- फिलिस्तीन की विदेश मंत्री वार्सन अघाबेकियन ने इजरायल-फिलिस्तीन के बीच शांति के लिए भारत की भूमिका पर बात की
- गाजा में आंशिक सीजफायर के बावजूद हिंसा जारी, वहां मानवीय सहायता की अत्यंत आवश्यकता है- वार्सन
- 'बोर्ड ऑफ पीस' पहल का स्वागत करते हुए अघाबेकियन ने इसके UN सुरक्षा परिषद के ढांचे में रहने पर ज़ोर दिया
गाजा में इस समय नाजुक सीजफायर जारी है. दुनिया के हर कोने से मांग उठ रही है कि फिलिस्तीन और इजरायल के बीच की हिंसा का स्थायी राजनीतिक समाधान निकाला जाए. ऐसे में फिलिस्तीन की विदेश मंत्री वार्सन अघाबेकियन ने कहा है कि इजरायल और फिलिस्तीन के बीच इस स्थायी शांति को प्राप्त करने में भारत शांतिदूत की भूमिका निभा सकता है. वार्सन अघाबेकियन भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक (IAFMM) में शामिल होने के लिए नई दिल्ली आई हुई हैं. इस यात्रा के दौरान उन्होंने NDTV से विशेष रूप से बात की है. इंटरव्यू में फिलिस्तीनी विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि युद्धों के लिए अब समय नहीं है. अब बातचीत, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान होना चाहिए.
'गाजा आज विनाश का पर्याय है'
NDTV के सीनियर एग्जीक्यूटिव एडिटर आदित्य राज कौल के साथ बात करते हुए, अघाबेकियन ने गाजा में जमीनी स्थिति को गंभीर बताया. गाजा की वर्तमान स्थिति को उन्होंने "आंशिक सीजफायर" बताया. उन्होंने कहा कि भले सीजफायर डील पर साइन होने के बाद बड़े पैमाने पर शत्रुताएं कम हो गई हैं, समझौते लेकिन अभी भी हत्याएं और हिंसा जारी हैं. उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि यह सीजफायर स्थायी हो जाएगा और राहत प्रयास तुरंत शुरू हो जाएंगे."
विदेश मंत्री के अनुसार गाजा आज विनाश का पर्याय है. इसकी अधिकांश आबादी विस्थापित हो गई है. उन्होंने कहा, "सब कुछ नष्ट हो गया है. लोगों को बुनियादी सेवाओं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, भोजन और रहने के लिए छत की जरूरत है. ज्यादातर लोग तंबू या आंशिक रूप से नष्ट हुई इमारतों में रह रहे हैं जो किसी भी समय ढह सकते हैं." उन्होंने जोर देकर कहा कि तत्काल वहां मानवीय सहायता पहुंचाना और वहां पुनर्निर्माण करना महत्वपूर्ण है.
ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' का किया स्वागत
अघाबेकियन ने गाजा के लिए इंटरनेशनल "बोर्ड ऑफ पीस" बनाए जाने की घोषणा का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि कोई भी ऐसी पहल जो लड़ाई को रोकने और मानवीय सहायता को सुविधाजनक बनाने में मदद करती है, वह सकारात्मक है. हालांकि, साथ ही साथ उन्होंने इस बात को लेकर भी आगाह किया कि ऐसी किसी भी कोशिश को संयुक्त राष्ट्र (UN) के ढांचे के अनुरूप होना चाहिए. उन्होंने कहा, ''हमने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 3802 में निर्धारित बोर्ड ऑफ पीस का स्वागत किया है.'' उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में दावोस में 'बोर्ड ऑफ पीस' को लेकर जो प्रस्ताव पेश किया गया वह गाजा से आगे जाता है. उनके अनुसार अभी भी कई देशों इस प्रस्ताव की जांच कर रहे हैं और समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या 'बोर्ड ऑफ पीस' के प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र के सिस्टम को कमजोर करते हैं या उन्हें रिप्लेस करने की कोशिश करते हैं.
"भारत हमेशा फिलिस्तीन के साथ खड़ा रहा"
इजरायल और फिलिस्तीन के बीच बातचीत में भारत की भूमिका प्रमुखता से सामने आई. नई दिल्ली की अपनी पहली यात्रा पर, अघाबेकियन ने गाजा को मिले भारत के मानवीय समर्थन और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की तरफ से फिलिस्तीन को लंबे समय से दिए जा रहे लगातार समर्थन की प्रशंसा की. उन्होंने कहा, "भारत मिस्र के माध्यम से सहायता भेजने वाले पहले देशों में से एक रहा है. इसने वेस्ट बैंक में विकास परियोजनाओं का समर्थन किया है और लगातार मानवीय सिद्धांतों के लिए खड़ा रहा है."
महत्वपूर्ण बात यह है कि विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के संतुलित रिश्ते इसे कूटनीतिक लाभ देते हैं. जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या नई दिल्ली शांति वार्ता में मध्यस्थता कर सकती है, तो उन्होंने कहा, "भारत का रिश्ता दोनों पक्ष, इजरायल और फिलिस्तीन के साथ दोस्ती का है. हमें लगता है कि वह इस संबंध में भूमिका निभा सकता है." भारत ने बार-बार कहा है कि यह जंग का समय नहीं है. अघाबेकियन ने कहा कि भारत का ऐसा दृष्टिकोण फिलिस्तीन के लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप है, उनके अनुसार "युद्ध केवल और अधिक हिंसा और विनाश लाते हैं."
यह पूछे जाने पर कि वह प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को क्या मैसेज देंगी, फिलिस्तीनी विदेश मंत्री ने सरलता से जवाब दिया: "अपने मूल्यों और अपने महान इतिहास के आधार पर जो सही है वह करें. आप शांति के पक्ष में हैं, आत्मनिर्णय के पक्ष में हैं, और आप फिलिस्तीन और इजरायल दोनों के मित्र रहे हैं."
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