- ईरान ने अमेरिका के संभावित सैन्य हमले से पहले मध्य पूर्व के अन्य देशों से कूटनीतिक संपर्क तेज कर दिए हैं
- ईरान में विरोध प्रदर्शन में अब तक छह हजार से अधिक लोग मारे गए और हजारों प्रदर्शनकारी गिरफ्तार किए गए हैं
- मिस्र और कतर ने क्षेत्रीय स्थिरता के लिए ईरान और अमेरिका के बीच शांति स्थापना की पहल की है
ईरान में विरोध प्रदर्शन शुरू होने के एक महीने बाद ईरान के अधिकारियों ने बुधवार को अमेरिका की तरफ से संभावित सैन्य हमले के खतरे को लेकर मध्य पूर्व के अन्य देशों से संपर्क साधा है. सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने संकेत दिया है कि वे अपने हवाई क्षेत्र को किसी भी हमले के लिए इस्तेमाल नहीं होने देंगे. हालांकि, अमेरिका ने यूएसएस अब्राहम लिंकन और कई मिसाइल विध्वंसक पोतों को इस क्षेत्र में तैनात कर रखा है, जिनका उपयोग समुद्र से हमले करने के लिए किया जा सकता है. यही कारण है कि ईरान हमले से पहले कूटनीतिक तौर पर तेजी से काम कर रहा है.
ट्रंप कब करेंगे हमला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर हमले का आदेश देंगे या नहीं, यह अभी क्लियर नहीं है. हालांकि उन्होंने दो लक्ष्मण रेखाएं खींच दी हैं. उन्होंने प्रदर्शनकारियों की हत्या रोकने और गिरफ्तार सभी प्रदर्शनकारियों को छोड़ने को कहा है. बुधवार को प्रदर्शनकारियों ने बताया कि ईरान की तरफ से प्रदर्शनों पर की गई खूनी कार्रवाई में कम से कम 6,221 लोग मारे गए और कई अन्य लोगों के भी मारे जाने की आशंका है. ईरान का सरकारी मीडिया प्रदर्शनकारियों को केवल "आतंकवादी" कह रहा है. कई लोगों के लिए यही सरकारी मीडिया समाचार का एकमात्र स्रोत बना हुआ है, क्योंकि तेहरान ने लगभग तीन सप्ताह पहले ही इंटरनेट तक पहुंच बंद कर दी थी. 'ट्रंप की धमकियों को देखते हुए ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई के लिए तैयारी तेज कर दी है.
मिस्र उतरा मैदान में
मिस्र के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसके शीर्ष राजनयिक बदर अब्देलट्टी ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी मध्य पूर्व दूत स्टीव विटकॉफ से अलग-अलग बातचीत की ताकि क्षेत्र में अस्थिरता के नए दौर से बचने के लिए शांति स्थापित करने की दिशा में काम किया जा सके. इस बयान में इससे ज्यादा कोई जानकारी नहीं दी गई, हालांकि ईरानी सरकारी मीडिया ने अराघची के हवाले से कहा कि तीसरे पक्ष के मध्यस्थ संपर्क में हैं. अरबपति रियल एस्टेट डेवलपर और ट्रंप के मित्र विटकॉफ ने पहले ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की थी. व्हाइट हाउस की ओर से इस बातचीत की तत्काल कोई पुष्टि नहीं की गई.
सऊदी और UAE क्यों नहीं US के साथ
इस बीच, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन से फोन पर बात की और कहा कि सऊदी अरब ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई या किसी भी पक्ष द्वारा किए गए किसी भी हमले के लिए अपने हवाई क्षेत्र या भूभाग का उपयोग नहीं होने देगा, चाहे हमला किसी भी मूल का हो. यह बयान संयुक्त अरब अमीरात द्वारा इसी तरह के फैसले के बाद आया है. सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात दोनों जगह अमेरिका के एयर एसेट और सैनिक मौजूद हैं. इसके कारण ही पिछले दशक में दोनों देशों पर कई बार हमले भी हुए. 2019 में हुए एक हमले के बारे में पश्चिमी देशों का मानना है कि इसे ईरान ने अंजाम दिया था, जिसके कारण सऊदी अरब का तेल उत्पादन कुछ समय के लिए आधा हो गया था. 2022 में यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए कई हमलों का सामना संयुक्त अरब अमीरात ने किया था.
