अमेरिका से ज्वार और सोया खरीदने पर राजी होगा भारत? व्यापार समझौते पर बातचीत के बीच US ट्रेड चीफ का बड़ा दावा

India US Trade Deal Talks: अमेरिका और भारतीय के व्यापार वार्ताकार किसी समझौते पर पहुंचने की कोशिश के तहत बुधवार, 10 दिसंबर से दो दिवसीय वार्ता शुरू कर रहे हैं.

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

अमेरिका भारत के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए तेजी से बातचीत कर रहा है. अमेरिका और भारतीय के व्यापार वार्ताकार किसी समझौते पर पहुंचने की कोशिश के तहत बुधवार, 10 दिसंबर से दो दिवसीय वार्ता शुरू कर रहे हैं. ऐसे में अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने अपने यहां सांसदों को बताया कि भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों, जैसे ज्वार और सोया, के लिए बाजार खोलने पर "एक देश के तौर पर हमें अब तक का सबसे अच्छा प्रस्ताव" दिया है. सीनेट की एक समिति में बोलते हुए ग्रीर ने कहा कि उनकी टीम इस समय नई दिल्ली में बैठकों में व्यस्त है, जहां वे कृषि से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने माना कि भारत में कुछ फसलों को लेकर आपत्तियां हैं, पर भारत की हाल की पेशकश पहले की तुलना में काफी सकारात्मक है.

ग्रीर ने कहा कि चीन से मांग घटने और अमेरिकी उत्पाद के बढ़ते स्टॉक की स्थिति में भारत अब अमेरिका के लिए एक बड़ा वैकल्पिक बाजार बन सकता है. उन्होंने कहा कि भारत का बाजार अवसरों से भरपूर है, लेकिन उसे खोलना हमेशा कठिन रहा है. समिति के अध्यक्ष जेरी मोरान ने चिंता जताई कि अमेरिकी किसानों के लिए निर्यात के विकल्प कम हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत जैसे देशों में प्रवेश करना आसान नहीं है. इस पर ग्रीर ने जवाब दिया कि पिछली सरकारों की तुलना में भारत के साथ बातचीत अब काफी आगे बढ़ चुकी है.

ग्रीर ने यह भी बताया कि अमेरिका दुनिया के कई हिस्सों जैसे दक्षिण–पूर्व एशिया और यूरोप सहित में अपने उत्पादों के लिए नए बाजार खोल रहा है, जिससे भारत जैसे बड़े देशों से बातचीत में भी मदद मिलती है. ग्रीर ने संकेत दिया कि कृषि के अलावा विमानन और अन्य क्षेत्रों में भी भारत के साथ शुल्क और बाज़ार पहुंच से जुड़े मुद्दे सामने आएंगे. 1979 के विमान समझौते के तहत शून्य शुल्क वाले पुर्ज़ों पर भी बातचीत बढ़ी है.

मोरान ने यह भी कहा कि भारत अमेरिकी मक्का और सोया से बने इथेनॉल का बड़ा खरीदार बन सकता है. उन्होंने बताया कि कई देश पहले ही अमेरिकी इथेनॉल के लिए अपने बाजार खोल चुके हैं. कई सीनेटरों ने अस्थिर टैरिफ और चीन की बदलती खरीदारी के बीच अमेरिकी किसानों को हो रही दिक्कतों पर चिंता जताई. इसके जवाब में ग्रीर ने जोर देकर कहा कि एडमिनिस्ट्रेशन का आपसी समझौतों पर ज़ोर देने से एक्सपोर्टर्स के लिए नए मौके बन रहे हैं. अमेरिका कई समझौते कर रहा है, जिससे नए बाजार मिलेंगे.

पूरी चर्चा के दौरान ग्रीर ने दोहराया कि मजबूत बातचीत और जरूरत पड़ने पर शुल्क का इस्तेमाल बाज़ार खोलने और देशों से प्रतिबद्धता लेने के लिए आवश्यक है. 

तेजी से बढ़ रहा भारत- अमेरिका व्यापार

उल्लेखनीय है कि पिछले दस वर्षों में भारत- अमेरिका व्यापार तेजी से बढ़ा है. दोनों देश कृषि, डिजिटल सेवाओं, एविएशन, फार्मास्यूटिकल्स और जरूरी खनिजों में बाजार पहुंच पर लगातार बातचीत कर रहे हैं. हालांकि भारत अमेरिका के लिए तेजी से बढ़ता निर्यात बाज़ार है, कृषि क्षेत्र को अभी भी लंबे समय से चले आ रहे टैरिफ और सैनिटरी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है. दोनों देश इन मुद्दों को हल करने और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं.

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