- लिथुआनिया ने बेलारूस की ओर से आए गुब्बारों को सुरक्षा जोखिम मानते हुए राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है
- बेलारूस ने लिथुआनिया के हवाई क्षेत्र का कई बार उल्लंघन किया है, जिससे सीमा पर तनाव बढ़ा है
- लिथुआनिया NATO का सदस्य है और यूक्रेन युद्ध में रूस के खिलाफ स्टैंड रखते हुए सुरक्षा उपाय बढ़ा रहा है
यूरोपीय देश लिथुआनिया की सरकार ने मंगलवार, 9 दिसंबर को अपने यहां राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की कर दी. इसके पीछे की वजह भी थोड़ी हटकर है. दरअसरल लिथुआनिया के पड़ोसी मुल्क और रूस के सहयोगी बेलारूस से कई गुब्बारे उड़ाए गए थे जो उड़कर लिथुआनिया पहुंच गया है. इसे लिथुआनिया की सरकार ने अपने देश के सुरक्षा जोखिम माना है क्योंकि बेलारून ने हाल के हफ्तों में कई बार लिथुआनिया के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है.
बेलारूस के नेता सीमा पर जारी तनाव के बीच बातचीत करके मामला सुलझाने को कहा है. उन्होंने कहा है कि कि उनका देश कोई युद्ध नहीं चाहता है.
एक बैलून से फैल गई दहशत
वैसे तो इन गुब्बारों का उपयोग लिथुआनिया में सिगरेट की तस्करी के लिए किया जाता है. लेकिन चूंकि यह बैलून बार-बार बेलारूस की तरफ से आ रहे हैं, लिथुआनिया की सरकार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती. ये आम बैलून नहीं हैं बल्कि मौसम विभाग द्वारा उपयोग किया जाने वाले बैलून हैं.
एपी की रिपोर्ट के अनुसार इन बैलून ने लिथुआनिया को अपने सबसे बड़े एयरपोर्ट को बार-बार बंद करने के लिए मजबूर कर दिया है, जिससे हजारों लोग फंस गए. दरअसल यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के साथ ही NATO गठबंधन में शामिल देश अपने हवाई क्षेत्र में किसी तरह के घुसपैठ को लेकर अलर्ट पर हैं. लिथुआनिया के प्रधान मंत्री इंगा रुगिनीने ने कहा, "बेलारूसी हाइब्रिड हमले का मुकाबला करने के लिए, हमें सख्त कदम उठाने चाहिए और इस हमले से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों की रक्षा करनी चाहिए."
लिथुआनिया में आपातकाल लगने के बाद क्या होगा?
एपी की रिपोर्ट के अनुसार लिथुआनिया में राष्ट्रीय आपातकाल का मतलब है कि सेना अब बॉर्डर से लगे इलाकों में गश्त करने लगेगी. साथ ही उसे देश की संसद से अतिरिक्त शक्तियां प्राप्त हो जाएंगी. वो संदिग्धों की तलाशी या लोगों को हिरासत में भी ले सकेगी.
लिथुआनिया की सरकार ने कहा कि आपातकाल का नागरिकों पर प्रभाव सीमित होगा.