कतर भी एक्टिव
हालांकि, इस क्षेत्र में अमेरिका का सबसे बड़ा हवाई अड्डा कतर का विशाल अल उदैद वायु सेना अड्डा है, जो अमेरिकी सेना के केंद्रीय कमान के फॉर्वर्ड ऑपरेशन मुख्यालय के रूप में कार्य करता है. अराघची और ईरान के एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने कतर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी से फोन पर बात की. कतर ने फोन कॉल की पुष्टि की, लेकिन चर्चा के विषयों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी. बुधवार को कैबिनेट बैठक के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए अराघची ने कहा, “हमारा रुख बिल्कुल यही है: सैन्य धमकियों के माध्यम से कूटनीति लागू करना न तो प्रभावी हो सकता है और न ही रचनात्मक. यदि वे चाहते हैं कि वार्ता आगे बढ़े, तो उन्हें धमकियों, अत्यधिक मांगों और अतार्किक मुद्दों को उठाना छोड़ना होगा. वार्ता के अपने सिद्धांत होते हैं: यह समान स्तर पर, आपसी सम्मान के आधार पर और पारस्परिक लाभ के लिए आयोजित की जानी चाहिए.” जाहिर है सभी ताकतवर मुस्लिम देश नहीं चाहते कि मिडिल ईस्ट में युद्ध भड़के.
ईरान में 42,000 से ज्यादा गिरफ्तार
ईरान हफ्तों तक विरोध प्रदर्शन समाप्त होने का दावा करता रहा, लेकिन स्टारलिंक सैटेलाइट डिश के माध्यम से ईरान से धीरे-धीरे मिल रही जानकारी मानवाधिकार संगठनों तक पहुंच रही है, जो नरसंहार का आकलन करने की कोशिश कर रहे हैं. बुधवार को, अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी ने बताया कि उसकी गिनती के अनुसार ईरान में कम से कम 6,221 मरने वालों में कम से कम 5,858 प्रदर्शनकारी थे, 214 सरकारी सुरक्षाकर्मी, 100 बच्चे और 49 ऐसे नागरिक शामिल हैं, जो प्रदर्शन में भाग नहीं ले रहे थे. एजेंसी ने आगे बताया कि 42,300 से अधिक लोगों को ईरान ने अब भी गिरफ्तार किया हुआ है. ऐसे में इस बात की आशंका बनी हुई है कि अमेरिका हत्याओं और गिरफ्तारियों को लेकर ईरान पर हमला कर दे.
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हिंसा पर ईरान का जवाब
ईरान सरकार फिलहाल मामले को ठंडा करने की कोशिश कर रही है. उसने मरने वालों की संख्या कहीं कम 3,117 बताई है, जिसमें 2,427 नागरिक और सुरक्षा बल के जवान शामिल हैं, और बाकी को "आतंकवादी" करार दिया है. अतीत में, ईरान की धार्मिक सरकार ने दंगों में हुई मौतों की संख्या कम बताई है या रिपोर्ट ही नहीं की है. ईरान के इस प्रदर्शन में मरने वालों की संख्या दशकों में ईरान में हुए किसी भी अन्य विरोध प्रदर्शन या अशांति से कहीं अधिक है. पश्चिमी देश इसकी तुलना 1979 की इस्लामी क्रांति के दौरान फैली अराजकता से कर रहे हैं. ये विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर को ईरानी मुद्रा, रियाल के मूल्य में गिरावट के कारण शुरू हुए और तेजी से पूरे देश में फैल गए.
ट्रंप के सामने क्या रास्ता
ईरान ने अगर कहें कि चारों तरफ से ट्रंप को बांध दिया है तो गलत नहीं होगा. कारण मिडिल ईस्ट के सभी देश इस समय ईरान के पक्ष में दिख रहे हैं. नाटो देश अमेरिका से वैसे ही चिढ़े हुए हैं. चीन और रूस भी लंबे समय से अमेरिका के कहीं फंसने का इंतजार कर रहे हैं. ऐसे में अगर अमेरिका जल्दबाजी में ईरान पर हमला करता है तो वो अलग-थलग पड़ सकता है. ईरान पर हमला करने के लिए भी अमेरिका को समुद्र और इजरायल के अलावा और कोई रास्ता मिलना मुश्किल है. ऐसे में ईरान को अगर पीछे से चीन और रूस का सपोर्ट मिल जाता है तो उसे लंबे समय तक जंग में रहना पड़ सकता है. यही कारण है कि ट्रंप भी सिर्फ ईरान पर दबाव बनाए हुए हैं और ईरान से अपनी शर्तों पर डील करना चाहते हैं. हालांकि, इस बीच दोनों तरफ से एक भी चूक या गलतफहमी मिडिल ईस्ट को जंग का मैदान बना सकती है.













