क्या जंग के बाद ईरान तबाह होने की जगह और मजबूत हो जाएगा?

खामेनेई की हत्या के बाद भी ईरान का प्रतिरोध मजबूत हुआ और वह युद्ध में टिके रहने की रणनीति अपना रहा है।

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  • ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्ध में आने वाले तीन हफ्तों तक जोरदार हमले जारी रखने का संकेत दिया
  • यदि अमेरिका बिना समझौते के युद्ध खत्म करता है तो ईरान पहले से अधिक शक्तिशाली और निडर बनकर उभरेगा
  • ईरान ने अमेरिका सेना के सामने मजबूती से जंग लड़ी है
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्य पूर्व में ईरान के साथ जारी जंग को लेकर देश को संबोधित किया. 19 मिनट लंबे भाषण में ट्रंप ने  ईरान युद्ध को लेकर कहा कि आने वाले 3 हफ्तों तक जोरदार हमले जारी रहेंगे. सवाल अब जंग के आखिरी स्वरूप, उसके एंडगेम को लेकर उठ रहा है. अमेरिका इस युद्ध को जल्द से जल्द खत्म करना चाहता है और अगर ट्रंप बिना किसी समझौते के जंग को खत्म करने का ऐलान करते हैं तो तेहरान पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बनकर उभरेगा. इस आर्टिकल में समझते हैं कि वो कौन सी वजहें हैं जो ईरानी हुकुमत को जंग के नुकसान के बाद भी ताकतवर बना देगी.

ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वह बिना किसी ठोस समझौते या सुरक्षा गारंटी के इस युद्ध से पीछे हट सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो यह ईरान पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली और निडर बन जाएगा. खाड़ी देशों के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी है कि महीनों के संघर्ष के बाद भी ईरान पस्त नहीं हुआ है, बल्कि उसने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर नाकेबंदी कर दी है और इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की योजना बना रहा है.

खाड़ी देशों को चुकानी पड़ेगी जंग की कीमत?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका बिना किसी नतीजे के पीछे हटता है, तो ईरान इसे अपनी बड़ी जीत के तौर पर देखेगा. इससे ईरान का मनोबल बढ़ेगा और वह खाड़ी देशों के तेल और गैस उत्पादन पर अपना नियंत्रण सख्त कर देगा. खाड़ी देशों को इस जंग की सामरिक और आर्थिक खामियाजा भुगतना पड़ेगा.

हॉर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवन रेखा है, अब ईरान के लिए एक बड़े हथियार में तब्दील हो चुका है. ईरान अब 'प्रादेशिक जल' (Territorial waters) का कार्ड खेलकर इस रास्ते से होने वाले व्यापार के नियम खुद तय करने की स्थिति में आ चुका है. 

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दुबई के बीहुथ रिसर्च सेंटर के निदेशक मोहम्मद बहारून ने रॉयटर्स को बताया कि जब तक खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, तब तक ईरान इस क्षेत्र को अपनी धमकियों से दहलाता रहेगा.  यह एक ऐसी असमानता पैदा कर देगा जहां ईरान युद्ध से 'अपराजित' होकर उभरेगा और उसके पास शिपिंग लेन और ऊर्जा प्रवाह को बाधित करने की पहले से अधिक शक्ति होगी.

खामेनेई की हत्या के बाद कैसे ईरान नहीं टूटा? 

इस जंग में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या कर दी. इसके बाद ईरान के भीतर प्रतिरोध की एक नई लहर पैदा हो गई. भले ही खामेनेई के बाद ईरान की शासन व्यवस्था में गहरा शून्य पैदा हो गया लेकिन जिस हमले का मकसद शासन को धराशायी करना था, उसने ईरान के संघर्ष को धार्मिक और सभ्यतागत रंग दे दिया. 

मिडिल ईस्ट के जानकार फवाज गेर्गेस के अनुसार, ईरान का शासन तंत्र, खास तौर से रिवोल्यूशनरी गार्ड्स, अब आत्मसमर्पण को 'पाप' और प्रतिरोध को 'पाक' मानने लगा है. अमेरिका ने ईरान की संस्थागत मजबूती और दशकों के प्रतिबंधों के बीच टिके रहने की उसकी क्षमता का गलत आकलन किया है. 

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ईरान को यह युद्ध जीतने के लिए अमेरिका या इजरायल को हराने की जरूरत नहीं है. दशकों से ईरान ने सीधे टकराव के बजाय 'प्रेशर पॉइंट्स' को पहचानने में निवेश किया है. ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले करके और हॉर्मुज को बंद करने की धमकी देकर, तेहरान ने वैश्विक तेल कीमतों में आग लगा दी है और दुनिया भर में महंगाई बढ़ा दिया है. ईरान की रणनीति साफ है यदि युद्ध आर्थिक रूप से असहनीय हो जाए, तो केवल टिके रहना ही जीत कहलाती है.

जानकार मानते हैं कि ईरान के पास ऐसे वैश्विक नेटवर्क और स्लीपर सेल्स हैं जो युद्ध के मैदान से बहुत दूर अमेरिका और इजरायली हितों को निशाना बना सकते हैं. आतंकवाद विशेषज्ञ मैग्नस रैनस्टोरप के अनुसा, ईरान एक 'मधुमक्खी' की तरह है, जिसके डंक दुनिया भर में फैले हुए हैं.

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