- अमेरिकी पायलट के लिए दुश्मन इलाके में विमान क्रैश होना और पैराशूट से सुरक्षित उतरना अत्यंत जोखिम भरा होता है
- पायलट को जमीन पर उतरते ही अपनी सुरक्षा, छिपने की जगह और चोटों का तुरंत आकलन करना जरूरी होता है
- SERE ट्रेनिंग के तहत पायलट को छुपने, पानी खोजने और रात में सुरक्षित मूवमेंट की रणनीति अपनानी पड़ती है
दुश्मन का इलाका, आसमान से बरसती आग और पलक झपकते ही फाइटर जेट का मलबे में तब्दील हो जाना... किसी भी पायलट के लिए यह किसी बुरे ख्वाब से कम नहीं होता है. ईरान के मोर्चे पर लापता हुए अमेरिकी पायलट की तलाश अब वक्त के खिलाफ अब ट्रंप के लिए नया परेशानी बन गई है. ईरान में लापता हुए अमेरिकी पायलट के साथ किसी भी संभावित बुरे सलूक को लेकर जब ट्रंप से सवाल किया गया तो इस बहुत आत्मविश्वास से नहीं बोल सके.
इस बीच एक सवाल उठता है कि जब दुश्मन के इलाके में मौत आंख मिचौली खेल रही हो, तो पायलट खुद को कैसे महफूज रखता है?
रिटायर्ड ब्रिगेडियर जनरल ह्यूस्टन कैंटवेल और रेस्क्यू एक्सपर्ट स्कॉट फेल्स ने बताया है कि दुश्मन के इलाके में जिंदा रहने और वहां से सही-सलामत निकलने की जद्दोजहद असल में होती कैसी है.
आसमान से जमीन तक की जद्दोजहद
जनरल कैंटवेल को इराक और अफगानिस्तान में 400 घंटों से ज्यादा का जंगी तजुर्बा है. वह कहते हैं कि जब विमान क्रैश करते हैं तो एक पायलट का दिमाग पैराशूट से नीचे आते वक्त ही काम करना शुरू कर देता है.
लेकिन मिसाइल और गोलीबारी के बीच जमीन पर उतरना खुद में एक बड़ी चुनौती है. पैराशूट से लैंडिंग के दौरान पैर, टखने या कूल्हे की हड्डी टूटने का खतरा हमेशा बना रहता है. वियतनाम युद्ध के दौरान कई ऐसे किस्से मशहूर हुए जहां पायलटों को लैंडिंग के वक्त ही 'कंपाउंड फ्रैक्चर' जैसी गंभीर चोटें आईं. जमीन छूते ही सबसे पहला काम खुद का जायजा लेना होता है कि क्या मैं चलने के काबिल भी हूं? क्या मैं दुश्मन की नजरों से बच सकता हूं?
छिपने का हुनर और भूख-प्यास से करना होता है जंग
एक बार जमीन पर सुरक्षित पहुंचने के बाद पायलट की असली परीक्षा शुरू होती है. इसे 'SERE' (सर्वाइवल, इवेजन, रेजिस्टेंस और एस्केप) ट्रेनिंग कहा जाता है. कैंटवेल के मुताबिक, पहली प्राथमिकता खुद को छिपाना और पानी तलाशना है, खासकर अगर इलाका रेगिस्तानी हो. उन्होंने बताया कि अगर वह किसी शहर में होते तो छिपने के लिए किसी घर की छत चुनते और अगर ग्रामीण इलाका होता तो ऐसा मैदान जहां हेलिकॉप्टर उतर सके.
रेस्क्यू टीम की प्लानिंग ही बचा सकती है जिंदगी
जब एक पायलट लापता होता है, तो दूसरी तरफ 'कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू' (CSAR) की टीमें हरकत में आ जाती हैं. रिटायर्ड मास्टर सार्जेंट स्कॉट फेल्स 1993 के मशहूर 'ब्लैक हॉक डाउन' मिशन का हिस्सा रह चुके हैं. वह बताते हैं कि किसी भी मिशन से पहले एक 'रेस्क्यू प्लान' हमेशा तैयार रहता है. पायलट को ढूंढने के लिए इंसानी जासूसों से लेकर ड्रोन की तस्वीरों और सिग्नल इंटेलिजेंस तक का इस्तेमाल किया जाता है.
फेल्स के मुताबिक, एक बार जब पायलट की लोकेशन मिल जाती है, तो असली खेल शुरू होता है. रेस्क्यू हेलिकॉप्टर के अंदर ही हालात के हिसाब से रणनीति बनाई जाती है. गनर दुश्मन के खतरों पर नजर रखते हैं, पायलट लैंडिंग की जगह ढूंढता है और पैराशूट जंपर्स (PJs) पायलट से संपर्क साधने की कोशिश करते हैं.
'F15 फाइटर जेट को किसी ने पनाह दी है'
ईरान के दक्षिण-पश्चिम इलाके में लापता हुए पायलट को लेकर फेल्स अभी भी पुरउम्मीद हैं. उनका मानना है कि या तो वह जांबाज अभी भी दुश्मन की नजरों से बचकर छिप रहा है या फिर शायद किसी 'भले शख्स' ने उसे पनाह दे रखी है.
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