- अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के अल्बोर्ज प्रांत का सबसे ऊंचा B1 पुल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया
- B1 पुल की ऊंचाई लगभग 136 मीटर और लंबाई 1050 मीटर है, जो मिडिल ईस्ट में सबसे ऊंचा माना जाता है
- ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने राजधानी में 100 वर्ष पुराने मेडिकल रिसर्च सेंटर के तबाह होने की पुष्टि की है
ईरान-इजरायल युद्ध अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है. इस युद्ध की जद में दोनों देशों की कई इमारतें और पुल जैसे बुनियादी ढांचे आ रहे हैं. दोनों तरफ से मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए जा रहे हैं. इस बीच अमेरिका और इजरायल ने हमला करके ईरान के सबसे बड़े पुल 'B1' को तबाह कर दिया है. इस पुल के टूटने और ताश के पत्तों की तरह बिखरने का वीडियो भी सामने आया है, जो इस हमले की भयावहता को दर्शा रहा है.
मिडिल ईस्ट का सबसे ऊंचा पुल है B1
यह B1 ब्रिज ईरान के अल्बोर्ज प्रांत के करज शहर में स्थित है. यह ईरान की इंजीनियरिंग की मिशाल और एक अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है. इसे मिडिल ईस्ट का सबसे ऊंचा पुल माना जाता है. इसकी ऊंचाई लगभग 136 मीटर है. इस पुल की कुल लंबाई 1,050 मीटर है. यह आठ सेक्शन में विभाजित है, जिसमें सबसे लंबा सेक्शन 176 मीटर का है. इस प्रोजेक्ट को बनाने में लगभग 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब 37,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च आया था. इस पुल का काम लगभग पूरा होने वाला था. लेकिन इससे पहले अमेरिका और इजरायल के हमले में यह पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. पुल के टूटने के साथ ही कई इलाकों में बिजली गुल होने की खबरें मिलीं.
ईरान का 100 साल पुराना मेडिकल रिसर्च सेंटर तबाह
इससे पहले ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें पोस्ट कर दावा किया कि राजधानी स्थित 100 साल पुराने मेडिकल रिसर्च सेंटर पर हमला कर उसे तबाह कर दिया गया है. स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन केरमनपोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक पोस्ट में अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से इस 'आक्रामकता' की ओर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने इसे वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था पर सीधा हमला करार दिया. यह संस्थान 1920 में स्थापित हुआ था और देश के मेडिकल रिसर्च और दवा विकास में इसकी अहम भूमिका रही है. तस्वीरों में इमारत के कुछ हिस्से पूरी तरह से तबाह दिखे, जबकि कुछ मलबे में बदले हुए देखे जा सकते हैं.
Iran Bridge
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युद्ध में ईरान को हुआ काफी नुकसान
28 फरवरी को यूएस-इजरायल की संयुक्त कार्रवाई से शुरू हुए संघर्ष में ईरान को काफी नुकसान हुआ है. बड़ी तादाद में लोगों की जान गई है तो सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई समेत कई बड़े नेता और शीर्ष अधिकारी हमले का शिकार हो गए हैं. ईरान भी जवाबी कार्रवाई में गल्फ देशों में स्थित अमेरिकी प्रतिष्ठानों और सैन्य बेस को निशाना बना रहा है.
संघर्ष के 34वें दिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने देश के नाम संबोधन में दावा किया कि वाशिंगटन ने ईरानी सेना को तबाह कर दिया है. वह अपने युद्ध के लक्ष्यों को हासिल करने के करीब है. इसके बाद से ही ईरान ने इजरायल पर मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए हैं। वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि उनके देश का अमेरिका, यूरोप या पड़ोसी देशों के लोगों के प्रति कोई बैर-भाव नहीं है.
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