- जापान से भारत में रफ्तार का सौदागर आने वाला है. एक ऐसी बुलेट ट्रेन जो एक घंटे में 320 किलोमीटर भागती है.
- प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जापान की यात्रा पर हैं, वहां E10 शिंकानसेन बुलेट ट्रेन उनके एजेंडे में शामिल है.
- भारत की शुरू में योजना थी कि E5 शिंकानसेन सीरिज की ट्रेन खरीदी जाए लेकिन अब देरी के बाद E10 लेने की तैयारी.
अगर आपको हम कहें कि आप केवल 2 घंटे में मुंबई से अहमदाबाद जा सकते हैं तो क्या आप हमारा भरोसा कर लीजिएगा? वैसे अब आपको कर लेना चाहिए. जापान से भारत में 'रफ्तार का सौदागर' आने वाला है. एक ऐसी बुलेट ट्रेन जो एक घंटे में 320 किलोमीटर भागती है.
इन दोनों शहरों के बीच जापान की शिंकानसेन बुलेट ट्रेन को चलाने की प्लानिंग तो पुरानी है लेकिन अभी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जापान की यात्रा पर हैं, वहां यह बुलेट ट्रेन उनके एजेंडे में शामिल है. अपने जापान दौरे के दूसरे दिन पीएम मोदी ने बुलेट ट्रेन की सवारी की. जापान के पीएम शगिरो इशिदा के साथ पीएम मोदी ने बुलेट ट्रेन का सफर किया, जिसकी तस्वीरें सामने आई हैं.
उससे पहले भारतीय रेलवे और जापान की अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी ने चार साल इस बात का अध्ययन किया था कि क्या इस बुलेट ट्रेन को भारत लाना चाहिए. दो साल बाद एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें जापान सॉफ्ट लोन के माध्यम से परियोजना का 80 प्रतिशत फंडिंग देने पर सहमत हुआ. हालांकि, अगले कुछ वर्षों में देरी हुई. लेकिन उसके बाद से निर्माण कार्य में तेजी आई है. पहला सेक्शन गुजरात में 2027 तक खुलना है और पूरी रूट 2028 तक चालू होने की उम्मीद है. दोनों शहरों के बीच की दूरी 508 किमी है और यह ट्रेन दो घंटे, सात मिनट में यह फासला पूरा करेगी.
माना जा रहा है कि पीएम मोदी और जापान के वर्तमान प्रधान मंत्री, शिगेरु इशिबा भारत में अन्य बुलेट ट्रेन परियोजनाओं की संभावना तलाश सकते हैं. 2009 में पांच अन्य हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को भी शॉर्टलिस्ट किया गया था, जिनमें एक पुणे से अहमदाबाद और दूसरा दिल्ली से अमृतसर, वाया चंडीगढ़ शामिल था.
बुलेट ट्रेन क्या होती हैं?
बुलेट ट्रेन यानी रफ्तार का अलग लेवल. यह अन्य देशों में चलने वाले हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के समान ही है. शुरू में फ्रांस के साथ भारत ने शुरू में इस परियोजना के निर्माण पर विचार किया था. अभी चीन, साउथ कोरिया, तुर्की, स्पेन, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड और बेल्जियम जैसे देशों के पास ये सेवाएं हैं. कोई ट्रेन तभी 'बुलेट ट्रेन' कहलाएगी जब वह कम से कम 250+ किमी प्रति घंटे की गति से चले और उसके लिए अलग से पटरियां हों.
शिंकानसेन सीरिज की बुलेट ट्रेन
भारत की शुरू में योजना थी कि E5 शिंकानसेन सीरिज की ट्रेन खरीदी जाए. हालांकि, जब परियोजना में देरी हुई और इस बीच जापान में टेक्नोलॉजी में प्रगति हुई तो उसने भारत को अगली पीढ़ी की E10 सीरिज की बुलेट ट्रेन खरीदने का ऑफर दिया. इसका डिजाइन प्रसिद्ध सकुरा, या चेरी ब्लॉसम फूलों से प्रेरित है और इसमें कम से कम एक अपग्रेड शामिल है- ये ट्रेन भूकंप-रोधी है. यानी भूकंप आ भी जाए तो इसे कुछ नहीं होगा.
E5 सीरिज की तुलना में इसमें कई सुविधाएं हैं. भारत के लिए इन बुलेट ट्रेनों में थोड़े स्पेशल बदलाव किए जाएंगे. इनमें अधिक सामान रखने की जगह होगी, व्हीलचेयर के लिए खास विंडो सीटें हो सकती हैं.
ईस्ट जापान रेलवे कंपनी द्वारा डिजाइन किया गया, E10 की अधिकतम गति 320 किमी प्रति घंटा है, जो E5 सीरिज के बराबर ही है. हालांकि, E10 की टॉप स्पीड इलेक्ट्रॉनिक रूप से सीमित है. अगर चाहा जाए तो अगली पीढ़ी की यह ट्रेन 360 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है.