- अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा है कि अगर ईरान के नए सुप्रीम लीडर सहयोग नहीं करेंगे, तो उनकी हत्या समर्थन करेंगे
- ट्रंप की मांगों में मुख्य रूप से ईरान का परमाणु हथियार कार्यक्रम छोड़ना शामिल है, जो नए नेता को पालन करना होगा
- US- इजरायल की सेना ने पहले ही मुजतबा के पिता अयातुल्लाह अली खामेनेई को मार गिराया था और नया ऑपरेशन भी संभव है
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई अमेरिका की मांगों के साथ सहयोग नहीं करते, तो वे उनको भी मौत के घाट उतारने के सैन्य ऑपरेशन का समर्थन करेंगे. यह बात वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में कही गई है. ट्रंप की इन मांगों में मुख्य रूप से यह शामिल है कि ईरान अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को छोड़ दे. अगर ईरान के नए सुप्रीम लीडर ऐसा करने से मना करते हैं, तो ट्रंप उन्हें खत्म करने के लिए तैयार बताए जा रहे हैं. अमेरिका और इजरायल की सेना ने जंग के पहले ही दिन मुजतबा के पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को मार दिया था.
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि यह ऑपरेशन संभवतः इजराइल की सेना द्वारा किया जाएगा, ठीक वैसे ही जैसे 28 फरवरी को हुए उस ऑपरेशन में किया गया था जिसमें उसके पिता की मौत हुई थी. ट्रंप ने ईरान द्वारा अली खामेनेई के दूसरे बेटे को नया नेता चुने जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई “शांति से नहीं रह पाएंगे.”
ट्रंप मुजतबा खामेनेई से “खुश नहीं”
फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वे ईरान के नए नेता के चुनाव से “खुश नहीं” हैं. ट्रंप ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि वह शांति से रह पाएंगे.” सुप्रीम लीडर के रूप में मुजतबा खामेनेई की नियुक्ति से पहले ट्रंप ने जोर देकर कहा था कि ईरान के अगले नेता के चयन में अमेरिका की भी भूमिका होनी चाहिए, जैसे पहले अमेरिका वेनेजुएला के मामलों में शामिल रहा है.
ईरान के विपक्षी समूह नेशनल यूनियन फॉर डेमोक्रेसी के रिसर्च डायरेक्टर खोसरो इस्फहानी ने कहा है, “खामेनेई ने अपनी वसीयत में साफ लिखा था कि मुजतबा को उत्तराधिकारी न बनाया जाए.” 56 साल के मुजतबा ने अपनी नियुक्ति से पहले कभी कोई आधिकारिक सरकारी पद नहीं संभाला था. उनका अधिकतर प्रभाव उनके पिता के करीबी दायरे में पर्दे के पीछे काम करने से आया, जब इस्लामिक रिपब्लिक में सत्ता पर रूढ़िवादी पकड़ और मजबूत हो रही थी. 2000 के दशक में लीक हुए अमेरिकी राजनयिक दस्तावेजों में उन्हें “पर्दे के पीछे असली ताकत” बताया गया था. उसी समय उन पर यह आरोप भी लगा था कि उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति चुनावों में हेरफेर कर शासन के वफादार उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित कराने में मदद की.
इसी बीच, इजराइल की सेना पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि कोई भी ईरानी नेता अगर तेहरान के आतंकवाद अभियान को जारी रखता है, तो उसे “सीधे खत्म करने लायक लक्ष्य” माना जाएगा.
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