मुसीबत में फंसे ईरान की भारत ने की मदद तो बोला- 'थैंक यू इंडिया'

25 मतों के पक्ष में, 7 मतों के विपक्ष में और 14 अनुपस्थित मतों के साथ पारित प्रस्ताव में, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UNHRC) ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर हुई हिंसक कार्रवाई की कड़ी निंदा की.

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  • ईरान के राजदूत मोहम्मद फथली ने भारत के सैद्धांतिक और दृढ़ समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया
  • यूएनएचआरसी ने ईरान सरकार से मानवाधिकारों का सम्मान और हिंसा, यातना तथा मनमानी गिरफ्तारी रोकने का आग्रह किया
  • ईरानी और भारतीय विदेश मंत्रियों ने क्षेत्रीय स्थिति पर बातचीत करते हुए द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की थी
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भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथली ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 39वें विशेष सत्र में शुक्रवार को पारित प्रस्ताव के विरोध में मतदान करने के लिए भारत सरकार के "सैद्धांतिक और दृढ़ समर्थन" के लिए तेहरान की ओर से थैंक यू बोला है. फथली ने एक पोस्ट में लिखा, "मैं यूएनएचआरसी में ईरान के सैद्धांतिक और दृढ़ समर्थन के लिए भारत सरकार का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं, जिसमें अन्यायपूर्ण और राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रस्ताव का विरोध करना भी शामिल है. यह रुख न्याय, बहुपक्षवाद और राष्ट्रीय संप्रभुता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है."

क्या फैसला हुआ

25 मतों के पक्ष में, 7 मतों के विपक्ष में और 14 अनुपस्थित मतों के साथ पारित प्रस्ताव में, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UNHRC) ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर हुई हिंसक कार्रवाई की कड़ी निंदा की. UNHRC द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, "UNHRC ने एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें उसने ईरान पर स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय तथ्य-जांच मिशन के कार्यकाल को दो साल के लिए और ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति पर विशेष प्रतिवेदक के कार्यकाल को एक साल के लिए बढ़ा दिया है. प्रस्ताव में 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों के दमन के संदर्भ में तथ्य-जांच मिशन द्वारा तत्काल जांच का भी आह्वान किया गया है."

हिंसा रोकने का आग्रह

इसमें आगे कहा गया है, "इसने ईरान की सरकार से मानवाधिकार दायित्वों का सम्मान करने, उनकी रक्षा करने और उन्हें पूरा करने तथा गैर-न्यायिक हत्याओं, मनमाने ढंग से जीवन से वंचित करने के अन्य रूपों, जबरन गायब किए जाने, यौन और लिंग आधारित हिंसा, मनमानी गिरफ्तारी और हिरासत, एकांतवास और यातना तथा अन्य क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार या दंड को रोकने और उनसे बचाव के लिए सभी आवश्यक उपाय करने का आग्रह किया." पिछले सप्ताह, विदेश मंत्री (ईएएम) एस जयशंकर को ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का फोन आया, जिसमें दोनों मंत्रियों ने क्षेत्र में "बदलती स्थिति" पर चर्चा की थी.
 

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