'हम सामान नहीं कि बेच दो': ट्रंप की धमकियों पर ग्रीनलैंड की पब्लिक को सुनिए- NDTV ग्राउंड रिपोर्ट

Greenland Ground Report: NDTV के सीनियर मैनेजिंग एडिटर विष्णु सोम इस समय ग्रीनलैंड में हैं और उन्होंने वहां के आम लोगों से बात की और यह जानने की कोशिश की कि वे किस दौर से गुजर रहे हैं.

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Greenland Ground Report: NDTV से विष्णु सोम इस समय ग्रीनलैंड में हैं
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  • अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकी पर ग्रीनलैंड के लोग क्या सोचते हैं, हमने जाना
  • ग्रीनलैंड के स्थानीय लोग अमेरिका की गतिविधियों को लेकर गहरी चिंता और अनिश्चितता महसूस कर रहे हैं
  • जलवायु परिवर्तन के कारण ग्रीनलैंड का तापमान तेजी से बढ़ रहा. स्थानीय जीवन और इकोसिस्टम पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा
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विश्वासघात, गुस्सा, अपमान, फिर बस कुछ देर की आशा और वो भी भारी अनिश्चितता से घिरी हुई... ग्रीनलैंड के लोग वैसे तो सुर्खियों से दूर रहने के आदी हैं, लेकिन पिछले कुछ सप्ताह उनके लिए उठा-पटक वाले रहे हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेनमार्क के इस अर्धस्वायत्त द्वीप पर कब्जा करने के लिए हर तरह की धमकी दे रखी है, पहले तो सैन्य कार्रवाई से भी इनकार नहीं किया. ट्रंप ने ग्रीनलैंड को "बर्फ का बड़ा, सुंदर टुकड़ा" कहा था. फिर डेनमार्क, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों ने इसकी रक्षा के लिए सेनाएं भेजीं. आगे अमेरिकी राष्ट्रपति ने आखिर में नरमी का संकेत देते हुए कहा कि वह फोर्स का उपयोग नहीं करेंगे. इन सभी हलचल के बीच ग्रीनलैंड के लोग इस बात को लेकर बहुत अनिश्चित हैं कि भविष्य में उनके लिए क्या होगा.

NDTV के सीनियर मैनेजिंग एडिटर विष्णु सोम इस समय ग्रीनलैंड में हैं और उन्होंने वहां के आम लोगों से बात की (Greenland Ground Report) और यह जानने की कोशिश की कि वे किस दौर से गुजर रहे हैं.

ग्रीनलैंड के दो नौजवानों, लुकास और अनीता ने NDTV को बताया कि चिंता इस समय उनके लिए सबसे बड़ी भावना है. लुकास ने कहा, "मुझे लगता है कि मैं वास्तव में चिंतित महसूस कर रहा हूं, क्योंकि आप नहीं जानते कि अमेरिका के राष्ट्रपति के इन सभी बयानों से क्या होने वाला है. मुझे लगता है कि बहुत सारे लोग हैं जो काफी चिंतित हैं."

लुकास से पूछा गया कि क्या अब उनके दिल में कुछ उम्मीद जगी है, क्योंकि ट्रंप ने दावोस में घोषणा की थी कि वह ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए सैन्य विकल्प पर विचार नहीं कर रहे हैं. इसपर लुकास ने बताया कि यह पता लग ही नहीं सकता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की वास्तविक योजनाएं क्या हैं.

एक नाव ऑपरेट करने वाले अनीता का भी यही मानना है.

उन्होंने कहा, "हां, मैं बहुत चिंतित हूं. मुझे लगता है कि स्थिति पिछले साल से बहुत अलग है. इसलिए मुझे लगता है कि यह हम सभी के लिए कुछ सप्ताह कठिन रहे हैं. आप इसे वास्तव में राजधानी नुउक शहर में महसूस कर सकते हैं. हम सभी एक ही तरह से महसूस कर रहे हैं, बस इस बात को लेकर चिंतित हैं कि क्या होने वाला है. और, निश्चित रूप से, इसने बहुत अधिक ध्यान आकर्षित किया है, जो अजीब है क्योंकि हम वास्तव में कभी भी दुनिया के मानचित्र या सुर्खियों में इतने अधिक नहीं रहे हैं. यह नया है. आप जहां भी जाएं, वहां लोग रिकॉर्डिंग करते हुए मिल जाएंगे.''

