ईरान-अमेरिका तनाव: मध्‍य-पूर्व में सीरिया से कतर तक फैला है अमेरिकी सैन्‍य ठिकानों का जाल

मध्य पूर्व क्षेत्र में अमेरिका के दसियों हजार सैनिक तैनात हैं, जो विभिन्न देशों में स्थित सैन्य अड्डों से संचालन करते हैं. ये सभी ठिकाने अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड के अंतर्गत आते हैं. 

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  • अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव के खतरे के बीच दोनों देशों ने एक-दूसरे को कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है.
  • मध्य पूर्व में अमेरिका के कई सैन्य ठिकाने हैं. बहरीन के नौसैनिक अड्डे का अमेरिका के लिए रणनीतिक महत्व है.
  • इराक में अमेरिकी सैन्य मिशन सितंबर 2026 तक समाप्त होने वाला है जबकि कुछ ठिकानों से अमेरिका पहले ही हट चुका है.
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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ तक पहुंच गया है. दोनों ओर से तीखे जुबानी बयान आ रहे हैं.अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका, ईरान पर हमला करने के लिए “तैयार, इच्छुक और सक्षम” है तो ईरान ने ने भी जवाब देने में देरी नहीं की और किसी भी हमले की स्थिति में “कड़ा जवाब” देने की चेतावनी दी है. ऐसे हालात में यदि सैन्य टकराव होता है तो ईरान की जवाबी कार्रवाई का मुख्य निशाना मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने हो सकते हैं. 

मध्य पूर्व क्षेत्र में अमेरिका के दसियों हजार सैनिक तैनात हैं, जो विभिन्न देशों में स्थित सैन्य अड्डों से संचालन करते हैं. ये सभी ठिकाने अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अंतर्गत आते हैं. 

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बहरीन

खाड़ी इलाके के छोटे से देश बहरीन में अमेरिका का एक अहम नौसैनिक अड्डा मौजूद है, जिसे नेवल सपोर्ट एक्टिविटी बहरीन कहा जाता है. यहीं से अमेरिकी नौसेना का फिफ्थ फ्लीट और नेवल फोर्सेज सेंट्रल कमांड संचालित होती हैं. 

बहरीन का गहरे पानी वाला बंदरगाह बड़े अमेरिकी युद्धपोतों और एयरक्राफ्ट कैरियर को संभालने में सक्षम है. अमेरिका 1948 से इस बेस का इस्तेमाल कर रहा है. कई अमेरिकी युद्धपोत और लॉजिस्टिक सपोर्ट शिप्स बहरीन को अपना होम पोर्ट मानते हैं. 

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इराक

इराक के कुर्द स्वायत्त क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का हिस्सा रही है. हालांकि अमेरिका और इराक के बीच हुए समझौते के तहत यह मिशन सितंबर 2026 तक समाप्त होना है. 

अमेरिकी सेना पहले ही इराक में मौजूद अपने कई ठिकानों से हट चुकी है. गाजा युद्ध शुरू होने के बाद इराक और सीरिया में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान समर्थक गुटों ने हमले किए थे, जिनका जवाब अमेरिका ने हवाई हमलों से दिया था. 

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कुवैत

कुवैत में अमेरिका के कई सैन्य ठिकाने हैं. इनमें कैंप आरिफजान प्रमुख है, जो सेंट्रल कमांड के तहत अमेरिकी थलसेना का फॉरवर्ड हेडक्वार्टर है. यहां अमेरिका ने सैन्य उपकरणों और रसद का बड़ा भंडार भी रखा हुआ है. 

इसके अलावा अली अल‑सालेम एयर बेस पर अमेरिकी वायुसेना की 386वीं एयर एक्सपेडिशनरी विंग तैनात है, जिसे क्षेत्र में सैन्य ताकत पहुंचाने का मुख्य हवाई केंद्र माना जाता है. अमेरिका यहां MQ‑9 रीपर ड्रोन भी तैनात करता है. 

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कतर

कतर का अल‑उदीद एयर बेस अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण विदेशी सैन्य ठिकानों में से एक है.  यहां सेंट्रल कमांड के फॉरवर्ड ऑपरेशंस, एयर फोर्स और स्पेशल ऑपरेशंस यूनिट्स तैनात हैं. 

इस बेस पर 379वीं एयर एक्सपेडिशनरी विंग मौजूद है, जो एयरलिफ्ट, ईंधन भरने, खुफिया निगरानी और मेडिकल इवैक्यूएशन जैसे मिशन संभालती है. जून में ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में इसी बेस को निशाना बनाकर मिसाइलें दागी थीं. 

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सीरिया

सीरिया में अमेरिका लंबे समय से इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अभियान के तहत सैनिक तैनात किए हुए है. दिसंबर में सीरिया में हुए एक हमले में दो अमेरिकी सैनिक और एक नागरिक दुभाषिया मारे गए, जिसका दोषी ISIS को माना गया. यह घटना वहां अमेरिकी बलों के लिए मौजूद खतरे को उजागर करती है. 

संयुक्त अरब अमीरात

यूएई के अल धफरा एयर बेस पर अमेरिकी वायुसेना की 380वीं एयर एक्सपेडिशनरी विंग तैनात है. यहां लड़ाकू विमान और MQ‑9 रीपर जैसे ड्रोन मौजूद हैं. यह बेस एडवांस्ड एयर वॉरफेयर ट्रेनिंग का भी प्रमुख केंद्र माना जाता है. 
 

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