ईरान की जंग में फंसे मेडिकल छात्र, भारत सरकार से लगाई सुरक्षित वापसी की गुहार

अखिल भारतीय मेडिकल छात्र संघ के उपाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मोमिन खान ने एक वीडियो मैसेज में बताया कि ईरान में अभी भी 26 छात्र फंसे हुए हैं. ईरान-अजरबैजान बॉर्डर पर भी करीब 84 छात्र स्वदेश लौटने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं.

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ईरान युद्ध के बाद केंद्र सरकार हजारों भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी करा चुकी है, लेकिन अब भी भारत के बहुत से छात्र अलग-अलग सीमावर्ती इलाकों में फंसे हुए हैं. इन छात्रों और उनके परिजनों में डर का माहौल है. उन्होंने सुरक्षित निकासी के लिए सरकार से गुहार लगाई है. 

बॉर्डर पर अटके हैं करीब 84 छात्र

ईरान इजरायल अमेरिका युद्ध के बीच अखिल भारतीय मेडिकल छात्र संघ के उपाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मोमिन खान ने एक वीडियो मैसेज में बताया कि ईरान में अभी भी 26 छात्र फंसे हुए हैं. ईरान-अजरबैजान बॉर्डर पर भी करीब 84 छात्र स्वदेश लौटने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. 

'बॉर्डर पार कराने की प्रक्रिया धीमी'

डॉ. खान का कहना है कि बॉर्डर पार कराने की प्रक्रिया काफी धीमी है. सुरक्षा कारणों से एक बार में सिर्फ 10-10 छात्रों को एक विशेष कोड देकर निकाला जा रहा है. इसकी वजह पिछले 15-20 दिनों से छात्र अनिश्चितता की स्थिति में हैं. भारतीय दूतावास हालांकि उनकी हरसंभव मदद कर रहा है, जरूरत की हर चीज उपलब्ध कराई जा रही है. लेकिन ईरान के मौजूदा हालात में कुछ भी सुरक्षित नहीं है. 

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टिकट बुक करने में मुश्किलें

मोमिन खान ने आगे बताया कि ईरान और आर्मेनिया की सीमा पर लगभग 53 छात्र फंसे हुए हैं. वो बार-बार भारत लौटने के लिए टिकट बुक करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन दो-तीन घंटे में ही उनकी टिकट रद्द हो जा रही हैं. छात्र लगातार फोन करके मदद की गुहार लगा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि ईरान स्थित भारतीय दूतावास तुरंत हस्तक्षेप करे और सभी फंसे हुए भारतीय छात्रों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करे. 

अब तक कितने भारतीयों की वापसी?

इस बीच भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को ब्रीफिंग में बताया कि ईरान में संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 1,171 भारतीयों को आर्मेनिया और अजरबैजान के जमीनी रास्तों के जरिए ईरान से सुरक्षित बाहर निकाला गया है.  इनमें 818 छात्र शामिल हैं. 977 भारतीय आर्मेनिया से और 194 अजरबैजान से होकर निकाले गए हैं. ईरान युद्ध शुरू होने के वक्त ईरान में 9 हजार से अधिक भारतीय छात्र और बिजनेसमैन थे. बहुत से छात्र तेहरान और इस्फहान जैसे शहरों को छोड़कर दूसरे सुरक्षित शहरों में जा चुके हैं. हजारों लोग जमीनी रास्ते से होकर बॉर्डर पार कर चुके हैं. 

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संघर्ष में अब तक 8 भारतीयों की मौत

सरकार ने ये भी बताया कि मंगलवार को दुबई में हुए हमलों में तीन भारतीय नागरिक मामूली रूप से घायल हुए हैं जिनका अस्पतालों में इलाज चल रहा है. संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक कुवैत, यूएई, सऊदी अरब, ओमान जैसे खाड़ी देशों में 8 भारतीयों की जान जा चुकी है. एक भारतीय नागरिक लापता बताया जा रहा है. सरकार ने हालात पर लगातार नजर बनाए रखने की बात कही है. 

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