ईरान-इजरायल युद्ध ने धीमी कर दी विकास दर... IMF ने दे दिया बड़ा बयान

IMF के मुताबिक, आज यूरोप एक दोराहे पर है. मध्यपूर्व एशिया में जारी संकट की वजह से ऊर्जा आपूर्ति के झटके से विकास धीमा हो रहा है और मुद्रास्फीति बढ़ रही है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ईरान-इजरायल युद्ध का दुनिया पर पड़ रहे असर को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. IMF ने कहा है कि यदि मध्य पूर्व में युद्ध नहीं हुआ होता, तो हमने इस वर्ष अपने वैश्विक विकास पूर्वानुमान (global growth forecasts) को संशोधित कर 3.4% कर दिया होता. हालांकि, नए झटकों के साथ, अब 2026 में विकास दर धीमी होकर 3.1% होने का अनुमान है.  

IMF के मुताबिक, आज यूरोप एक दोराहे (crossroads) पर है. मध्यपूर्व एशिया में जारी संकट की वजह से ऊर्जा आपूर्ति के झटके (energy supply shock) से विकास धीमा हो रहा है और मुद्रास्फीति बढ़ रही है. यूरो क्षेत्र के लिए परिदृश्य ख़राब हो गया है, इस वर्ष विकास दर केवल 1.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है.दरअसल, स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर जारी संकट की वजह से वहां अब भी करीब 2000 कार्गो जहाज़ फंसे हुए हैं, और पिछले 56 दिनों से अनिश्चितता की वजह से क्रूड ऑयल और गैस की सप्लाई बुरी तरह से बाधित हुई है, जिसकी वजह से एनर्जी पर दुनिभर के देशों का खर्च बढ़ता जा रहा है.

बुधवार को IRGC के सैनिकों के हमले के बाद बढ़ी अनिश्चितता की वजह से Brent Oil Futures की कीमत फिर बढ़ने लगी है. शुक्रवार को ट्रेडिंग के दौरान एक समय ब्रेंट ऑयल futures की कीमत बढ़कर US$ 107 प्रति बैरल तक पहुंच गई. सामरिक तौर पर महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्गे से ऑयल कार्गो जहाज़ों की आवाजाही बाधित होने से अंतराष्ट्रीय एनर्जी मार्किट में करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो रही है, जिस वजह से उनकी कीमतें ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं.

भारत अपनी ज़रुरत का 85% से ज़्यादा कच्चा तेल अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार से आयात करता है. ऐसे में कच्चे तेल के और महंगा होने से तेल आयात का खर्च बढ़ता जा रहा है.पेट्रोलियम मंत्रालय की Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक मध्यपूर्व एशिया में जारी अनिश्चितता की वजह से 23 अप्रैल, 2026 को कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की कीमत बढ़कर US$ 108.55/बैरल के ऊँचे स्तर पर पहुंच गई.

सरकारी आकड़ों के मुताबिक, युद्ध शुरू होने से पहले फरवरी, 2026 में कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत 69.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी।यानी, मध्यपूर्व युद्ध एशिया में जारी अनिश्चितता की वजह से कच्चा तेल फरवरी, 2026 की औसत कीमत के मुकाबले 23 अप्रैल, 2026 को 39.54 डॉलर प्रति बैरल महंगा हुआ, यानि 57.29% की बढ़ोतरी.अप्रैल 2026 महीने के दौरान कच्चे तेल की औसत कीमत 21 अप्रैल तक 114.77 डॉलर प्रति बैरल बनी हुई है. मार्च, 2026 महीने के दौरान भी कच्चे तेल की औसत कीमत 113 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी.

Advertisement

यह भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट जंग के बाद भी 2026 में 6.5% की दर से बढ़ सकती है भारतीय अर्थव्यवस्था, दुनिया में सबसे तेज: IMF

Featured Video Of The Day
हरभजन सिंह और...राघव चड्ढा के पंजाब से दो तिहाई सांसद तोड़ने से क्या होगा?
Topics mentioned in this article