ईरान नहीं, टॉयलेट दे रहा अमेरिकी सैनिकों को टेंशन; सबसे बड़े विमानवाहक पोत पर जवान क्यों परेशान?

मिडिल ईस्ट की तरफ बढ़ रहे दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोत USS जेराल्ड आर. फोर्ड पर तैनात 5 हजार से अधिक नाविकों को फिलहाल असली चिंता ईरान की नहीं बल्कि सुबह सबेरे हल्का होने की है.

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  • अमेरिकी विमानवाहक पोत USS जेराल्ड आर फोर्ड 8 महीनों से समुद्र में है और तैनाती का नया रिकॉर्ड बना सकता है
  • लंबी तैनाती से पोत के लगभग 650 टॉयलेट्स में से अधिकतर चोक हो गए हैं जिससे गंभीर समस्या खड़ी हो गई है
  • बंद टॉयलेट साफ करने में पसीने छूट रहे हैं. टॉयलेट्स में ऐसी-ऐसी चीजें मिल रही हैं जिनकी उम्मीद नहीं थी.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ ईरान के ऊपर सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं और मिडिल ईस्ट में हाल के दशकों का सबसे बड़ा नौसैनिक जमावड़ा खड़ा कर रहे हैं, लेकिन दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोत USS जेराल्ड आर. फोर्ड पर तैनात 5 हजार से अधिक नाविकों को फिलहाल असली चिंता ईरान की नहीं बल्कि सुबह सबेरे हल्का होने की है. दरअसल इस चलते-फिरते समुद्री शहर के लगभग 650 टॉयलेट चोक हो रहे हैं. 

जून से समुद्र में USS जेराल्ड आर. फोर्ड 

इस समस्या की वजह USS जेराल्ड आर. फोर्ड की लंबे समय से समुद्र में तैनाती है. यह जहाज पिछले साल जून से समुद्र में है. वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के गिरफ्तारी मिशन के बाद, इस पोत पर तैनात नाविकों को लगा था कि अब घर वापसी हो सकेगीं. लेकिन ईरान के साथ तनाव बढ़ने पर उनकी तैनाती को आगे बढ़ा दिया गया. 

बन सकता है तैनाती का रिकॉर्ड 

शांति काल में एक पोत आमतौर पर 6 महीने के लिए समुद्र में रहता है, लेकिन यूएसएस फोर्ड के सैनिक पिछले 8 महीनों से समुद्र में हैं. संभावना है कि उनकी तैनाती का समय बढ़कर 11 महीने तक जा सकता है. अगर ऐसा हुआ तो यह अमेरिकी नौसेना के इतिहास का नया रिकॉर्ड होगा. पोत को रेगुलर मेंटिनेस की जरूरत होती है और लगातार समुद्र में रहने से इसका प्रॉपर मेंटिनेंस नहीं हो पा रहा है. 

$13 अरब का पोत और टॉयलेट जाम 

इतने लंबे समय से समुद्र में तैनाती की वजह से इस विमानवाहक पोत पर एक नई और गंभीर समस्या खड़ी हो गई है. पोत के टॉयलेट चोक हो गए हैं. यह सुनने में विचित्र लग सकता है, लेकिन जिस जहाज को बनाने में 13 अरब डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) खर्च हुए, वह अब सीवेज की समस्या से जूझ रहा है. NPR की रिपोर्ट बताती है कि पोत का वैक्यूम सिस्टम इतना पेचीदा है कि अगर एक टॉयलेट में गड़बड़ी होती है तो पूरे हिस्से का सेक्शन काम करना बंद कर देता है.

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पाइप में फंसी टी-शर्ट, रस्सी जैसी चीजें

इन बंद टॉयलेट्स को साफ करने में सफाई कर्मियों के पसीने छूट रहे हैं. टॉयलेट्स में ऐसी-ऐसी चीजें मिल रही हैं, जिनकी उम्मीद नहीं थी. रिपोर्ट्स बताती हैं कि चोक टॉयलेट्स को खोलने के दौरान पाइपों में फंसी टी-शर्ट से लेकर 4 फुट लंबी रस्सियां तक मिली है. ऐसी ही चीजों को कारण टॉयलेट जाम हो रहे हैं. मेंटिनेंस स्टाफ चौबीसों घंटे लीकेज ठीक करने में जुटे हैं लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रही है.

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घोस्ट मोड में आ रही घर की याद

चोक टॉयलेट्स के अलावा पोत पर मौजूद नाविकों को घर की याद भी सता रही है. अधिकतर क्रू मेंबर्स 30 साल से कम उम्र के हैं. सीक्रेसी की वजह से पोत अक्सर घोस्ट मोड में रहता है. इसकी वजह से ये सैनिक अपने परिजनों से संपर्क तक नहीं कर पाते. खबरों के मुताबिक, कई सैनिक तो इतना दुखी हो चुके हैं कि यह मिशन खत्म होते ही नेवी छोड़ने पर विचार कर रहे हैं. 

मिडिल ईस्ट में सबसे बड़ी तैनाती

गौरतलब है कि अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में इस वक्त अपनी ताकत झोंक दी है. ट्रंप ने इलाके में एक दर्जन से ज्यादा युद्धपोत तैनात कर दिए हैं. एक विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन  वहां पहले ही पहुंच चुका है. अब दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत USS फोर्ड भी रास्ते में है. समुद्र में दो-दो एयरक्राफ्ट कैरियर की मौजूदगी दुर्लभ है. ये दिखाता है कि ट्रंप कुछ बड़ा करने की प्लानिंग कर रहे हैं. 

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