- ट्रंप सरकार ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ को ईरान में भविष्य के नेता के रूप में देख रही है- रिपोर्ट
- गालिबाफ ने अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत से इनकार किया है
- मोहम्मद बागर गालिबाफ एक रूढ़िवादी राजनेता और आईआरजीसी के पूर्व कमांडर हैं. अभी वे ईरानी संसद के स्पीकर हैं
US Israel War against Iran: क्या अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब किसी भी तरह मिडिल ईस्ट की जंग से किसी भी तरह बाहर आना चाहते हैं? ईरान को 48 घंटे में होर्मुज का रास्ता खोलने या फिर बिजली घरों पर हमले के लिए तैयार रहने का अल्टीमेटम देने के बाद ट्रंप ने यूटर्न मार दिया है. अब उन्होंने दावा किया है कि उनकी कुछ अज्ञात ईरानी अधिकारियों के साथ अच्छी बातचीत हुई है और ईरान डील करना चाहता है. जबकि ईरान का दावा है कि ट्रंप फेक न्यूज फैला रहे हैं और तेल-गैस के मार्केट में फायदा कमाने के लिए झूठे दावा कर रहे हैं. ऐसे में एक खबर आई है कि ट्रंप को ईरान में एक दोस्त दिख रहा है, जिसे वो गद्दी पर बैठा सकते हैं.
पॉलिटिको ने सोमवार को अमेरिकी सरकार के दो अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट दी कि डोनाल्ड ट्रंप की सरकार चुपचाप ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ को एक संभावित पार्टनर, और यहां तक कि भविष्य के नेता के रूप में भी देख रही है. एक प्रशासनिक अधिकारी ने पॉलिटिको से कहा, “वह एक मजबूत विकल्प हैं. वह सबसे ऊपर के विकल्पों में से एक हैं… लेकिन हमें उन्हें परखना होगा और इसमें जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए.”
पहले अधिकारी ने कहा, “हम अभी जांच के चरण में हैं और यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि कौन आगे आ सकता है, कौन आगे आना चाहता है और कौन कोशिश कर रहा है आगे आने की. फिर जैसे ही कोई आगे आएगा, हम उसकी जल्दी से जांच करेंगे, और अगर वे कट्टरपंथी हुए तो हम उन्हें हटा देंगे.”
कौन हैं मोहम्मद बागर गालिबाफ?
मोहम्मद बागर गालिबाफ एक रूढ़िवादी ईरानी राजनेता हैं जिनका सैन्य पृष्ठभूमि भी है. यानी मिलिट्री से आते हैं. वह मई 2020 से ईरान की संसद के स्पीकर हैं. 1961 में जन्मे गालिबाफ ने 1980 में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) में शामिल हुए. ईरान-इराक युद्ध के दौरान वह इसके कमांडरों में से एक बन गए. गालिबाफ चार बार राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन सफल नहीं हुए. 2005 में वह चौथे स्थान पर रहे और 2013 में दूसरे स्थान पर रहे. 2017 में उन्होंने चुनाव से पहले ही अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी और 2024 के जल्दी हुए चुनाव में वह तीसरे स्थान पर रहे.
गालिबाफ पर यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने आईआरजीसी के कमांडर के रूप में अपने पुराने पद का इस्तेमाल करके तेहरान के मेयर रहने के दौरान हुए भ्रष्टाचार के मामलों को छिपाने की कोशिश की.













