एप्सटीन फाइल्स में ‘जॉम्बी फूल’ का जिक्र, हिंदुओं की पूजा-पाठ से भी जुड़ा है यह पौधा, जानें विस्तार से

एप्स्टीन फाइल्स में तीन ईमेल्स में जहरीले ट्रम्पेट प्लांट और उसके रसायन स्कोपोलामाइन का जिक्र मिला है, जिसे 'जॉम्बी ड्रग' कहा जाता है. यही पौधा भारत में धतूरा के रूप में जाना जाता है और शिवपूजन में उपयोग होता है.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • एप्सटीन की नर्सरी में ट्रम्पेट प्लांट्स उगाए जाने का उल्लेख ईमेल्स में 3 बार दर्ज है.
  • ट्रम्पेट प्लांट में पाए जाने वाले रसायन जैसे स्कोपोलामीन, एट्रोपीन और हायोसायमीन शरीर पर गंभीर असर डालते हैं.
  • भारत में इसे धतूरा कहते हैं और इसे भगवान शिव से जोड़ा गया है. यह जहरीला होने के बावजूद धार्मिक महत्व रखता है.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

एप्सटीन फाइल्स से हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं. अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह दावा वायरल हो रहा है कि अमेरिकी फाइनेंसर और दोषी यौन अपराधी Jeffrey Epstein ने अपनी नर्सरी में तथाकथित 'ट्रम्पेट प्लांट्स' उगाए हुए थे. ऐसे पौधे जो अपने शक्तिशाली मनो-सक्रिय (psychoactive) प्रभावों के लिए कुख्यात हैं.

वायरल पोस्ट्स में साझा किए गए ईमेल्स के स्क्रीनशॉट्स में इन 'ट्रम्पेट प्लांट्स' का कई बार उल्लेख मिलता है. हमारी जांच में यह सामने आया कि जिन दस्तावेजों का हवाला दिया जा रहा है, उनमें वास्तव में इन पौधों का ज़िक्र मौजूद है.

यह भी पढ़ें- सिब्बल को मिला 2010 का पुरस्कार एप्स्टीन से था जुड़ा, बीजेपी ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, जानिए कांग्रेस का जवाब

ईमेल्स में क्या लिखा है?

पहला ईमेल (27 जनवरी 2015):

यह ईमेल फोटोग्राफर एंटोनी वेरग्लास की ओर से फॉरवर्ड किया गया बताया जाता है. सब्जेक्ट लाइन थी, 'Scopolamine: Powerful drug growing in the forests of Colombia that ELIMINATES free will' यह संदेश एक डेली मेल और वाइस की रिपोर्ट से जुड़ा था, जिसमें स्कोपोलामीन को ऐसा पदार्थ बताया गया था जो इंसान को 'बेहद आज्ञाकारी' बना सकता है. लेख की कुछ पंक्तियां हाइलाइट की गई थीं, जैसे- 'You can guide them wherever you want. It's like they're a child.'

दूसरा ईमेल (3 मार्च 2014):

यह ईमेल सीधे जेफ्री एप्सटीन की ओर से 'एन रोड्रिगेज' नामक व्यक्ति को भेजा गया था. इसमें उन्होंने लिखा, 'ask chris about my trumpet plants at nursery [SIC]?' इससे यह संकेत मिलता है कि एप्सटीन की नर्सरी में ट्रम्पेट प्लांट्स मौजूद थे.

Advertisement

तीसरा दस्तावेज (7 फरवरी 2022):

यह ईमेल एप्सटीन का नहीं है, लेकिन इसमें एक कथित 'victim impact statement' शामिल है. इसमें दिसंबर 2014 की एक घटना का ज़िक्र है, जहां लेखक का दावा है कि उसे स्कोपोलामीन नामक रसायन देकर नशे की हालत में रखा गया, जिससे उसे याददाश्त खोने और अत्यधिक सुस्ती का अनुभव हुआ.

यह भी पढ़ें- यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन को पार्टी में बुलाने वाले डॉ. ओज को ट्रंप ने कैसे सौंपी ये बड़ी जिम्मेदारी?

Advertisement

संक्षेप में समझें तो मौजूद दस्तावेजों में 'ट्रम्पेट प्लांट्स' का तीन बार उल्लेख मिलता है और इनका संबंध स्कोपोलामीन से जोड़ा गया है. यह तथ्य रिकॉर्ड पर मौजूद है.

सुर्खियों में आया पौधा

आपको बता दें कि 'ट्रम्पेट प्लांट' आमतौर पर ब्रुगमैन्सिया या धतूरा प्रजातियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इनके बड़े, लटकते हुए, तुरही जैसे फूल होते हैं. इन्हें अक्सर 'डेविल्स ब्रेथ' या 'डेविल्स ट्रम्पेट' भी कहा जाता है, क्योंकि इनमें स्कोपोलामीन, एट्रोपीन और हायोसायमीन जैसे ट्रोपेन एल्कलॉइड्स पाए जाते हैं.

Advertisement

अमेरिका का पौधा, भारत में भी उगता

चिकित्सा शोध के अनुसार, ये रसायन केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर असर डालते हैं. स्कोपोलामीन का सीमित और नियंत्रित मात्रा में चिकित्सीय उपयोग भी है, जैसे मोशन सिकनेस या ऑपरेशन के बाद होने वाली मिचली में. लेकिन ज्यादा मात्रा में यह भ्रम, मतिभ्रम, चिड़चिड़ापन, धुंधली दृष्टि और गंभीर स्मृति-हानि का कारण बन सकता है. अत्यधिक मामलों में यह कोमा या मृत्यु तक ले जा सकता है.

Advertisement

यह पौधा दक्षिण अमेरिका में ज्यादा मिलता है. हालांकि भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में उगता है. देखने में सुंदर होने के बावजूद, इसका हर हिस्सा जहरीला होता है.

यह भी पढ़ें- एपस्टीन फाइल्स से यूरोप में हड़कंप: ब्रिटेन के पूर्व मंत्री और कई प्रभावशाली हस्तियों के नाम आए सामने

हिंदू परंपरा में यही फूल

भारत में यही तुरहीनुमा धतूरा फूल एक बिल्कुल अलग अर्थ रखता है. हिंदू परंपरा में यह भगवान शिव से गहराई से जुड़ा हुआ है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब विष निकला, तो शिव ने संसार की रक्षा के लिए उसे पी लिया. धतूरा जैसे विषैले और कठोर परिस्थितियों में पनपने वाले पौधे को इसलिए तपस्या, सहनशक्ति और वैराग्य का प्रतीक माना गया.

आज भी देशभर के शिव मंदिरों में, विशेषकर महाशिवरात्रि पर, धतूरा के फूल और फल चढ़ाए जाते हैं. यहां इसकी विषाक्तता से इनकार नहीं किया जाता, बल्कि इसे उस विरोधाभास के रूप में देखा जाता है जहां जहर भी भक्ति और संरक्षण का प्रतीक बन जाता है.

दिलचस्प यह है कि जिस पौधे को पश्चिमी मीडिया 'ज़ॉम्बी फ्लावर' कह रहा है, वही भारत में सदियों से आस्था और परंपरा का हिस्सा रहा है.

Featured Video Of The Day
Indore Horror: MBA Student की हत्या के बाद Boyfriend ने Dead Body के साथ जो किया वो डरावना है!