जंग के बीच अमेरिका-इजरायल के खिलाफ 'मुस्लिम मोर्चा' बनाने में जुटा ईरान? समझें इशारा

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार को पाकिस्तान, तुर्की और इजिप्ट के विदेश मंत्रियों से फोन पर अलग-अलग बातचीत की और जोर देकर कहा कि क्षेत्र में शांति बहाली के लिए अमेरिका-इजरायल के खिलाफ एकजुट होना जरूरी है.

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  • मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब मिसाइल हमलों से बढ़कर ऊर्जा संसाधनों पर हमलों की तरफ बढ़ रही है
  • ईरान ने पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र से बात करके US-इजरायल के खिलाफ वैश्विक मोर्चा बनाने की कोशिश की है
  • सऊदी अरब ने भी इन देशों से बात की है और ईरानी हमलों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है
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मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब महज मिसाइल हमलों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह भीषण एनर्जी वॉर की तरफ बढ़ती नजर आ रही है. अपने सबसे बड़े गैस भंडार साउथ पार्स पर इजरायली हमले से ईरान भड़क गया है. उसने एक तरफ खाड़ी देशों में तेल और गैस के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका और इजरायल के खिलाफ वैश्विक मोर्चा बनाने के लिए कूटनीतिक बिसात बिछानी शुरू कर दी हैं. 

पाकिस्तान-तुर्की-इजिप्ट से ईरान की बात

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार को पाकिस्तान, तुर्की और इजिप्ट के विदेश मंत्रियों से फोन पर अलग-अलग बातचीत की. ईरानी मीडिया के मुताबिक, इस दौरान उन्होंने अमेरिका-इजरायल पर भड़काऊ कार्रवाई करके क्षेत्र को अस्थिर करने का आरोप लगाया. उन्होंने साफ कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता की रक्षा और सुरक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ेगा. अराघची ने जोर देकर कहा कि क्षेत्र में शांति बहाली के लिए इनके खिलाफ एकजुट होना जरूरी है. 

सऊदी अरब ने भी संभाला मोर्चा

एक तरफ ईरान पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों को साथ लाने की कोशिश कर रहा है, वहीं सऊदी अरब ने भी मोर्चा संभाल लिया है. सऊदी अरब ने भी खाड़ी में तनाव और ईरान के हमलों के मद्देनजर तुर्की, इजिप्ट और पाकिस्तान से बात की है. गुरुवार को रियाद में अरब और इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के इतर सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार, तुर्की के हाकान फिदान और मिस्र के बद्र अब्देलाती के साथ ईरान के हमलों पर चर्चा की. 

सऊदी सब्र का बांध टूट रहा?

सऊदी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस बैठक का मकसद क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना और स्थिरता बहाल करने के लिए प्रयासों को बढ़ावा देना था. ईरानी हमलों से अब सऊदी अरब के सब्र का बांध टूटता नजर आ रहा है. प्रिंस फैसल ने साफ कह दिया है कि सऊदी अरब का संयम असीमित नहीं है. वह अपनी सुरक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा.

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ऊर्जा भंडारों पर हमले का खतरनाक ट्रेंड

बहरहाल, इस जंग का सबसे खतरनाक पहलू ईंधन भंडारों पर शुरु हुए हमले हैं. इजरायल की तरफ से साउथ पार्स प्राकृतिक गैस भंडार पर हमले के जवाब में ईरान ने कतर में दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी केंद्र रास लाफान को निशाना बनाकर वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन को हिला दिया है. ईरान ने इजरायल के हाइफा और अशदोद की तेल रिफाइनरियों पर हमले कर जता दिया है कि वह अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है. इससे पहले अमेरिका ने ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर की गई मिसाइल स्ट्राइक ने आग में घी डालने का काम किया था.

ईरान इस वक्त दोहरी रणनीति पर काम कर रहा है. एक तरफ वह अमेरिका-इजरायल के तेल-गैस के आर्थिक ढांचे को चोट पहुंचाने की कोशिश कर रहा है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान, मिस्र, तुर्की जैसी क्षेत्रीय ताकतों को यह समझाने का प्रयास कर रहा है कि इस जंग के लिए अमेरिका जिम्मेदार है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या तुर्की और पाकिस्तान जैसे देश ईरान के इस एंटी अमेरिका मोर्चे का हिस्सा बनेंगे? 

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