इजराइल ने बुधवार को रात भर लेबनान पर हमला किया. इसमें करीब 200 लोगों के मारे जाने और हजार से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है. इसके बाद से ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को एक बार फिर बंद कर दिया है.इसके बाद से सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमिरात, कुवैत और कतर ने कहा है कि उनके ठिकानों पर ईरान ने मिसाइल-ड्रोन से हमला किया है. इजरायल और ईरान के इस कदम से बुधवार को अस्तित्व में आया युद्धविराम खतरे में पड़ गया है. इसका असर कच्चे तेल की कीमतों और शेयर बाजार पर भी देखा जा रहा है. हालांकि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल खोलने की मांग करते हुए शांति वार्ता को पटरी पर बनाए रखने की कोशिश की है. खाड़ी में बढ़ती हिंसा और मतभेदों की वजह से युद्धविराम के कायम रहने पर अनिश्चितता बनी हुई है.
अमेरिका-इजरायल और ईरान ने बुधवार को एक 10 सूत्रीय युद्ध विराम पर सहमति जताई थी. लेकिन इजरायल ने रात में लेबनान पर हमला कर दिया. उसने बेरूत में व्यावसायिक और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया. उसका कहना है कि इस युद्धविराम समझौते में लेबनान में हमले रोकना शामिल नहीं है. वहीं ईरान और इस समझौते में मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान का कहना है कि युद्धविराम की शर्तों में लेबनान पर हमले रोकना भी शामिल है.पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का कहना है कि इस समझौते में लेबनान में लड़ाई रोकना भी शामिल है.वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि अमेरिका को युद्धविराम या इजरायल के जरिए जारी युद्ध में से एक को चुनना होगा. उनका कहना है कि दोनों एक साथ नहीं चल सकते हैं.
फिर बंद हुआ होर्मुज जलडमरूमध्य
लेबनान पर हमले के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को एक बार फिर बंद कर दिया.समझौते की शर्तों को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद बने हुए हैं. ईरान ने संकेत दिया है कि वह जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूल सकता है, वहीं अमेरिका इसका विरोध कर रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने जलडमरूमध्य बंद करने को अस्वीकार्य बताते हुए उसे फिर खोलने की मांग दोहराई.
लेबनान ने इजरायली हमलों में मारे गए लोगों के बाद राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया है. इस दौरान सभी सरकारी संस्थान बंद कर दिए गए हैं और झंडे झुका दिए गए हैं. लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने इजराइली हमलों को रोकने के लिए सभी राजनीतिक और कूटनीतिक संसाधनों को जुटाने की बात कही है.
कैसा है खाड़ी के देशों का हाल
युद्धविराम समझौता लागू होने के बाद कुवैत ने बताया है कि उसके प्रमुख तेल संयंत्रों, बिजली स्टेशनों और जल शोधन (Desalination) प्लांट्स को ड्रोन अटैक में भारी नुकसान उठाना पड़ा है.
यूएई के अबू धाबी में एक मिसाइल हमले को रोकने के दौरान गिरे उसके मलबे से आग लग गई. इससे हबशन गैस कॉम्प्लेक्स में अस्थायी रूप से काम रोकना पड़ा. इस हमले में तीन लोग घायल हुए हैं.
कतर ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान से दागी गई सात मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराया.
सऊदी अरब को भी निशाना बनाया गया. उसका कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करने वाली उसकी एक प्रमुख पाइपलाइन पर हुआ मिसाइल से हमला किया गया.
बहरीन ने भी अपने यहां मिसाइल और ड्रोन आने की खबर दी है.
इन हमलों के बाद से यूएई ने अमेरिका-ईरान युद्धविराम की शर्तों पर तत्काल स्पष्टता की मांग की है. उसने चेतावनी दी है कि अस्पष्टता के कारण पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता और लंबी खिंच सकती है.
क्या भ्रम में हैं अमेरिकी
युद्धविराम की शर्तों को लेकर केवल मिडिल ईस्ट में ही नहीं अमेरिका में भी भ्रम बना हुआ है. अमेरिकी प्रशासन में इस बात को लेकर भ्रम बना हुआ है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किन शर्तों पर सहमति दी है. सबसे बड़ा भ्रम लेबनान को लेकर है. हालांकि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का कहना है कि इस समझौते में लेबनान को पूरी तरह बाहर रखा गया है.
युद्धविराम की घोषणा के बाद न्यूयॉर्क के टाइम्स चौराहे पर सैकड़ों युद्ध-विरोधी कार्यकर्ता जुटे. उन्होंने अमेरिका-इजरायल के ईरान के खिलाफ युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने और लेबनान पर बमबारी तुरंत रोकने की मांग की.
अमेरिका में रह रहे ईरान के आखिरी शाह के बेटे रेजा पहलवी ने राष्ट्रपति ट्रंप के इस दावे को खारिज कर दिया है कि तेहरान में बहुत प्रभावी सत्ता परिवर्तन हुआ है. उन्होंने कहा कि भले ही नेतृत्व कमजोर हुआ हो, लेकिन सत्ता में वही लोग बने हुए हैं.
युद्ध विराम पर इजराइल में कैसी प्रतिक्रिया है
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि युद्धविराम के बावजूद इजरायल जरूरत पड़ने पर ईरान का सामना करने के लिए तैयार है. टीवी संबोधन में उन्होंने कहा,''मैं साफ कर दूं, हमारे कुछ लक्ष्य अभी बाकी हैं और हम उन्हें पूरा करेंगे, चाहे समझौते से या फिर दोबारा लड़ाई के जरिए.''
शेयर और तेल बाजार का हाल
बुधवार को अमेरिका-इजरायल और ईरान में 14 दिन के युद्धविराम समझौते की खबर आते ही शेयर और कच्चे तेल का बाजार झूम उठा था. कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल करीब ढाई फीसदी तक की गिरावट देखी गई थी. वहीं बीएसई, निफ्टी और निक्केई जैसे शेयर बाजार में तेजी का रुख रहा था. युद्धविराम की खबर की वजह से जापाना का निक्केई 225 सूचकांक में करीब 6 फीसदी की तेजी देखी गई थी. वहीं बांबे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में भी युद्धविराम का असर देखा गया था. बीएसई का मानक सूचकांक सेंसेक्स 2946.32 अंक यानी 3.95 फीसदी उछलकर 77,562.90 अंक पर बंद हुआ था. यह पिछले पांच साल में एक दिन में आया सबसे बड़ा उछाल था. लेकिन गुरुवार को लेबनान पर हुए इजरायली हमले और खाड़ी के देशों पर ईरान के हमलों ने बाजार की धारणा को कमजोर किया. इसकी वजह से धड़ा धड़ गिरावट देखी गई. बीएसई सेंसेक्स में दोपहर तक 938.55 अंक या 1.21 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी. वहीं जापान के निक्की 225 में भी आधे फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई. यही हाल तेल के बाजार में भी दिखाई दिया. गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की प्रति बैरल की कीमत 97.10 डॉलर पर थी. यह बुधवार की कीमत के मुकाबले करीब ढाई फीसदी अधिक है. हालांकि अच्छी बात यह कि कच्चे तेल की कीमत अभी 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे है, जो युद्ध के दौरान करीब 120 डॉलर प्रति बैरल चक चली गई थी.
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