- अजरबैजान ने दावा किया है कि उसके नखिचवान इलाके में ईरान की तरफ से ड्रोन हमले किए गए
- अजरबैजान का रक्षा मंत्रालय इस हमले को संप्रभुता का उल्लंघन मानते हुए कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी
- अजरबैजान ने ईरानी दूत को तलब कर इस घटना पर विरोध जताया और इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया
मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच अब ईरान और उसके पड़ोसी देश अजरबैजान के रिश्ते भी बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गए हैं. अजरबैजान ने दावा किया है कि उसके नखिचवान इलाके में ईरान की तरफ से ड्रोन हमले किए गए हैं. अजरबैजान ने ईरानी ड्रोन हमले के बाद कड़ा रुख अपनाया है. अजरबैजान के रक्षा मंत्रालय ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए जवाबी कार्रवाई करने की कसम खाई है. इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनातनी काफी तेज हो गई है.
एयरपोर्ट और स्कूल के पास गिरे ड्रोन, दो नागरिक घायल
अजरबैजान के विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, दिन के समय कम से कम दो ड्रोन आर्मेनिया से अलग अजरबैजान के नखिचवान क्षेत्र की सीमा में घुसे. इनमें से एक ड्रोन नखिचवान हवाई अड्डे के टर्मिनल भवन पर आ गिरा, जबकि दूसरा शेकेराबाद गांव में एक स्कूल की इमारत के पास क्रैश हुआ. इस हमले में दो आम नागरिक घायल हो गए हैं और एयरपोर्ट को भी काफी नुकसान पहुंचा है.
'जवाबी कार्रवाई करेंगे'
इस घटना के बाद अजरबैजान ने कड़ा रुख अपनाया है. बाकू स्थित रक्षा मंत्रालय ने सख्त लहजे में कहा है कि देश की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी जवाब दिया जाएगा. मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि इस हमले को बिना जवाब दिए नहीं छोड़ा जाएगा. इसके अलावा, अजरबैजान ने बाकू में मौजूद ईरानी दूत को तलब कर इस घटना पर कड़ा विरोध भी दर्ज कराया है और कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सीधा उल्लंघन है.
ईरान ने इन दावों को किया खारिज
दूसरी तरफ, ईरान ने अजरबैजान के इन तमाम दावों को खारिज किया है. ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान जारी कर साफ किया है कि उन्होंने अजरबैजान गणराज्य की तरफ कोई ड्रोन नहीं दागा है. ईरान के सरकारी टीवी चैनल ने इस पूरी घटना का ठीकरा इजरायल पर फोड़ते हुए कहा है कि यह मुस्लिम देशों के बीच दरार डालने और रिश्ते खराब करने की 'जायोनी शासन' (इजरायल) की एक सोची-समझी साजिश है.
आखिर क्यों हैं दोनों देशों के बीच मतभेद?
इस ताजा तनाव के पीछे एक बड़ा भू-राजनीतिक कारण भी है. दरअसल, अजरबैजान और इजरायल काफी करीबी सहयोगी हैं और इजरायल बाकू का एक प्रमुख हथियार सप्लायर है. ईरान को हमेशा से यह डर सताता रहा है कि इजरायल उसके खिलाफ किसी बड़े हमले के लिए अजरबैजान की जमीन का इस्तेमाल कर सकता है. हालांकि, जब पिछले साल इजरायल ने ईरानी ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमला किया था, तब अजरबैजान ने ईरान को भरोसा दिलाया था कि वह अपनी सरजमीं का इस्तेमाल तेहरान के खिलाफ नहीं होने देगा.
यह भी पढ़ें: ईरान का अगला सुप्रीम लीडर कौन? मुजतबा खामेनेई समेत 6 नाम रेस में













