ईरान, रूस से लेकर यूरोप तक के लिए अमेरिका का क्या है प्लान, US विदेश मंत्री ने सब कुछ बता दिया

रूबियो ने मध्य पूर्व में दूसरा विमानवाहक पोत भेजने के ट्रंप के फैसले को यह सुनिश्चित करने का प्रयास बताया कि ईरान "हम पर हमला न करे और इससे भी आगे कुछ बड़ा न छेड़े."

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मार्को रूबियो ने कहा कि अगर खामेनेई ट्रंप से मिलना चाहेंगे तो वो जरूर मिलेंगे.

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक इंटरव्यू में चेतावनी दी कि यूरोप के नेताओं को उन परंपराओं और मूल्यों की ओर लौटना होगा, जो वे अमेरिका के साथ साझा करते हैं, साथ ही साथ महाद्वीप के प्रति वाशिंगटन की सोच से सहमत होना होगा. ब्लूमबर्ग न्यूज के प्रधान संपादक जॉन मिकलेथवेट से बात करते हुए रुबियो ने कहा, "हम चाहते हैं कि यूरोप समृद्ध हो क्योंकि हम कई तरह से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, और क्योंकि हमारा गठबंधन बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन यह ऐसे सहयोगियों का गठबंधन होना चाहिए. जो सक्षम हों और अपने अस्तित्व और महत्व के लिए लड़ने को तैयार हों."

रुबियो ने कहा, “हमें आपस में क्या बांधता है? अंततः, यह इस तथ्य पर आधारित है कि हम दोनों एक ही सभ्यता के उत्तराधिकारी हैं, और यह एक महान सभ्यता है. यह एक ऐसी सभ्यता है, जिस पर हमें गर्व होना चाहिए.”

यूरोप से क्या विवाद?

  1. रूबियो का ये इंटरव्यू शनिवार सुबह म्यूनिख  में दिए नाटो सम्मेलन में दिए गए उनके भाषण का ही विस्तार थीं. नाटो सम्मेलन में रूबियो का दिया भाषण उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के एक साल पहले इसी सम्मेलन में दिए गए आक्रामक भाषण की तुलना में अधिक नरम था, हालांकि यह ट्रंप के राष्ट्रवादी संदेश की ओर झुकाव रखता था.
  2. शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने दोधारी संदेश देते हुए पश्चिमी यूरोप के साथ साझा अमेरिकी सुरक्षा और सांस्कृतिक संबंधों का हवाला दिया - माइकल एंजेलो, द रोलिंग स्टोन्स, और उससे भी बेहतर अमेरिकी बीयर. साथ ही, उन्होंने कहा कि यूरोप को बदलना होगा, और कहा कि अमेरिका को पश्चिम के सुनियोजित पतन का केयरटेकर बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है. उन्होंने बड़े पैमाने पर हो रहे मास माइग्रेशन की आलोचना की, और कहा कि ये हमारे समाज को खतरे में डाल रही है.
  3. साक्षात्कार में, रुबियो ने कहा कि वेंस के भाषण से अलग नहीं बोल रहे हैं. वेंस ने यूरोपीय देशों को उनकी अपनी नीतियों से उत्पन्न खतरों के बारे में चेतावनी दी थी. रूबियो ने कहा कि वेंस यूरोप को यह समझाना चाहते थे कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टीम को यह बयान देना क्यों आवश्यक लगा. 

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नाटो में क्या समस्या

ब्लूमबर्ग से बात करते हुए रुबियो ने कहा, "नाटो को बदलना होगा. जब हम यूरोप द्वारा लिए गए के बारे में गंभीर या आलोचनात्मक रुख अपनाते हैं, तो इसका कारण यह है कि हम वास्तव में चिंतित हैं." वेंस के भाषण के बाद से एक वर्ष में अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच तनाव और भी बढ़ गया है, जिसमें टैरिफ विवाद, ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की नई धमकी और पिछले वर्ष के अंत में जारी की गई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति शामिल है.

रूस-यूक्रेन विवाद पर

रूस-यूक्रेन युद्ध के बारे में पूछे जाने पर, रुबियो ने कहा कि उनका मानना ​​है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के युद्ध के उद्देश्य बदल गए हैं और अब वे केवल डोनेट्स्क क्षेत्र के उस 20% हिस्से पर कब्जा करना चाहते हैं, जिस पर उनकी सेनाओं का वर्तमान में कब्जा नहीं है.

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ईरान से क्या युद्ध की तैयारी

रूबियो ने मध्य पूर्व में दूसरा विमानवाहक पोत भेजने के ट्रंप के फैसले को यह सुनिश्चित करने का प्रयास बताया कि ईरान "हम पर हमला न करे और इससे भी आगे कुछ बड़ा न छेड़े."उन्होंने यह कहने से इनकार कर दिया कि क्या अमेरिका ईरान शासन के प्रति अपना धैर्य खो रहा है. उन्होंने कहा कि ट्रंप ईरान के साथ समझौता करना चाहते हैं और उन्होंने ट्रंप द्वारा ईरान के सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला अली खामेनेई से मुलाकात की संभावना भी खुली रखी.

ट्रंप की तारीफ

विदेश मंत्री ने ब्लूमबर्ग से कहा, "दोनों देशों को एक-दूसरे के साथ बातचीत करने की आवश्यकता है - मैं एक ऐसे राष्ट्रपति के अधीन काम करता हूं, जो किसी से भी मिलने को तैयार हैं. मुझे पूरा विश्वास है कि अगर कल अयातुल्ला कहें कि वे राष्ट्रपति ट्रंप से मिलना चाहते हैं, तो राष्ट्रपति उनसे मिलेंगे, इसलिए नहीं कि वे अयातुल्ला से सहमत हैं, बल्कि इसलिए कि वे मानते हैं कि दुनिया में समस्याओं को हल करने का यही तरीका है."

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