किसी तानाशाह का रसोईया होना कैसा होता है? सद्दाम हुसैन से लेकर किम जोंग के Chef ने बताई आपबीती

किम जोंग-इल को पेपरोनी पिज्जा बहुत पसंद था. सद्दाम हुसैन मछली की बारबेक्यू के दीवाने थे. कहा जाता है कि इदी अमीन पूरी भुनी हुई बकरी एक बार में खा सकते थे.

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Dictators of World: निर्दयी तानाशाहों के शेफ की कहानियां

दुनिया के सबसे क्रूर और निर्दयी तानाशाहों के बारे में आपने बहुत कुछ सुना होगा. उनके खौफ, उनकी सनक और उनके जुल्मों की कहानियां इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उन लोगों का जीवन कैसा होता होगा जो इन क्रूर शासकों के लिए रोज खाना बनाते थे? एक ऐसी रसोई, जहां नमक तेज होने या जरा सी चूक का मतलब सीधे मौत की सजा होता था. 

पोलिश पत्रकार विटोल्ड स्जाबलोव्स्की की किताब पर आधारित नई डॉक्यूमेंट्री 'हाउ टू फीड ए डिक्टेटर' में इदी अमीन, सद्दाम हुसैन, किम जोंग-इल और पोल पॉट जैसे क्रूर तानाशाहों के निजी सेफ ने अपनी जिंदगी के उन पन्नों को खोला है, जो अब तक दुनिया की नजरों में नहीं थे.

इस डॉक्यूमेंट्री में दिखाया गया है कि एक तानाशाह का रसोइया होना दुनिया की सबसे खतरनाक नौकरियों में से एक था. यानी यहां खाना बनाने की सबसे पहली रेसिपी है 'गलती न करना'. इन रसोइयों के लिए हर वक्त मौत का साया मंडराता रहता था. आइए जानते हैं कि सद्दाम हुसैन से लेकर किम जोंग-इल के खान-पान की आदतें कैसी थीं और उनके रसोइयों ने पर्दे के पीछे कैसी खौफनाक और हैरान करने वाली जिंदगी जी.

Photo Credit: Icon Books

सद्दाम हुसैन का पसंदीदा खाना

इराक के क्रूर शासक सद्दाम हुसैन के बारे में उसके रसोइए ने बताया कि सद्दाम को मछली का बारबेक्यू (खास तौर पर ग्रिल्ड कार्प डिश, जिसे मसगूफ कहा जाता है) बेहद पसंद था. वह इसके बिना रह नहीं सकता था. सद्दाम अपने रसोइए पर इतना मेहरबान था कि उसे हर साल एक नई कार तोहफे में मिलती थी. लेकिन सद्दाम के इस पूर्व रसोइए को आज भी इतना डर है कि वह डॉक्यूमेंट्री में अपनी पहचान छिपाकर सामने आया, ताकि कोई उसे पहचान न सके.

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दिलचस्प और हैरान करने वाली बात यह है कि सद्दाम हुसैन की यही पसंदीदा मछली एक दिन उसकी मौत का कारण बन गई. साल 2003 में जब सद्दाम का तख्तापलट हुआ और वह अमेरिकी सेना से छिपता फिर रहा था, तब उसकी इसी पसंदीदा ग्रिल्ड कार्प मछली की वजह से अमेरिकी सेना को उसके ठिकाने का सुराग मिला. आखिरकार अमेरिकी सैनिकों ने उसे रेगिस्तान में एक बंकर (स्पाइडर होल) से ढूंढ निकाला.

युगांडा के तानाशाह इदी अमीन की सनक

युगांडा के खूंखार तानाशाह इदी अमीन के रसोइए चार्ल्स ओटोन्डे ओडेरा की कहानी बेहद रोंगटे खड़े कर देने वाली है. चार्ल्स पहले एक गरीब ग्रामीण थे, लेकिन इदी अमीन का रसोइया बनते ही उनकी किस्मत बदल गई. उन्हें मर्सिडीज कार मिली, ऐशो-आराम की जिंदगी मिली और वह आठ पत्नियों का खर्च उठाने लगे. 

