इस्लामाबाद शांति वार्ता में अमेरिका से बातचीत के लिए डेलिगेशन नहीं भेजेगा ईरान: रिपोर्ट

रविवार को ही ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों को लेकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि ट्रंप उस स्थिति में नहीं हैं कि वे ईरान को शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के अधिकार से वंचित कर सकें.

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ईरान ने इस्लामाबाद शांति वार्ता से बनाई दूरी
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  • अमेरिका ने इस वार्ता के लिए अपने डेलिगेशन के साथ सुरक्षा बढ़ा दी है
  • जेडी वेंस सुरक्षा कारणों से इस वार्ता में हिस्सा नहीं लेंगे, जबकि ट्रंप के दूत वार्ता में शामिल होंगे
  • ईरान की तरफ से वार्ता का नेतृत्व संभवतः संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ करेंगे
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इस्लामाबाद शांति वार्ता के दूसरे दौर की बातचीत के लिए ईरान अपना डेलिगेशन नहीं भेज रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस वार्ता से ठीक एक दिन पहले ईरान ने ये फैसला लिया है. ईरानी मीडिया एजेंसी मेहर न्यूज के अनुसार ईरान ने कहा कि बातचीत के दूसरे दौर से उसकी अनुपस्थिति का कारण वे बातें हैं जिन्हें उसने वाशिंगटन की 'अत्यधिक मांगें', 'अवास्तविक अपेक्षाएं', 'रुख में लगातार बदलाव', 'बार-बार के विरोधाभास' और 'जारी नौसैनिक नाकाबंदी' बताया है; जिसे वह संघर्ष-विराम का उल्लंघन मानता है. 

आपको बता दें कि इस शांति वार्ता के लिए अमेरिका अपना डेलिगेशन भेज रहा है. अमेरिकी डेलिगेशन के इस्लामाबाद पहुंचने से पहले 5 अमेरिकी जेट्स वहां पहुंच चुके हैं. कहा जा रहा है कि पांच और जेट कल तक पहुंच सकते हैं. माना जा रहा है कि पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने अपने वार्ताकारों की सुरक्षा के लिए खास तौर पर ज्यादा सैनिक तैनात किए हैं. एपी के अनुसार, व्हाइट हाउस के अनुसार, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर वार्ता के लिए इस्लामाबाद की यात्रा करेंगे. वेंस वार्ता को लीड करेंगे. हालांकि, ट्रंप ने साफ किया है कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान जाकर इस बातचीत का नेतृत्व नहीं करेंगे. 

वहीं रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने इसका कारण सुरक्षा चिंताओं को बताया. ट्रंप ने कहा कि सुरक्षा कारणों की वजह से जेडी वेंस इस दौरे पर नहीं जा रहे हैं. इसलिए अभी इसको लेकर ऊहापोह की स्थिति है कि अमेरिका से कौन-कौन जा रहा है. वहीं ईरान ने भी अब तक अपनी टीम की जानकारी नहीं दी है. माना जा रहा है कि सुरक्षा कारणों से दोनों देश अपने वार्ताकारों का नाम नहीं बता रहे. मगर उम्मीद यही है कि ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ही ईरान की तरफ से वार्ता का नेतृत्व करेंगे. साथ में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अन्य नेता शामिल हो सकते हैं.

'ट्रंप ईरान को परमाणु कार्यक्रम के अधिकार से वंचित नहीं कर सकते'

रविवार को ही ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों को लेकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि ट्रंप उस स्थिति में नहीं हैं कि वे ईरान को शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के अधिकार से वंचित कर सकें. पेजेश्कियन के इस बयान से दो दिन पहले ट्रंप ने धमकी दी थी कि यदि कोई समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका ईरान के संवर्धित यूरेनियम को "कहीं अधिक शत्रुतापूर्ण रूप में" अपने कब्जे में ले लेगा.

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पेजेश्कियन ने पूछा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति घोषणा करते हैं कि ईरान को अपने परमाणु अधिकारों का उपयोग नहीं करना चाहिए, लेकिन वे यह नहीं बताते कि किस अपराध के लिए? मूल रूप से, किसी राष्ट्र को उसके कानूनी अधिकारों से वंचित करने का दुनिया में उनका क्या अधिकार है? उन्होंने आगे कहा कि मानवीय सिद्धांतों के नजरिए से प्रत्येक स्वतंत्र व्यक्ति को - चाहे उसका धर्म, आस्था, नस्ल या जाति कुछ भी हो अपने अविच्छेद्य अधिकारों का उपभोग करने का हक होना चाहिए.

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