ईरान बनाम इजरायल और अमेरिकी की जंग के तीन हफ्ते बीत चुके हैं.ईरान के सैन्य ठिकानों को तबाह करने और शीर्ष नेताओं को मारने के बावजूद अमेरिका-इजरायल अपने उस सत्ता परिवर्तन मकसद में कामयाब होते नहीं दिख रहे हैं. न ही ईरान ने झुकने का कोई संकेत दिया है. इस बीच इजरायल ने ईरान के साथ पार्स गैस फील्ड पर हवाई हमला बोला तो उसने भी पलटवार में न केवल कतर में दुनिया के सबसे बड़े गैस उत्पादन क्षेत्र पर निशाना साधा. बल्कि सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन में भी ऐसे तेल-गैस प्लांट को भी भारी नुकसान पहुंचाया. इस बीच, ईरान के हमलों से खाड़ी देशों का सब्र का बांध टूटता दिख रहा है. 12 अरब देशों के विदेश मंत्रियों ने बैठक की है और ईरान को हमलों से बाज आने की चेतावनी दे डाली है. ऐसे में आशंका यह भी जताई जा रही है कि रमजान और ईद के बाद कहीं ये संघर्ष शिया बनाम सुन्नी देशों के टकराव में न बदल जाए.
12 मुल्कों की बैठक
सऊदी अरब, कुवैत, कतर, अजरबेजान, मिस्र, जॉर्डन, सीरिया, लेबनान, तुर्की, पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात समेत 12 देशों के विदेश मंत्रियों की गुरुवार को रियाद में बैठक हुई. इसमें कई शिया मुल्क भी शामिल थे. बैठक में ईरान से तुरंत पड़ोसी मुल्कों में हमले रोकने, दुश्मनी खत्म करने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने का सख्त संदेश दिया गया. साथ ही यूएन चार्टर के तहत खामेनेई सरकार को यह भी याद दिलाया गया कि उनके पास भी अपनी आत्मरक्षा का अधिकार है. हालांकि अभी तक सऊदी अरब, बहरीन, जार्डन, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, कतर जैसे देशों ने ईरान के हमलों पर जवाबी पलटवार नहीं किया है, बल्कि डिफेंस सिस्टम के सहारे ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोका है.
इजरायल और अमेरिका से जंग शुरू होने के बाद से ईरान कहता रहा है कि वो पड़ोसी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाता रहेगा. वहीं अरब देशों के बड़े समूह ने बैठक कर संकेत दिया है कि अगर ईरान नहीं माना तो उन्हें जवाबी कार्रवाई को मजबूर होना पड़ सकता है. सऊदी अरब, कतर, यूएई, तुर्की जैसे बड़े मुल्क ईरान पर एक्शन ले सकते हैं. जबकि ईरान को दूसरे शिया मुल्कों का समर्थन मिलना भी मुश्किल है. ईरान को समर्थित सशस्त्र गुटों हिजबुल्ला, हमास और हुती विद्रोहियों का ही सहारा है.
मिडिल ईस्ट के शिया और सुन्नी देश
शिया बहुल देश
1. ईरान- शिया देशों में शिया मुसलमानों की आबादी बहुमत में है और वहां की सत्ता या धार्मिक व्यवस्था में उनकी गहरी पकड़ है. ईरान दुनिया का सबसे बड़ा शिया बहुल देश है. यहां विलायत-ए-फकीह यानी धार्मिक नेतृत्व के तहत शासन व्यवस्था चलती है. ईरान की 90 फीसदी से ज्यादा आबादी शिया है.
2. इराक की लगभग 60-65% आबादी शिया मुसलमानों की है. सद्दाम हुसैन के बाद से यहां की राजनीति में शियाओं की भूमिका अहम रही है.
3. बहरीन (Bahrain)की बहुसंख्यक आबादी (लगभग 60-70%) शिया है, लेकिन यहां का शाही परिवार सुन्नी है.
4. लेबनान (Lebanon)में शिया सबसे बड़ा धार्मिक समूह है. लेबनान के ही एक हिस्से में सक्रिय ईरान समर्थित सशस्त्र गुट हिजबुल्ला इजरायल के लिए सिरदर्द बना हुआ है.
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सुन्नी बहुल देश
1. सऊदी अरब - मध्य पूर्व के अधिकांश देश सुन्नी बहुल हैं और वहां सुन्नी शासन है.सऊदी अरब (Saudi Arabia): सुन्नी इस्लाम (खासकर वहाबी और सलाफी विचारधारा) का मुख्य केंद्र है.
2. संयुक्त अरब अमीरात (UAE)भी सुन्नी बहुल और उदारवादी इस्लामिक नीतियों के लिए जाना जाता है. वहां भी अमेरिका का बड़ा सैन्य ठिकाना है.
3. तुर्की (Turkey) की लगभग 90% से अधिक आबादी सुन्नी है. तुर्की अमेरिका और यूरोप के सैन्य संगठन नाटो का सदस्य है. तुर्की के राष्ट्रपति रेसिप तैय्यप एरदोगान भी ईरान के हमलों से परेशान हैं.
4. मिस्र (Egypt) भी सुन्नी जगत का एक बड़ा अहम है. सुन्नी मुसलमानों का सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्र अल अजहर विश्वविद्यालय मिस्र में है.
5. जॉर्डन (Jordan) का हाशिमाइत राजपरिवार सुन्नी है.अमेरिका ने जॉर्डन में भी अपना बेस बना रखा है.
6. कतर (Qatar) सुन्नी बहुल देश है. कतर के रास लफान गैस फील्ड एरिया में ईरान ने हमला किया है, और उसका करीब 17 फीसदी उत्पादन ठप हो गया है. मिडिल ईस्ट में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा अल उदेद एयर बेस (Al Udeid Air Base) यहीं है.ये यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का एक मुख्यालय भी है. यहां 10 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं.
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7. कुवैत और ओमान में भी सुन्नी बहुमत है. ओमान में 'इबादी' (Ibadi) समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में हैं, जो न पूरी तरह शिया हैं न सुन्नी.
8. सीरिया में भी सुन्नी मुस्लिम आबादी 70-75% है.इनमें अरब सुन्नी, कुर्द और तुर्कमेन शामिल हैं. शिया भी 10-12% है. पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद और उनका परिवार इसी समुदाय से ताल्लुक रखता था. सीरिया में 10 फीसदी ईसाई आबादी है. जबकि द्रुज समुदाय और अन्य छोटे शिया समूह भी रहते हैं.














