'कनाडा ने 40 सालों में आतंकवाद के खिलाफ कुछ नहीं किया': कनाडा में बोले भारत के राजदूत

भारतीय दूत ने कनाडा के सरकारी चैनल पर बैठकर सीधा जवाब दिया है. उन्होंने चरमपंथी नेटवर्कों पर मुकदमा चलाने या उन्हें साफ करने में कनाडा की दशकों की विफलता की ओर इशारा करते हुए कनाडा को ही कटघरे में खड़ा कर दिया.

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दिनेश पटनायक ने कनाडा पर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई न करने का आरोप लगाया (फाइल फोटो)
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  • भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने कनाडा की आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में 40 वर्षों की विफलता पर आलोचना की
  • भारतीय उच्चायुक्त ने खालिस्तानी आतंकवादियों की गतिविधियों को लेकर कनाडा की निष्क्रियता को उजागर किया
  • पटनायक ने कहा कि किसी हत्याकांड में भारत के किसी अधिकारी की संलिप्तता साबित हुई तो सरकार स्वयं कार्रवाई करेगी
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भारत ने कनाडा को उसकी जमीन पर सक्रिय आतंकवादी तत्वों पर कार्रवाई करने में 40 सालों से विफल रहने के लिए खरी खोटी सुनाई है. कनाडा में भारत के उच्चायुक्त, दिनेश पटनायक ने एक इंटरव्यू में आरोप लगाया कि कनाडाई सरकार की लंबी निष्क्रियता ने भारत को निशाना बनाने वाले उग्रवाद और हिंसा के लिए वहां अनुकूल वातावरण तैयार किया है. उन्होंने यह इंटरव्यू कनाडा के सरकारी ब्रॉडकास्टर सीबीसी को दिया है.

यह इंटरव्यू उस समय आया है जब ब्रिटिश कोलंबिया के प्रधान मंत्री डेविड एबी भारत में एक व्यापार मिशन का नेतृत्व कर रहे थे और कनाडा की सरकार नई दिल्ली के साथ संबंधों में नरमी का संकेत दे रही है. लेकिन इस इंटरव्यू का टोन बड़ी जल्दी बदल गया. बातचीत अर्थशास्त्र से परे चली गई, यहां द्विपक्षीय संबंधों में सबसे संवेदनशील मुद्दों पर बात होने लगी- खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या और कनाडा में मौजूद चरमपंथी समूहों को लेकर वहां की सरकार की निष्क्रियता.

"सबूत कहां है?"

पटनायक ने सीबीसी एंकर के बार-बार इस दावे का जोरदार विरोध किया कि कनाडाई खुफिया और पुलिस के पास भारतीय एजेंटों को निज्जर की हत्या से जोड़ने वाली "विश्वसनीय जानकारी" थी. भारत के उच्चायुक्त ने पूछा, "सबूत कहां है? ये ऐसे आरोप हैं जिनको साबित करने के लिए सबूत नहीं हैं. आरोप लगाना हमेशा आसान होता है."

पटनायक एक कदम और भी आगे बढ़ गए. उन्होंने चरमपंथी नेटवर्कों पर मुकदमा चलाने या उन्हें साफ करने में कनाडा की दशकों की विफलता की ओर इशारा करते हुए कनाडा को ही कटघरे में खड़ा कर दिया. पटनायक ने विशेष रूप से 1985 के एयर इंडिया बम विस्फोट की अनसुलझे मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा, "हम पिछले 40 वर्षों से कनाडा में आतंकवाद के बारे में बात कर रहे हैं. किसी ने इसके बारे में क्या किया है? एक भी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया गया है... एयर इंडिया बम विस्फोट की जांच से अभी तक कुछ नहीं निकला है."

बता दें कि 1985 के एयर इंडिया बम विस्फोट में 329 लोग मारे गए थे, जिनमें से अधिकांश कनाडाई थे.

भारतीय उच्चायुक्त ने कनाडा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि जब भारत कनाडा में सक्रिय संदिग्ध आतंकवादियों की जानकारी देता है तो कनाडा सबूत मांगता है. लेकिन बदले में उम्मीद करता है कि अपनी सरकार के खिलाफ लगे अप्रमाणित आरोपों का जवाब देगा. उन्होंने कहा, "जब मैं आप पर आरोप लगाता हूं और आप मुझसे कहते हैं कि सबूत पर्याप्त नहीं हैं, तो मैं इससे सहमत होता हूं. लेकिन जब आप मुझ पर आरोप लगाते हैं और मैं आपसे कहता हूं कि सबूत पर्याप्त नहीं हैं, तब भी तो आपको इसे उसी तत्परता से स्वीकार करना चाहिए."

पूरे इंटरव्यू के दौरान, पटनायक ने इस मुद्दे को भारत सरकार पर विश्वास के रूप में प्रस्तुत करने के एंकर के प्रयासों का जोरदार खंडन किया. उन्होंने कहा, ''भारत सरकार ऐसी हरकतें नहीं करती, कभी नहीं करती.'' उन्होंने कहा कि अगर सबूतों के आधार पर कभी भी किसी व्यक्तिगत अधिकारी की संलिप्तता सामने आई तो "हम स्वयं कार्रवाई करेंगे." उन्होंने कहा, "हमें इस पर कार्रवाई करने के लिए आपकी जरूरत नहीं है."

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उन्होंने इस नैरेटिव को भी खारिज कर दिया कि कनाडा में अलगाववादियों द्वारा जनमत संग्रह कराना भारत की शिकायत के मूल में था. उन्होंने कहा, "हमने कभी नहीं कहा कि जनमत संग्रह कराना अपराध है. हमने कहा कि इसमें शामिल लोग वे लोग हैं जो भारत में अपराधों के लिए वांटेड हैं या जो विदेश में आतंकवादी गतिविधि कर रहे हैं."

भारतीय दूत ने कनाडा के सरकारी चैनल पर बैठकर सीधा जवाब दिया है. एक बिंदु पर तो उन्होंने दर्शकों को यह भी याद दिलाया कि सरे में चल रहा निज्जर पर अदालती मामला चार व्यक्तियों के खिलाफ है, भारतीय राज्य के खिलाफ नहीं. उन्होंने सीधा सवाल किया, "राज्य के खिलाफ मामला कहां है?".

पटनायक ने नई दिल्ली के स्टैंड को भी संक्षेप में बताया. उन्होंने कहा कि दोषी साबित होने तक कानून की नजर में निर्दोष होते हैं. तो आइए कानून को अपना काम करने दें. उन्होंने सुझाव दिया कि तब तक, कनाडा का रिकॉर्ड आतंकवाद के खिलाफ सतर्कता नहीं बल्कि कार्रवाई करने में लंबी और महंगी साबित होने वाली विफलता को दर्शाता है.

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