ईरान में जनता ने क्यों किया विद्रोह? 'तानाशाही मुर्दाबाद' के नारे के बीच सुप्रीम लीडर ने उतारी फौज- 5 सवाल

Iran Protests Explained: 1 जनवरी को कई ईरानी शहरों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई, जिसमें कम से कम 7 लोगों के मारे जाने की खबर है. 5 सवाल और उनके जवाब से समझिए कि ईरान में आखिर क्या हो रहा है.

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Iran Protests Explained: ईरान में फिर भड़का जनता का विद्रोह
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  • ईरान में आर्थिक अस्थिरता और महंगाई के विरोध में जनता ने राजधानी तेहरान से शुरू होकर कई शहरों में प्रदर्शन किया
  • जून के जंग के बाद ईरान की आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है और मुद्रा की कीमत में भारी गिरावट आई
  • विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए ईरानी सरकार ने सुरक्षा बलों को सड़क पर तैनात किया, झड़पों में 7 की मौत हुई
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ईरान में जनता ने विद्रोह कर दिया है. जिस देश को सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई अपनी फौज के दम पर सख्ती से कंट्रोल करते हैं, वहां की जनता अपने डर को दरकिनार करती हुई सड़क पर उतर आई है, वो तानाशाही मुर्दाबाद के नारे लगा रही है. जवाब में इस्लामी सरकार ने भी अपनी फौज भेज दी है. गुरुवार, 1 जनवरी को कई ईरानी शहरों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई, जिसमें कम से कम 7 लोगों के मारे जाने की खबर है. अब आपके मन में यह सवाल होगा कि आखिर ईरान की जनता में विद्रोह क्यों मचा (Iran Protests Explained) है, वो क्या चाहती है. चलिए आपको यहां बताते हैं.

सवाल 1- ईरान में विरोध-प्रदर्शन क्यों शुरू हुआ?

विरोध प्रदर्शन बीते रविवार को देश की राजधानी तेहरान में शुरू हुआ, जहां दुकानदार ऊंची कीमतों और आर्थिक अस्थिरता को लेकर हड़ताल पर चले गए और तब से यह देश के अन्य हिस्सों में फैल गया है. यहां की करेंसी रियाल की वैल्यू बहुत गिर गई है, जिससे लोग डरे हुए हैं. 1 डॉलर की कीमत अब लगभग 14 लाख रियाल है. कई प्रदर्शनकारियों ने देश के सुप्रीम लीडर के शासन को खत्म करने का आह्वान किया है. कुछ लोगों ने राजशाही को वापस लाने की भी मांग की है.

सवाल 2- ईरान की यह हालत कैसे हुई?

जून में इजरायल ने ईरान पर हमला किया था जिसके बाद दोनों के बीच 12 दिनों की जंग हुई थी. युद्ध के दौरान अमेरिका ने भी ईरानी परमाणु स्थलों पर भी बमबारी की. माना जा रहा है कि इस जंग के बाद ईरान की इकनॉमी उबरी नहीं है और वहां के नेता अभी भी सहमे हुए हैं.

ईरान ने बार-बार कहा है कि वह अब देश में किसी भी स्थान पर यूरेनियम का संवर्धन (एनरिच) नहीं कर रहा है. वह पश्चिमी देशों को यह संकेत देने की कोशिश कर रहा है कि वह आर्थिक प्रतिबंधों को कम करने के लिए अपने परमाणु कार्यक्रम पर संभावित बातचीत के लिए तैयार है. हालाँकि, वे वार्ताएं अभी तक नहीं हुई हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तेहरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू करने के खिलाफ चेतावनी दी है.

सवाल 3- ईरान की सरकार ने क्या कदम उठाया है?

ईरान की सरकार ने इन विरोध-प्रदर्शन को रोकने के लिए सड़क पर सुरक्षा बलों को उतार दिया है. गुरुवार को, ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि चारमहल और बख्तियारी प्रांत के लॉर्डेगन शहर में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में दो लोगों की मौत हो गई, और पड़ोसी लोरेस्तान प्रांत के अज़ना में तीन लोगों की मौत हो गई. फ़ार्स ने लॉर्डेगन के बारे में कहा, "कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्रांतीय गवर्नर के ऑफिस, मस्जिद, शहीद फाउंडेशन, टाउन हॉल और बैंकों सहित शहर के प्रशासनिक भवनों पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया." 

इससे पहले गुरुवार को, ईरान की सरकारी टेलीविजन ने बताया कि पश्चिमी शहर कौहदश्त में विरोध प्रदर्शन के दौरान ईरान के सुरक्षा बलों का एक सदस्य मारा गया था. चैनल के अनुसार लोरेस्टन प्रांत के डिप्टी गवर्नर सईद पौराली ने कहा, "दंगाइयों ने कल रात कौहदश्त शहर के बासिज के एक 21 वर्षीय मेंबर की हत्या कर दी, जो लॉ एंड ऑर्डर की रक्षा कर रहा था."

बता दें कि बासिज एक स्वयंसेवी (वॉलंटरी) अर्धसैनिक बल है जो ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़ा है. रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ईरान की सेना है जो इस्लामिक कानूनों और विचारों को भी सख्ती से लागू कराने का काम करती है.

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सवाल 4- क्या सरकार अपनी गलती मान रही है?

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने प्रदर्शनकारियों की "वैध मांगों" को स्वीकार करते हुए तनाव को शांत करने की कोशिश की है, और उन्होंने गुरुवार को सरकार से आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए कार्रवाई करने का आग्रह किया है. पेजेशकियान ने सरकारी टेलीविजन पर ब्रॉडकास्ट किए गए एक कार्यक्रम में कहा, "इस्लामिक नजरिए से... अगर हम लोगों की आजीविका के मुद्दे को हल नहीं करते हैं, तो हम नर्क में पहुंच जाएंगे."

हालांकि, दूसरी तरफ ईरानी सरकार के अधिकारियों ने "कड़ा" रुख अपनाने का भी वादा किया है, और अराजकता पैदा करने के लिए स्थिति का फायदा उठाने के खिलाफ चेतावनी दी है. ईरान की मीडिया में इस विरोध-प्रदर्शन की कवरेज भी अलग-अलग रही है. कुछ मीडिया हाउस ने जनता की आर्थिक कठिनाइयों पर ध्यान केंद्रित किया है, और तो दूसरे इनको दंगाईयों का तमाशा बता रहे हैं.

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सवाल 5- ईरान में आखिरी बार विद्रोह कब हुआ था?

अभी ईरान में जो विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं वे 2022 में वहां देखी गई अशांति के मुकाबले छोटे है. ईरान में 2022 का आंदोलन महसा अमिनी की हिरासत में मौत से शुरू हुआ था, जिन्हें महिलाओं के लिए ईरान के सख्त ड्रेस कोड का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. उनकी मौत से देश भर में गुस्से की लहर फैल गई थी, जिसमें सुरक्षा बलों के दर्जनों सदस्यों सहित कई सौ लोग मारे गए थे. अभी जो ईरान में ताजा विरोध प्रदर्शन हो रहा है, वो राजधानी में शुरू हुआ और मंगलवार को कम से कम 10 विश्वविद्यालयों के छात्रों के इसमें शामिल होने के बाद फैल गया. अब यह विरोध-प्रदर्शन ईरान के छोटे शहरों तक भी फैल चुका है.

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