- ईरान सरकार ने जनवरी में हुए विद्रोह के दौरान सैन्य ठिकाने पर हमला करने के आरोपी अली फहीम को फांसी दी है
- सुप्रीम कोर्ट ने अली फहीम की फांसी की सजा को सही ठहराया है
- इसी केस में अमीर हुसैन हातामी, मोहम्मद अमीन बिगलारी और शाहिन वाहेद परस्त को भी फांसी दी गई है
अमेरिका से जंग के बीच ईरान की सरकार अपने विद्रोही नागरिकों को धड़ल्ले से फांसी के फंदे से लटका रही है. ईरान में जनवरी के महीने में हुए विद्रोह-प्रदर्शन के दौरान एक सैन्य ठिकाने पर हमला करने और हथियारों के भंडार तक पहुंचने की कोशिश करने के आरोप में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को फांसी दे दी गई है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार ईरान की सरकारी मीडिया ने सोमवार को यह जानकारी दी. यह सजा तब दी गई जब सुप्रीम कोर्ट ने उसकी सजा को सही ठहराया. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार उस व्यक्ति का नाम अली फहीम था.
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान इस घटना से जुड़े तीन और लोगों को भी पहले ही फांसी दे चुका है. इनमें अमीर हुसैन हातामी को पिछले हफ्ते की शुरुआत में और मोहम्मद अमीन बिगलारी तथा शाहिन वाहेद परस्त को रविवार को फांसी दी गई थी. एमनेस्टी इंटरनेशनल नाम के मानवाधिकार संगठन के अनुसार इसी मामले से जुड़ा एक और व्यक्ति आने वाले दिनों में फांसी का सामना कर सकता है.
जनवरी में क्या हुआ था?
जनवरी में ईरान के अंदर पूरे देश में सरकार के खिलाफ बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए थे. इस्लामी गणराज्य ईरान के इतिहास में इन प्रदर्शनों पर सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें दबा दिया गया था. सरकार ने कहा कि आरोपियों ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान हथियार और सैन्य उपकरण कब्जे में लेने की कोशिश की थी. अधिकारियों ने उन्हें “दंगाई” बताया जो राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम कर रहे थे.
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि इस अशांति से जुड़े कई आरोपियों को फांसी का सामना करना पड़ रहा है. संगठन ने अपनी हाल की रिपोर्ट में कहा कि ऐसे मामलों में हिरासत में लिए गए लोगों को यातना दी गई और उनके मुकदमे “बहुत ही अनुचित” तरीके से चलाए गए.
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