PM मोदी ने क्यों कहा 'वर्ल्ड ऑर्डर' भारत के पक्ष में बदल रहा? नया सिस्टम और मैसेज समझिए

India- US Trade Deal: सूत्रों के अनुसार एनडीए की बैठक में पीएम मोदी ने कहा, "मैंने कहा था कि वर्ल्‍ड ऑर्डर बदलेगा. कोविड के बाद वो दिख रहा है और आज वर्ल्‍ड ऑर्डर भारत के पक्ष में ट्विस्‍ट हो रहा है."

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India- US Trade Deal: पीएम मोदी ने क्यों कहा कि वर्ल्ड ऑर्डर बदल रहा है
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  • भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया है
  • प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्ल्ड ऑर्डर भारत के पक्ष में बदल रहा है और यह स्पष्ट दिख रहा है
  • भारत ने छह महीने में पांच व्यापार समझौते किए हैं जिनमें अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देश शामिल हैं
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India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता हो चुका है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी के बीच फोन कॉल के बाद इस डील का ऐलान हुआ. अब अमेरिका के अंदर भारतीय सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ की जगह केवल 18 प्रतिशत का टैरिफ लगेगा. मंगलवार, 3 फरवरी को NDA की संसदीय दल बैठक बंद कमरे में हुई. सूत्रों ने बताया है कि यहां पीएम मोदी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के निहितार्थ के बारे में बात की. पीएम मोदी ने यहां कहा कि वर्ल्ड ऑर्डर भारत के पक्ष में बदल रहा है. चलिए समझते हैं कि पीएम मोदी ने ऐसा क्यों कहा है.

पीएम मोदी ने क्या कहा? 

सूत्रों के अनुसार एनडीए की बैठक में पीएम मोदी ने कहा, 'मैंने कहा था कि वर्ल्‍ड ऑर्डर बदलेगा. कोविड के बाद वो दिख रहा है और आज वर्ल्‍ड ऑर्डर भारत के पक्ष में ट्विस्‍ट हो रहा है. अमेरिकी ट्रेड डील से अच्छा वातावरण बना. लोग आलोचना कर रहे थे, लेकिन हमने धैर्य रखा. धैर्य का परिणाम निकला. अब मैन्युफैक्चरिंग बढे़ और देश में क्वालिटी प्रोडक्ट बनाए.' 

वर्ल्ड ऑर्डर क्या होता है?

वर्ल्ड ऑर्डर या विश्व व्यवस्था का अर्थ उस वैश्विक ढांचे या नियमों से है जिसके अनुसार दुनिया के देश एक-दूसरे के साथ व्यवहार करते हैं या राजनीति करते हैं. कुल मिलाकर यह देशों के बीच शक्ति, प्रभाव और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का एक ऐसा संयोजन है जो वैश्विक स्तर पर शांति, व्यापार और कूटनीति को संचालित करता है. अगर एकदम आसान भाषा में कहें तो यह वह "सिस्टम" है जो तय करता है कि दुनिया कैसे चलेगी और वैश्विक स्तर पर किसकी बात ज्यादा मानी जाएगी.

वर्ल्ड ऑर्डर भारत के पक्ष में कैसे बदल रहा है?

भारत आज परिधि पर खड़ा होकर वर्ल्ड ऑर्डर वाले 'सिस्टम' की ओर देखने वाला कोई प्लेयर नहीं है. जब यूक्रेन जंग के बीच अमेरिका और यूरोपीय देश रूस पर प्रतिबंध (सैंक्शंस) लगाते हैं तब भी भारत अपनी आर्थिक जरूरतों को देखते हुए रूस के कच्चा तेल खरीदता है. वह अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ (जिसमें से 25 प्रतिशत रूसी तेल खरीद पर लगा जुर्माना था) के सामने झुका नहीं. वह अपने स्टैंड से पीछे हटे बिना 27 यूरोपीय देशों के गुट EU के साथ ट्रेड डील करता है. भारत ने पिछले 6 महीने के अंदर ही 5 ट्रेड डील करके दिखा दिया है कि दुनिया उसके साथ आना चाहती है, हाथ मिलाना चाहती है. इसमें अमेरिका भी है, यूरोप भी है तो खाड़ी देश ओमान भी है.

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जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप टैरिफ वॉर छेड़ रहे थे तब भारत चीन और रूस के साथ एक मंच पर खड़ा होकर मैसेज दे रहा था. भारत ग्लोबल साउथ का एक प्रमुख नेतृत्वकर्ता बनकर उभरा है. ग्लोबल साउथ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित अथवा अविकसित के रूप में जाना जाता है, ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में स्थित हैं.

भारत ने हाल ही में दूसरी ‘भारत-अरब विदेश मंत्रियों' की अहम बैठक आयोजित की है. इस महाकुंभ में पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका के 22 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

अब EU के साथ ट्रेड डील फाइनल करके के 2 हफ्तों के अंदर ही ट्रंप ने समझौते वाला हाथ बढ़ा दिया है. एक तरफ भारत चीन के साथ रिश्तों को फिर से पटरी पर ला रहा है तो दूसरी तरफ भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करना इंडो-पैसिफिक में चीन के प्रभाव के लिए एक क्षेत्रीय काउंटरबैलेंस के रूप में काम कर रहा है. साफ है कि अब सिंगल पावर वर्ल्ड नहीं अब मल्टी पोलर वर्ल्ड है और यह डील उसी को मजबूत करता है.

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