अनीता ने कहा कि आदर्श समाधान एक ऐसा समझौता होगा जो डेनमार्क सहित सभी के लिए काम करेगा. ग्रीनलैंड डेनमार्क का ही अर्धस्वायत्त हिस्सा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की ट्रंप की मांग बहुत अपमानजनक है. उन्होंने कहा, "हम एक संस्कृति हैं, हम लोग हैं, हम कोई वस्तु नहीं हैं. कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे बेचा जाए, ऐसी कोई चीज नहीं जिस पर आप सिर्फ दावा कर सकें... यह अच्छा नहीं लगता."

ग्रीनलैंड पहुंचे अमेरिकी लोग क्या सोचते हैं?

एंटरप्रेन्योर और टीचर ब्रैड कैनहम अमेरिका के मिनेसोटा से ग्रीनलैंड घूमने पहुंचे हैं. यह वही मिनेसोटा है जहां ट्रंप सरकार आप्रवासियों के खिलाफ हिंसक अभियान चला रही है. इस महीने इमिग्रेशन एजेंटों के हाथों दो लोगों - रेनी गुड और एलेक्स प्रेटी - की मौत हो गई. उन्होंने एनडीटीवी से कहा कि अमेरिका और ग्रीनलैंड में जो कुछ हो रहा है, उसमें समानताएं देखते हैं.

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कैनहम ने कहा, "स्पष्ट रूप से, डोनाल्ड ट्रंप की संघीय सरकार ने मिनेसोटा राज्य पर ऐसा दबाव है जो पहले कभी देखने को नहीं मिला है. यह मिनेसोटा के लोगों के लिए काफी चौंकाने वाला है. हमने यह भी देखा है कि ग्रीनलैंड में क्या हुआ है, और हम इस बात से भी बहुत हैरान हैं कि अमेरिका के राष्ट्रपति हीं देश के अंदर और देश के बाहर, ग्रीनलैंड पर इस तरह का दबाव डाल रहे हैं."

"मैं डोनाल्ड ट्रंप के किसी एक बयान को नहीं बल्कि पूरे पैटर्न को देखता हूं. मेरे विचार से यह पैटर्न बताता है कि फैसला लेने और उसे लागू करने के लिए लोकतांत्रिक क्षमता में यह कमी आई है. मैंने इसे ग्रीनलैंड पर लागू होते देखा है, और इसे मिनेसोटा पर भी लागू किया जा रहा है."

जलवायु परिवर्तन की चुनौती

NDTV ने ग्रीनलैंड के जिन लोगों से बात की, उन्होंने जलवायु परिवर्तन को लेकर एक और चिंता जताई. यह द्वीप विश्व औसत से लगभग चार गुना तेजी से गर्म हो रहा है, और कई लोगों ने कहा कि इस बार की सर्दी वसंत की तरह महसूस हो रही है.

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अनीता ने कहा, "हम पूरी तरह से सफेद रहने और स्नोमोबाइल्स पर बाहर जाने और फजॉर्ड्स के जमे रहने के आदी हैं. और अब ऐसा लगता है कि गर्मियां आने वाली हैं."

ट्रेवल कॉर्डिनेटर मार्क मोलर ने कहा, "यह सब इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि ग्रीनलैंड का उत्तरी भाग मछली पकड़ने या शिकार सहित बर्फ पर बहुत अधिक निर्भर है."

इसी तरह मछुआरे निकोलस हॉर्नम ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से ध्रुवीय भालू जैसी प्रजातियों के अस्तित्व को भी खतरा है. उन्होंने खुलासा किया, "हमने दक्षिण ग्रीनलैंड के शहरों में बहुत अधिक ध्रुवीय भालू आते हुए भी देखा है."

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