- ईरान, अमेरिका और इजरायल ने दो सप्ताह के लिए सीजफायर पर सहमति जताकर युद्ध विराम किया है
- पिछले चालीस दिनों में ईरान और इजरायल के बीच हुए हमलों में तीन हजार से अधिक लोग मारे गए हैं
- मिडिल ईस्ट में मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण एयरस्पेस बंद हो गया था लेकिन अब यात्री उड़ानें फिर शुरू होंगी
बुधवार की सुबह जब लोग उठे, तो उन्हें ईरान युद्ध को लेकर गुड न्यूज सुनने को मिली. ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जंग थम गई है, दोनों देश 2 सप्ताह के लिए सीजफायर को राजी हो गए हैं. इस फैसले के बाद पिछले 40 दिनों से खौफ के साए में जी रहे मिडिल ईस्ट के करोड़ों लोगों ने आज राहत की सांस ली होगी. अब उन्हें ये डर नहीं होगा कि कोई मिसाइल आकर उनके पास फट पड़ेगी, कोई ड्रोन उनकी बिल्डिंग से टकराकर नहीं फटेगा. खतरे का सायरन नहीं नहीं बजेगा और लोगों को घंटों बंकर में नहीं रहना पड़ेगा. भारत में एलपीजी (LPG) की किल्लत भी दूर हो जाएगी, लेकिन गैस सिलेंडर लेकर लाइनों में खड़े नजर नहीं आएंगे.
मिडिल ईस्ट का आसमान अब सुरक्षित
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर एक के बाद एक कई मिसाइल हमले किये. इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली हुसैनी ख़ामेनेई समेत कई दिग्गज नेता मारे गए. इसके बाद ईरान ने मिडिल ईस्ट में जो कहर बरपाया, उसके बाद लोग त्राहिमाम करने लगे. सऊदी अरब, कतर, बहरीन और यूएई में ईरान ने सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन दागे. तेल रिफाइनरियों से लेकर रिहायशी इमारतों तक को ईरान ने नहीं बख्शा. लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन अटैक के डर से यहां का एयर स्पेस बंद करना पड़ा. ऐसे में लाखों लोग मिडिल ईस्ट में फंस गए. लेकिन अब मिडिल ईस्ट का आसमान सुरक्षित है. कुछ दिनों में इन देशों में यात्री विमानों की आवाजाही भी शुरू हो जाएगी.
खौफ के 40 दिन, अब 15 दिन का सीजफायर
पिछले 40 दिन मिडिल ईस्ट के देशों खासतौर पर सऊदी अरब, कतर, बहरीन और यूएई के लोगों के लिए खौफ के साए में बीते. लोगों में डर था कि कब कहां से कोई आत्मघाती ड्रोन या मिसाइल आकर फट पड़े. लोग घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे थे. सऊदी अरब और बहरीन की तेल रिफाइनरियों पर ईरान के कई मिसाइल और ड्रोन अटैक हुए. दुबई में बुर्ज खलीफा के नजदीक तक ईरान की मिसाइलें पहुंच गईं. मिडिल ईस्ट में ईरान के हमलों में कई मासूम लोगों की जान चली गई. लेकिन फिलहाल 2 हफ्ते के लिए ये डर खत्म हो गया है. ईरान, अमेरिका और इजरायल तीनों ने ही हमलों को विराम लगा दिया है.
LPG सिलेंडर की पैनिक बाइंग थमेगी
भारत समेत कई देशों में ईरान युद्ध के दौरान ऊर्जा संकट के बादल मंडराए. भारत में गैस एजेंसियों के बाहर एलपीजी सिलेंडरों के साथ लोगों की लंबी-लंबी लाइनें नजर आईं. ये ईरान युद्ध का डर था, जिसकी वजह से लोग 'पैनिक बाइंग' कर रहे थे. हालांकि, केंद्र सरकार ने कई बार बताया कि देश में फिलहाल पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का कोई संकट नहीं है. देश के पास पर्याप्त भंडार है. हालांकि, जंग थमने के बाद लोगों के दिलों में बैठा डर निकल जाएगा. ऐसे में पैनिक बाइंग भी थम सकती है. जंग के बीच कई कच्चे तेल और गैस के जहाज होर्मुज स्ट्रेट से भारत आए, लेकिन काफी जहाज अभी तक फंसे हुए थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसे बड़ा संकट बताया था. इधर, मिडिल ईस्ट संकट के कारण कच्चे तेल के दाम वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे थे, तो तेल कंपनियों पर कीमतें बढ़ाने का दबाव आने लगा. ऐसे में केंद्र सरकार को एक्साइज ड्यूटी को घटाना पड़ा. जंग के कारण रुपया भी डॉलर के मुकाबले पिछड़ता जा रहा था. हालांकि, अब हालात सुधरने शुरू हो गए हैं.
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40 दिन में हजारों लोगों की गई जान
इस जंग को जिन देशों के लोगों ने सबसे नजदीक से देखा और सबसे ज्यादा नुकसान झेला, वे हैं- ईरान और इजरायल. ईरान पर इजरायल और अमेरिका मिलकर हमले कर रहे थे. हजारों मिसाइल, ड्रोन और बम ईरान पर दागे गए. इस दौरान 3000 से ज्यादा लोगों की जान चली गई. इसमें महिलाएं और मासूम बच्चे भी शामिल हैं. उधर, ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन इजरायल में दागे. इजरायल में बीते 40 दिनों में हालात ये थे कि कभी भी हमले का सायरन बज जाता था. सायरन बजते ही लोगों को नजदीकी बंकरों में जाना होता था. इन बंकरों से तब तक निकलने की इजाजत नहीं थी, जब तक खतरा टलने का सायरन न बज जाए. लेकिन अगले 2 हफ्ते के लिए इजरायल के लोगों को घंटों बंकरों में नहीं गुजारने होंगे.
ईरान युद्ध के बाद की ये सुबह शांति का संदेश लेकर आई है. अब मिसाइल और ड्रोन गिरने का डर नहीं होगा. मिडिल ईस्ट से भारत तक करोड़ों लोग अब यही दुआ कर रहे होंगे कि ये शांति ऐसे ही बरकरार रहे. हालांकि, अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या 14 दिनों का ये संघर्षविराम स्थायी रहेगा? क्या ईरान और अमेरिका के बीच जंग को खत्म करने को लेकर सहमति बन पाएगी? क्या ईरान और अमेरिका एक-दूसरे की शर्तों को मानेंगे?
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