- मुख्यमंत्री अफरीदी ने अगस्त 2023 से जेल में बंद इमरान खान की रिहाई के लिए फोर्स बनाने की घोषणा की है
- अफरीदी का कहना है कि बल शांतिपूर्ण संघर्ष करेगा और संविधान, लोकतंत्र तथा स्वतंत्र मीडिया की वकालत करेगा
- पाकिस्तान की सरकार ने मीडिया में इमरान खान के साथ किसी डील या रियायतों की खबरों को पूरी तरह नकार दिया है
दुनिया के दिग्गज क्रिकेटरों के इमरान खान के समर्थन में आने के बाद पाकिस्तान सरकार और सेना काफी दबाव में है. सरकार की तरफ से मंत्री अलग-अलग बयान दे रहे हैं और मामला गरमाता जा रहा है. इसी बीच खैबर पख्तूनख्वा (केपी) के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने इमरान खान को छुड़ाने के लिए फोर्स बनाने की घोषणा दी तो पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने उन्हें चेतावनी जारी की है.
कोई डील नहीं हुई
इस्लामाबाद की स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी दी है कि खैबर पख्तूनख्वा (केपी) के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी की कुर्सी "खतरे में" है. उन्होंने हाल ही में घोषित 'रिलीव इमरान खान फोर्स" को "असंवैधानिक और अवैध" बताया. प्रमुख पाकिस्तानी मीडिया जियो न्यूज ने आसिफ के हवाले से कहा, "केपी के मुख्यमंत्री ने अपनी नौकरी बचाने के लिए इस फोर्स का गठन किया है. संघीय सरकार के अलावा किसी को भी कोई फोर्स बनाने का अधिकार नहीं है." रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) प्रमुख इमरान खान को विदेश या इस्लामाबाद के बानी गाला स्थित उनके आवास पर स्थानांतरित करने के बारे में किसी भी चर्चा से इनकार किया. उन्होंने कहा, "शायद सुविधाओं के संबंध में बातचीत हुई होगी," और इस बात पर जोर दिया कि "कुछ लोग इस तरह की बातों के जरिए अपना धंधा चलाने की कोशिश करते हैं."आसिफ की ये टिप्पणियां मुख्यमंत्री अफरीदी द्वारा अगस्त 2023 से जेल में बंद पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए गठित बल की घोषणा के बाद आईं.
कैसे काम करेगी फोर्स
यह घोषणा 18 फरवरी को पीटीआई और बहुदलीय विपक्षी गठबंधन तहरीक तहफ़्फ़ुज़-ए-ऐय्यीन पाकिस्तान (टीटीएपी) के सांसदों द्वारा इस्लामाबाद में संसद भवन में अपना कई दिनों का धरना वापस लेने के बाद की गई. सुप्रीम कोर्ट के बाहर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री अफरीदी ने कहा कि जेल में बंद पीटीआई के संस्थापक ने उन्हें "सड़क आंदोलन" का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी है. उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत के निर्देशों को "कूड़ेदान में फेंका जा रहा है" और दावा किया कि इमरान खान को अभी भी उनके निजी डॉक्टरों से मिलने नहीं दिया जा रहा है. अफरीदी ने आगे कहा कि नवगठित बल का औपचारिक पंजीकरण किया जाएगा और यह शांतिपूर्ण संघर्ष का मार्ग अपनाएगा. उन्होंने बताया कि बल के सदस्य ईद-उल-फितर के बाद पेशावर में शपथ लेंगे. उन्होंने कहा कि बल एक स्पष्ट चेन ऑफ कमांड के तहत काम करेगा और इमरान खान यह तय करेंगे कि कमान की जिम्मेदारी कौन संभालेगा. अफरीदी ने कहा कि संघर्ष शुरू करने से पहले तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी और उन्होंने जोर देकर कहा कि यह आंदोलन संविधान की सर्वोच्चता, लोकतंत्र और स्वतंत्र मीडिया की वकालत करेगा. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं, जब उन्हें भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषी पाए जाने के बाद लाहौर स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था. वह वर्तमान में रावलपिंडी की उच्च सुरक्षा वाली अडियाला जेल में बंद हैं.
क्यों बाहर नहीं आ रहे इमरान
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के एक करीबी सहयोगी ने कहा है कि जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को दो बार “समझौते” की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया. प्रधानमंत्री के राजनीतिक मामलों के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने बुधवार शाम एक ‘टॉक शो' में खुलासा किया, “पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान के साथ समझौता करने के लिए अतीत में दो गंभीर प्रयास किए गए थे, लेकिन वे विफल रहे.” सनाउल्लाह ने कहा, “पहला प्रयास संघीय गृह मंत्री मोहसिन नकवी और खैबर पख्तूनख्वा के तत्कालीन मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर के नेतृत्व में 26 नवंबर, 2024 से पहले किया गया था, और दूसरा प्रयास हाल ही में विदेश के कुछ लोगों द्वारा किया गया था. इमरान खान ने शुरू में सहमति जताई थी लेकिन बाद में समझौते से पीछे हट गए.” उन्होंने कहा, “हम इस समस्या का राजनीतिक समाधान चाहते हैं, लेकिन खान कोई रास्ता निकालने को तैयार नहीं हैं.” पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएलएन) के प्रमुख नवाज शरीफ के करीबी सहयोगी सनाउल्लाह ने आगे कहा कि खान मौजूदा सरकार को हटाना और खुद सत्ता में आना चाहते हैं.
सूचना मंत्री ने किया इनकार
सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने गुरुवार को सरकार और जेल में बंद इमरान खान के बीच किसी भी तरह की "डील" के बारे में मीडिया की अटकलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया. एक्स पर शेयर किए गए एक बयान में, तरार ने कहा, “इमरान के लिए न तो कोई डील हुई है और न ही कोई नरमी बरती जा रही है.” उन्होंने आगे कहा कि सरकार द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री को रियायतें देने की कोई भी धारणा “पूरी तरह से झूठी और गुमराह करने वाली” है.
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