंखें वह सब देखने के लिए विकसित ही नहीं हुई हैं, जो हम देख रहे हैं. इसे बयां करना वाकई बहुत मुश्किल है. यह अद्भुत है."
क्रू का पृथ्वी पर बेसब्री से इंतजार
फिलहाल ओरियन कैप्सूल 'फ्री-रिटर्न प्रक्षेपवक्र' पर सवार होकर सुरक्षित रूप से धरती की ओर बढ़ रहा है. अब दुनिया को शुक्रवार का इंतजार है, जब यह कैप्सूल कैलिफोर्निया के तट के पास प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन (लैंड) करेगा.
नासा प्रमुख के मुताबिक, यात्रियों को रिसीव करने वाला जहाज बंदरगाह से निकल चुका है. यह मिशन 2028 में होने वाली अगली मून लैंडिंग की नींव रख रहा है, जहां इंसान एक बार फिर चांद की जमीन पर कदम रखेगा.
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