ईरान पर हमले से पहले बुलाई गई बैठक में ट्रंप की एक भूल आज दुनिया को बहुत भारी पड़ रही

US Iran War and Oil Crisis: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इतने असहाय हो गए हैं कि वो खुद रूस को तेल बेचने को कह रहे हैं, जबकि यही ट्रंप इसे रोकने के लिए महीने पहले भारत पर टैरिफ लगाते थे.

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान जंग में कैसे बड़ी चूक कर दी
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  • अमेरिका और इजरायल के ईरान के खिलाफ युद्ध ने मिडिल ईस्ट के साथ पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है
  • अमेरिकी राष्ट्रपति की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने ईरान के संभावित जवाबी कदमों का सही आकलन नहीं किया था- रिपोर्ट
  • ट्रंप ने सलाहकारों के छोटे समूह पर अधिक भरोसा किया, जिससे अन्य सरकारी एजेंसियों की राय नजरअंदाज हुई- रिपोर्ट
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US Iran War: ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के छेड़े युद्ध ने अब सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं, पूरी दुनिया को झुलसाना शुरू कर दिया है. मिडिल ईस्ट संकट की वजह से तेल की बढ़ी कीमतों ने दुनिया को परेशान कर रखा है. अमेरिका के हाथों अपने सुप्रीम लीडर को गंवाने वाले ईरान ने ऐसा दांव चल दिया है कि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति भी हलकान नजर आ रहे हैं. ईरान ने तेल व्यापार के नब्ज, होर्मुज को ही पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है. वहीं होर्मुज जहां से दुनिया का 20 प्रतिशन तेल-गैस आता-जाता है. क्रूड ऑयल 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, अभी भी यह 100 डॉलर प्रति बैरल के उपर है. 

ट्रंप इतने असहाय हो गए हैं कि वो खुद रूस को तेल बेचने को कह रहे हैं, जबकि यही ट्रंप इसे रोकने के लिए महीने पहले भारत पर टैरिफ लगाते थे. तो बड़ा सवाल यही है कि ट्रंप से क्या गलती हुई?

ट्रंप से क्या गलती हुई?

माना जा रहा है कि जब ईरान पर हमले के लिए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की योजना बनाई जा रही थी तक पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग का हेडक्वाटर) और US नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने इस बात को काफी कम आंका कि अमेरिका के सैन्य हमलों के जवाब में ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को ही बंद कर देगा. CNN ने सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट छापी है जिसके अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने उन संभावित परिणामों का पूरी तरह से हिसाब नहीं लगाया, जिन्हें अब कुछ अधिकारी सरकार के सामने खड़े “सबसे खराब स्थिति (worst-case scenario)” के रूप में बता रहे हैं.

सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन शुरू होने से पहले इसकी योजना से जुड़ी कुछ आधिकारिक बैठकों में उर्जा विभाग और वित्त विभाग के मुख्य अधिकारी मौजूद थे. लेकिन जहां पिछली सरकारों में एजेंसियों की एनालिसिस और उनकी भविष्यवाणियों (आगे क्या हो सकता है) को भी फैसले लेने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा बनाया जाता था, इस बार उन्हें केवल द्वितीयक (कम महत्वपूर्ण) माना गया. रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों ने माना कि अमेरिका के वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट और ऊर्जा सचिव क्रिस राइट इस जंग की योजना बनाने और उसे लागू करने के पूरे चरण में अहम भूमिका निभा रहे थे.

हालांकि रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसलों में ट्रंप का अपने कुछ करीबी सलाहकारों के छोटे समूह पर ज्यादा भरोसा करने का असर यह हुआ कि अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के बीच होने वाली बहस और चर्चा को किनारे कर दिया गया. यह बहस खास तौर पर इस बात पर होनी थी कि अगर ईरान अमेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में हॉर्मुज को बंद कर देता है तो उसके आर्थिक नतीजे क्या हो सकते हैं.

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