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इदी अमीन के बारे में कहा जाता था कि वह एक बार में पूरी भुनी हुई बकरी खा सकता था. उसे इस बात से बेहद खुशी मिलती थी जब ब्रिटिश लोग उसकी आदमखोर होने की अफवाहों से डरते थे. हालांकि, अमीन खुद इस बात को नकारता था और मजाक में कहता था कि इंसान का मांस बहुत नमकीन होता है.

लेकिन चार्ल्स की जिंदगी तब नरक बन गई जब इदी अमीन की सनक सातवें आसमान पर पहुंच गई. चार्ल्स बताते हैं कि एक बार अमीन ने उन्हें इंसान का दिल पकाने के लिए कहा था. अमीन का मानना था कि किसी का दिल खा लेने से उस मरे हुए इंसान की आत्मा आपको परेशान नहीं करती. हद तो तब हो गई जब एक दिन खाना खाने के बाद अमीन के बच्चे के पेट में सामान्य सा दर्द हुआ. इस मामूली बात पर अमीन इतना भड़क गया कि उसने अपने वफादार रसोइए चार्ल्स को सीधे मौत की सजा सुना दी थी. हालांकि, चार्ल्स किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब रहे.

किम जोंग-इल का पिज्जा प्रेम

उत्तर कोरिया के पूर्व तानाशाह किम जोंग-इल के लिए खाना बनाना किसी जासूसी मिशन से कम नहीं था. इटली के मशहूर शेफ एर्मानो फुरलानिस ने किम जोंग-इल के लिए पिज्जा बनाने के दिनों को याद किया. उन्होंने बताया कि किम जोंग-इल को पेपरोनी पिज्जा बहुत पसंद था. जब फुरलानिस वहां खाना बनाते थे, तो उनकी जिंदगी पूरी तरह सरकारी निगरानी में होती थी. उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया जाता था और रसोई में हर वक्त सुरक्षाकर्मी तैनात रहते थे.

सुरक्षा का आलम यह था कि जब वह पिज्जा बनाते थे, तो उत्तर कोरियाई अधिकारी रसोई में आकर इस बात की जांच करते थे कि पिज्जा के ऊपर जैतून (ओलिव्स) के टुकड़े बिल्कुल बराबर दूरी पर रखे गए हैं या नहीं. फुरलानिस बताते हैं कि जब उत्तर कोरिया के आम लोग भुखमरी से मर रहे थे और घास-फूस खाने को मजबूर थे, तब तानाशाह के लिए इटली से महंगे और ताजे सामान कुछ ही दिनों में मंगा लिए जाते थे. जब शेफ ने बचा हुआ खाना भूखे लोगों में बांटने की बात कही, तो उनके इस प्रस्ताव को तुरंत और सख्ती से खारिज कर दिया गया.

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पोल पॉट और ऑगस्टो पिनोशे के रसोइयों की वफादारी

कंबोडिया के क्रूर तानाशाह पोल पॉट, जिसके शासन में करीब 15 से 30 लाख लोग मारे गए थे, उसकी रसोइया केओ सामून आज भी उसे एक भगवान की तरह पूजती है. वह उसकी कब्र पर जाकर मछली, फल और चावल चढ़ाती है. सामून के लिए पोल पॉट एक नरसंहार करने वाला तानाशाह नहीं, बल्कि वह इंसान था जिसने उसकी शादी का पूरा खर्च उठाया था. 

जब डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग के दौरान कंबोडियाई ट्रांसलेटर ने सामून को पोल पॉट के खमेर रूज शासन के दौरान खुद पर हुए जुल्मों और टॉर्चर की कहानी सुनाई, तब जाकर सामून रो पड़ी और उसने माना कि पोल पॉट से गलतियां हुई थीं.

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इसी तरह चिली के तानाशाह ऑगस्टो पिनोशे के शेफ कोको पाचेको आज भी अपने पुराने मालिक के प्रति पूरी तरह वफादार हैं. उन्होंने पिनोशे की मिलिट्री कैप को कांच के बक्से में संभालकर रखा है. 

पाचेको का कहना है कि वे दोनों कभी राजनीति की बात नहीं करते थे, सिर्फ हंसते-मजाक करते थे. जब उनसे पिनोशे द्वारा मारे गए और प्रताड़ित किए गए हजारों लोगों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बेहद शांत अंदाज में कहा कि तानाशाह को कुछ ऐसे आदेश देने पड़ते हैं जो वह नहीं देना चाहता, यही जिंदगी है.

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