- ओबामा ने बताया कि ब्रह्मांड विशाल होने के कारण जीवन की संभावना अधिक है पर संपर्क की संभावना कम है
- अमेरिका के नेवादा रेगिस्तान में स्थित गुप्त परीक्षण स्थल एरिया 51 से एलियंस को लेकर कई रहस्य जुड़े हुए हैं
- 2013 में सीआईए ने पहली बार एरिया 51 के अस्तित्व को स्वीकार किया मगर UFO दुर्घटनाओं से इनकार किया
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने वीकेंड में एक पॉडकास्ट पर एलियंस के अस्तित्व की बात कहकर सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी थी. उन्होंने कहा कि उन्हें एलियंस के हमसे संपर्क करने का कोई सबूत नहीं मिला है. पॉडकास्ट के मेजबान ब्रायन टायलर कोहेन के साथ सवालों के दौरान, ओबामा से पूछा गया, "क्या एलियंस सच में मौजूद हैं?" उन्होंने जवाब दिया, "वे सच में मौजूद हैं." फिर आगे कहा, "लेकिन मैंने उन्हें नहीं देखा है और, उन्हें एरिया 51 में नहीं रखा गया है."
रविवार को पूर्व राष्ट्रपति ने इंस्टाग्राम पर एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने अपने वायरल हुए बयान का स्पष्टीकरण देने की कोशिश की.
वीडियो में देखिए क्या बोले
बाद में कर दिया इनकार
ओबामा ने कहा, “मैं स्पीड राउंड की भावना का पालन करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन चूंकि इस पर ध्यान गया है, इसलिए मैं स्पष्टीकरण देना चाहता हूं. सांख्यिकीय (Statistically) रूप से, ब्रह्मांड इतना विशाल है कि वहां जीवन होने की संभावना काफी अधिक है, लेकिन सौर मंडलों के बीच की दूरियां इतनी अधिक हैं कि एलियंस द्वारा हमसे संपर्क किए जाने की संभावना कम है, और मैंने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान ऐसा कोई सबूत नहीं देखा कि बाहरी ग्रहों के प्राणियों ने हमसे संपर्क किया हो. सचमुच!”
पहले का वीडियो देखिए
ये वीडियो पुराना है और इसमें बराक ओबामा कह रहे हैं कि उन्हें इस संबंध में बोलने की इजाजत नहीं है. जब एंकर ने बिल क्लिंटन के बारे में बताया कि उन्होंने कहा था कि उन्होंने एलियंस को नहीं देखा तो बराक ने कहा कि हमें ऐसा कहने के लिए कहा जाता है.
एरिया 51 क्या है
अमेरिका के नेवादा रेगिस्तान में शीत युद्ध के दौरान के एक बेहद गुप्त परीक्षण स्थल को एरिया 51 कहा जाता है. इसके आसपास की गोपनीयता ने एलियंस को लेकर हमेशा से रहस्य कायम कर रखा है. कहा तो यहां तक जाता है कि अमेरिका के राष्ट्रपति एलियन के संपर्क में रहते हैं और अमेरिका के सुपरपावर होने में एलियंस का बहुत बड़ा हाथ है. ऐसी भी कहानियां हैं कि अमेरिका के पास इतनी ताकत है कि वो हर ग्रह पर जा सकता है, लेकिन वो एलियंस से दुश्मनी नहीं मोल लेना चाहता, इसलिए इस राज को छुपाकर रखता है.
2013 से पहले नाम तक नहीं लेते थे
2013 में, सीआईए ने इस स्थल के अस्तित्व को स्वीकार किया, लेकिन यूएफओ दुर्घटनाओं, काली आंखों वाले अलौकिक प्राणियों या कृत्रिम चंद्र लैंडिंग से इनकार किया. अमेरिकी सरकार के अधिकारियों द्वारा दशकों तक इसे स्वीकार करने से इनकार करने के बाद, अब सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों में 8,000 वर्ग मील (20,700 वर्ग किलोमीटर) के इस स्थल का नाम लिया गया है. यह बेस कई अति-गुप्त विमानों का परीक्षण स्थल रहा है, जिनमें 1950 के दशक में यू-2 और बाद में बी-2 स्टील्थ बॉम्बर शामिल हैं.
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