अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी का खुलासा: पाकिस्तान के हमलों से 1 लाख से अधिक अफगानी बेघर, 76 नागरिकों की गई जान

नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के हमलों और तालिबान-पाक संघर्ष के कारण 1.15 लाख से अधिक अफगानी बेघर हुए हैं. कुनार और नंगरहार में हमलों में 76 नागरिक मारे गए, 800 घर नष्ट हुए और मानवीय सहायता की कमी से हालात और बिगड़ रहे हैं.

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  • अफगानिस्तान और PAK के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण अब तक 1 लाख 15 हजार से ज्यादा अफगानी नागरिक घर छोड़ चुके हैं.
  • हमलों के कारण हजारों परिवार शरणस्थलों में रह रहे हैं और पानी, स्वास्थ्य सेवाएं तथा शिक्षा तक पहुंच खत्म हो गई.
  • फरवरी से शुरू हुए PAK हमलों में 76 अफगानी नागरिक मारे गए और 213 लोग घायल हुए.
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अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते संघर्ष ने हजारों लोगों की जिंदगी उथल-पुथल कर दी है. अंतर्राष्ट्रीय मानवीय संगठन नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल (NRC) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान-पाकिस्तान की लड़ाई के चलते अब तक 1,15,000 से अधिक अफगानी नागरिक अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो चुके हैं.

'लोगों का अस्तित्व खतरे में'

अफगानिस्तान में एनआरसी के निदेशक जैकोपो कैरीडी ने कहा कि लगातार हो रहे हमलों के कारण लोग सुरक्षित रहने के लिए घरों से भाग रहे हैं. उनके मुताबिक, 'हजारों परिवार अस्थायी कैंपों और स्थानीय लोगों की दया पर आश्रय ले रहे हैं. कई लोग जर्जर घरों को ऊंचे किराए पर लेने को मजबूर हैं. साफ पानी, स्वास्थ्य सेवाएं और बच्चों की शिक्षा तक पहुंच लगभग खत्म हो गई है.'

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कुनार-नंगरहार में पाकिस्तानी हमले: 76 मौतें, 213 घायल

एनआरसी की रिपोर्ट बताती है कि फरवरी से शुरू हुए पाकिस्तानी हमलों में 76 अफगानी नागरिक मारे गए जबकि 213 लोग घायल हुए. सबसे ताज़ा और खौफनाक हमला 16 मार्च को काबुल स्थित एक ड्रग रिहैबिलिटेशन हॉस्पिटल पर एयरस्ट्राइक थी, जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत हुई. मानवीय एजेंसियों के मुताबिक, इस तरह शहरी इलाकों को निशाना बनाना संघर्ष के और बढ़ने की चेतावनी है.

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800 घर तबाह, कई परिवार वर्षों पीछे चले गए

एनआरसी का कहना है कि अब तक करीब 800 घर पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट हो चुके हैं और लोगों को इस नुकसान से उबरने में सालों लग सकते हैं. जैकोपो कैरीडी ने साफ कहा, 'लड़ाई में शामिल सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करना चाहिए. आम लोगों के बुनियादी ढांचे को कभी निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए.'

जमीनी हकीकत: 'रात 10 बजे अचानक गोलाबारी शुरू हुई…'

65 वर्षीय अफगान नागरिक बख्तियार ने अपनी पीड़ा बताई कि कैसे उन्हें छह बच्चों के साथ तोरखम बॉर्डर के पास अपने घर से जान बचाकर भागना पड़ा. एनआरसी के हवाले से उन्होंने बताया, 'रात करीब 10 बजे अचानक रॉकेट और गोलियां चलने लगीं. हमले इतने तेज हो गए कि बाहर निकलना ही एकमात्र रास्ता था.'

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फंडिंग में कटौती ने संकट और गहरा किया

NRC का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय सहायता में भारी कटौती के कारण अफगानिस्तान अब दुनिया के सबसे कम फंड मिलने वाले संकटग्रस्त देशों में शामिल हो चुका है. लड़ाई के चलते जो थोड़ी मदद पहुंच भी रही थी, वह भी रुकती जा रही है.

पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष: संघर्षविराम की कोशिशें नाकाम

बता दें कि 21 फरवरी को अफगानी इलाके में पाकिस्तानी ऑपरेशन के बाद, अफगानिस्तान ने 27 फरवरी को जवाबी हमला शुरू किया. सऊदी अरब, कतर और तुर्की जैसे मध्यस्थ देशों के आग्रह पर, अफगानिस्तान ने ईद के लिए ‘राद अल-ज़ुल्म' ऑपरेशन रोकने का ऐलान किया. पाकिस्तान ने भी ईद के लिए ऑपरेशन रोकने की घोषणा की, लेकिन अफगानिस्तान ने कहा कि पाक सेना ने सीजफायर का पालन नहीं किया.

अफगान सेना प्रमुख फसीहुद्दीन फितरत ने शुक्रवार को दावा किया कि सीजफायर के बावजूद पाकिस्तानी सेना ने डूरंड लाइन के पास हमले किए… यह इस्लामाबाद की वादाखिलाफी दिखाता है. अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सीमा के पास पाकिस्तानी हमलों में कई लोगों की मौत हुई है.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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