क्या फिर भड़कने लगी है बांग्लादेश में विद्रोह की आग, हसीना के बाद अब यूनुस सरकार का होगा तख्तापलट? आखिर ये माजरा क्या है

बांग्लादेश के यूनुस सरकार के खिलाफ पहली बार छात्र सड़कों पर उतरे हैं. बताया जा रहा है कि छात्र सरकार के कुछ फैसलों से खासे खफा हैं.

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बांग्लादेश में फिर सड़कों पर उतरे छात्र, क्या फिर होगा तख्ता पलट?

बांग्लादेश में एक बार फिर स्थिति बेकाबू होते दिख रही है. शेख हिसाना को सत्ता से बेदखल हुए साल भर का समय भी नहीं हुआ है और बांग्लादेश में मौजूदा सरकार के खिलाफ भी छात्र सड़कों पर नजर आ रहे हैं. पिछले साल छात्रों ने ही शेख हसीना के खिलाफ भी आंदोलन की शुरुआत की थी, उस आंदोलन की वजह से बाद में उस समय की प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़कर जाना पड़ा था. अब एक बार फिर छात्र सड़कों पर हैं और इस बार निशाने पर है मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार .कहा जा रहा है कि जो छात्र अब सड़कों पर हैं वह मोहम्मद यूनुस की सरकार के कुछ फैसलों से खुश नहीं हैं. यूनुस सरकार के इन फैसलों में शामिल हैं देश के नाम बदलने और संविधान को बदलने का ऐलान. 

सेंट्रल शहीद मीनार पर जुटे हजारों की संख्या में छात्र

31 दिसंबर 2024 को मौजूदा सरकार के खिलाफ ढाका सेंट्रल शहीद मीनार पर हजारों की संख्या में छात्रों की भीड़ इकट्ठा हो गई. आपको बता दें कि शहीद मीनार से ही शेख हसीना सरकार के खिलाफ बगावत करने वाले छात्रों के गुट ने इस बार मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की है. इस दौरान बांग्लादेश में कट्टरता को बढ़ावा देने और इस्लामिक राज्य स्थापित कराने वाले कई नारे भी लगाए गए.  

1972 में लागू किया गया संविधान हो खत्म 

बांग्लादेश के संविधान को लेकर द एंटी डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट्स मूवमेंट ने बीते रविवार को कहा था कि वह जल्द ही 1972 में लागू किए गए संविधान को खत्म करने की मांग करेंगे.  छात्रों ने देश के संविधान को मुजीबिस्ट विधान करार दिया था. छात्रों का दावा है कि इसने भारत की आक्रामकता के लिए रास्ते खोले हैं. इस मुद्दे को लेकर बांग्लादेश की सरकार और विपक्षी पार्टी भी आमने-सामने हैं. 

बांग्लादेश में फिर आंदोलन की तैयारी

छात्रों के रुख को देखते हुए लगा रहा है कि बांग्लादेश में एक बार फिर छात्र बड़े आंदोलन की तैयारी में है. साथ छात्र मार्च फॉर यूनिटी के लिए भी छात्र जुट रहे हैं. बताया जा रहा है कि आंदोलनकारी छात्र पहले आंदोलन में मारे गए छात्रों के लिए न्याय दिलाने की मांग भी उठ रही है. अगर ऐसा हुआ तो एक फिर बांग्लादेश में आंदोलन के रास्ते तख्तापलट की भूमिका तैयार की जा सकती है. 

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जमात ए इस्लामी का मिल रहा है समर्थन

कहा जा रहा है कि बांग्लादेश में जो छात्र आंदोलन करने आगे आ रहे हैं उनके पीछे जमात ए इस्लामी का हाथ है. बताया तो यहां तक जा रहा है कि छात्रों के इस आंदोलन को अब्दुल हन्नान नेतृत्व कर रहा है. आपको बता दें कि बांग्लादेश में जब शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन हुआ था तो उस दौरान भी अब्दुल हन्नान काफी चर्चाओं में था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हन्नान ने ढाका में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी. इसी कॉन्फ्रेंस में उसने सभी छात्रों से शहीद मीनार पर जुटने की अपील की थी. उस दौरान उसने कहा था कि जुलाई क्रांति का ऐलान सरकार नहीं बल्कि खुद हजारों छात्र ही करेंगे. 

'सरकार नहीं छात्र करेंगे फैसला'

हन्नान ने कहा था कि चाहे बात देश के संविधान को बदलने की हो या फिर नाम बदलने की, ये इतना बड़ा फैसला है कि ये सरकार नहीं बल्कि छात्र ही लेंगे.हन्नान की जमात ए इस्लामी पिछली बार जब शेख हसीना के खिलाफ भी प्रदर्शन को पर्दे के पीछे से लीड कर रही थी. इस बार भी कुछ वैसे ही हो रहा है. जमात इस बार भी पर्दे के पीछे से रहकर छात्रों को मौजूदा सरकार के खिलाफ आगे कर रहा है.  

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