6 हजार से ज्‍यादा मौतें और 41 हजार गिरफ्तार… ईरान में प्रदर्शनों को लेकर ह्यूमन राइट एजेंसी का बड़ा दावा

ह्यूमन राइट्स एक्टिव‍िस्‍ट न्‍यूज एजेंसी ईरान में जमीनी स्तर पर मौजूद कार्यकर्ताओं के नेटवर्क के माध्यम से हर मौत की पुष्टि करता है. इस एजेंसी ने बताया कि देशव्यापी प्रदर्शनों में कम से कम 6,126 लोग मारे गए और 41,800 से अधिक गिरफ्तारियां हुई हैं.

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  • ईरान में देशव्यापी प्रदर्शन रोकने के दौरान कम से कम 6,126 लोगों की मौत हुई है.
  • अमेरिकी ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी ने प्रदर्शनकारियों की मौतों का दावा किया है.
  • ईरान सरकार ने मौतों की संख्या 3,117 बताई है, जिसमें नागरिक और सुरक्षा जवान शामिल हैं.
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ईरान में देशव्यापी प्रदर्शनों के खिलाफ कार्रवाई में कम से कम 6,126 लोग मारे गए हैं. ये नए आंकड़े अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिव‍िस्‍ट न्‍यूज एजेंसी से आए हैं. साथ ही कई अन्‍य लोगों के भी मारे जाने की भी आशंका जताई जा रही है. ईरान के अधिकारियों द्वारा इंटरनेट बंद करने और कॉल बाधित होने के कारण स्वतंत्र रूप से मौत की संख्‍या का आकलन करने में कई तरह की परेशानियां आ रही हैं.

ईरान सरकार ने मौतों के आंकड़ों को काफी कम 3,117 बताया है, जिसमें 2,427 नागरिक और सुरक्षा बल के जवान शामिल हैं. साथ ही अन्‍य को ईरान ने "आतंकवादी" करार दिया है. पूर्व में ईरान की सरकार ने अशांति में हुई मौतों की संख्या को कम करके बताया है या फिर उनकी रिपोर्ट ही नहीं दी है.

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41,800 से ज्‍यादा लोगों की गिरफ्तारियां 

ह्यूमन राइट्स एक्टिव‍िस्‍ट न्‍यूज एजेंसी ईरान में जमीनी स्तर पर मौजूद कार्यकर्ताओं के नेटवर्क के माध्यम से हर मौत की पुष्टि करता है. इस एजेंसी ने मृतकों की पहचान कम से कम 5,777 प्रदर्शनकारियों, 214 सरकार से संबद्ध बलों के सदस्यों, 86 बच्चों और 49 ऐसे नागरिकों के रूप में की है जो प्रदर्शन में शामिल नहीं थे. एजेंसी ने आगे बताया कि इस कार्रवाई में 41,800 से अधिक गिरफ्तारियां हुई हैं.

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मौतों की यह संख्‍या दशकों में ईरान में हुए किसी भी विरोध प्रदर्शन या अशांति से कहीं अधिक है और यह 1979 की इस्लामी क्रांति के दौरान फैली अराजकता की याद दिलाती है.

28 दिसंबर से शुरू हुए थे विरोध प्रदर्शन

ईरान में विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर को शुरू हुए थे, जो ईरानी मुद्रा रियाल के गिरते मूल्‍य से भड़के उठे थे और तेजी से पूरे देश में फैल गए थे. ईरान की धार्मिक सरकार ने इन प्रदर्शनों को हिंसक तरीके से दबा दिया, जिसकी भयावहता का अंदाजा अब धीरे-धीरे लग रहा है. देश में दो सप्ताह से अधिक समय से इंटरनेट बंद है.
 

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