अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग के जल्द खत्म होने की उम्मीदों को झटका लगा है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की मानें तो ईरान ने मध्यस्थों से साफ कह दिया है कि आने वाले दिनों में वह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों के साथ किसी भी तरह की बैठक करने के लिए तैयार नहीं है.
रिपोर्ट में मध्यस्थों के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका ने युद्ध रोकने के लिए जो शर्तें रखी हैं, उन पर ईरान कतई राजी नहीं है. ईरान ने अपनी मंशा के बारे में मध्यस्थों को भी अवगत करा दिया है.
पाकिस्तान की शांतिदूत बनने की कोशिशों को झटका देते हुए ईरान ने साफ कह दिया है कि वो इस्लामाबाद में बातचीत के लिए नहीं जाएगा. ईरान के कड़े रुख के बाद तुर्किए और इजिप्ट अब दूसरा विकल्प तलाशने में जुट गए हैं.
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रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस्लामाबाद में सीजफायर पर बातचीत से इनकार के बाद अब कतर और इस्तांबुल जैसे अन्य शहरों पर विचार किया जा रहा है. ये भी देखने की बात होगी कि ईरान और अमेरिका के मध्यस्थ इन जगहों पर वार्ता के लिए राजी होते हैं या नहीं.
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने मध्यस्थों के हवाले से दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्धविराम के ताजा प्रयास अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं, जहां से उनका फिर शुरू होना बेहद मुश्किल है.
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पश्चिम एशिया में युद्ध को एक महीना से ज्यादा हो गया है. अमेरिका और ईरान दोनों ही युद्ध रोकने की बातें कर रहे हैं, लेकिन दोनों ने ही बेहद कड़ी शर्तें रख दी हैं. अमेरिका ने सीजफायर के लिए 15 शर्तों की लिस्ट थमाई है, वहीं ईरान ने उन शर्तों को खारिज करते हुए अपनी 5 शर्तें रख दी हैं. एकदूसरे की शर्तों पर दोनों ही देश तैयार नहीं हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ ईरान को पाषाण युग में धकेलने की धमकी दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान के नए राष्ट्रपति को बुद्धिमान बताते हुए दावा किया है कि वो युद्धविराम की गुहार लगा रहे हैं. हालांकि ईरान ने ऐसे किसी भी दावे को सिरे से खारिज किया है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में कहा था कि इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए सार्थक और निर्णायक वार्ता कराने के लिए तैयार है.
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